राजधानी दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव-2026 के मंच पर देश के राजनीतिक, सामाजिक के साथ आर्थिक मुद्दों पर चर्चा हुई. इस दौरान राजनेता, कारोबारी, उद्योगपति और अभिनेता भी शामिल हुए. इस कड़ी में एक खास सेशन में फिक्स्ड इनकम हेड अनुराग मित्तल ने भी शिरकत की. उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य के लिए निवेश बढ़ाना जरूरी है और इसके साथ ही बॉन्ड मार्केट को भी बढ़ाना होगा.
उन्होंने कहा कि, पिछले दो दशकों में भारत की अर्थव्यवस्था ने लगातार मजबूती दिखाई है, लेकिन देश की दीर्घकालिक विकास महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कहीं अधिक निवेश की जरूरत होगी. ‘विकसित भारत’ के विजन को पूरा करने के लिए भारत को अपने बॉन्ड मार्केट को और गहरा बनाना होगा, ताकि विकास से जुड़े बड़े लक्ष्यों के लिए पर्याप्त वित्त जुटाया जा सके. मित्तल ने बताया कि पिछले 20 वर्षों में वैश्विक जीडीपी में भारत की हिस्सेदारी तीन गुना बढ़कर लगभग 1.1 प्रतिशत से करीब 3.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके साथ ही निर्यात क्षेत्र में भी उल्लेखनीय मजबूती आई है, खासकर सेवाओं के निर्यात में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है.
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2016 में 'Reserve Bank of India' द्वारा महंगाई लक्ष्यीकरण (Inflation Targeting) अपनाने के बाद मुद्रास्फीति प्रबंधन में काफी सुधार हुआ है. इससे उधारी की लागत घटकर करीब 6.5 प्रतिशत के स्तर तक आ गई है. हालांकि मित्तल के अनुसार तेज आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए भारत को भारी निवेश की जरूरत पड़ेगी. केवल शहरी विकास के लिए अगले एक दशक में करीब 900 अरब डॉलर की जरूरत होगी. वहीं, नेट-जीरो के लक्ष्य को हासिल करने के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक निवेश की जरूरत पड़ सकती है.
उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर अगले 25 वर्षों में भारत को लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की जरूरत होगी. ऐसे में भविष्य की विकास जरूरतों को पूरा करने के लिए बॉन्ड मार्केट को गहरा करना और निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना बेहद जरूरी है.
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