अटके फ्लैट्स की होगी रजिस्ट्री, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में घर खरीदारों को मिलेगा फायदा!

अगर बदलाव के इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो फिर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में इसका सबसे ज्यादा फायदा होगा. दरअसल, इन ट्विन शहरों में करीब 80 हज़ार घर खरीदार बिना रजिस्ट्री के या तो घरों में रह रहे हैं या फिर वो गृह प्रवेश के लिए रजिस्ट्री की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं.

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घर खरीदारों को बड़ी राहत घर खरीदारों को बड़ी राहत

आदित्य के. राणा

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2023,
  • अपडेटेड 8:06 PM IST

देशभर में ऐसे कई प्रोजेक्ट्स हैं, जहां काम पूरा हो चुका है, लोग रहने भी लगे हैं. लेकिन उनकी रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है. इसकी वजह है कि इस तरह के कई प्रोजेक्ट्स के डेवलपर्स नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल (NCLT) में चले गए हैं यानी ये दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं. इस तरह के सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हैं. 

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लेकिन अब इस तरह के अटके प्रोजेक्ट्स की रजिस्ट्री का रास्ता साफ होने वाला है. फ्लैट्स का मालिकाना हक दिलाने वाला दस्तावेज यानी रजिस्ट्री कराने के लिए सरकार इनसॉल्वेंसी एंड बैंक करप्सी कोड-2016 में संशोधन पर विचार कर रही है. NCLT में गए इन प्रोजेक्ट्स में हजारों ऐसे फ्लैट्स हैं जहां या तो लोग रहने लगे हैं या फिर जल्द ही वो गृहप्रवेश की तैयारी कर रहे थे. अनुमान है कि इस प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी मिल सकती है जिसके बाद लोगों को अपने घर का मालिक बनने का मौका मिल जाएगा. 

रजिस्ट्री के बिना फंसे हैं फ्लैट्स
इस प्रस्ताव पर विचार करते हुए सरकार जिस बात पर सबसे ज्यादा फोकस करेगी वो है कि इन प्रोजेक्ट्स के दिवालिया प्रक्रिया में जाने और इंटरिम रिजोल्यूशन प्रफेशनल (IRP) के नियुक्त हो जाने के बावजूद इनका समाधान आसान नहीं है. वैसे भी बैंकरप्सी कोड शुरुआत से ही रियल एस्टेट सेक्टर की समस्याएं सुलझाने में नाकाम रहा है. सबसे ज्यादा संघर्ष इस कानून ने रियल एस्टेट के मामले में ही किया है और आम्रपाली ग्रुप जैसे मामलों का निपटारा सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद हुआ है. इसमें ग्राहकों को तो घर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है लेकिन अथॉरिटी के हजारों करोड़ जमीन के बकाए के तौर पर फंस हए हैं. 

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यूनिटेक और जेपी ग्रुप के मामले भी सुप्रीम कोर्ट में ही चल रहे हैं. हालांकि ये भी तय है कि अगर NCLT में गए प्रोजेक्ट्स की रजिस्ट्री को मंजूरी मिली तो एक बार फिर अथॉरिटीज को नुकसान होगा. इनको पहले ही फाइनेंशियल क्रेडिटर्स से ऑपेरशनल क्रेडिटर का दर्जा दे मिल चुका है जिसके बाद बकाया रकम हासिल करने वालों की लिस्ट में ये काफी नीचे पहुंच गई हैं. 

रजिस्ट्री होने से सरकार को मिलेगा राजस्व
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्रोजेक्ट्स के फंसने की एक बड़ी वजह है कि यहां पर अथॉरिटी का इतनी रकम डेवलपर्स पर बकाया है कि प्रोजेक्ट अधूरे की श्रेणी में मौजूद है. रजिस्ट्री के लिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा में एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करने होते हैं. इसमें डेवलपर, ग्राहक और अथॉरिटी तीन पक्ष होते हैं. लेकिन बकाया ना चुकाए जाने की वजह से अथॉरिटी डेवलपर को ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (OC) नहीं देगी और त्रिपक्षीय समझौते पर दस्तखत भी नहीं करेगी. इससे ग्राहकों को घर मिलने के बावजूद उनकी रजिस्ट्री नहीं हो रही है. रजिस्ट्री ना होने से ग्राहकों को घर का मालिकाना हक नहीं मिल सकता जिससे आगे खरीद-फरोख्त और लोन लेने में समस्या आती है. लेकिन अगर इन फ्लैट्स की रजिस्ट्री को मंजूरी मिल गई तो फिर राज्य सरकारों के खजाने में बतौर स्टांप ड्यूटी मोटी रकम पहुंच सकती है. 

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नोएडा-ग्रेटर नोएडा को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा 
IBC-2016 में बदलाव के इस प्रस्ताव को अगर मंजूरी मिल जाती है तो फिर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में इसका सबसे ज्यादा फायदा होगा. दरअसल, इन ट्विन शहरों में करीब 80 हज़ार घर खरीदार बिना रजिस्ट्री के या तो घरों में रह रहे हैं या फिर वो गृह प्रवेश के लिए रजिस्ट्री की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं. नोएडा-ग्रेटर नोएडा में लगभग 40 प्रॉजेक्ट्स इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं ऐसे में उनमें रहने वाले लोगों के फ्लैट्स की रजिस्ट्री का दरवाजा बंद है. कुछ प्रोजेक्ट्स में तो डेवलपर्स ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट हासिल करने के बाद NCLT में पहुंच चुके हैं जिसके चलते वहां पर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही हैं. 

नोएडा-ग्रेटर नोएडा की बदल जाएगी सूरत
अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई तो फिर नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी निवेशकों की लॉटरी लग जाएगी. इन दोनों शहरों में कुल 313 ग्रुप हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स को मंजूरी मिली है. इन प्रॉजेक्ट्स में करीब 3.74 लाख फ्लैट्स बनाए जा रहे हैं. अभी तक 2 लाख से ज्यादा फ्लैट्स के लिए ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट जारी किए जा चुके हैं जिनमें से 1.54 लाख फ्लैट्स की ही रजिस्ट्री हुई है. यानी करीब 46 हज़ार फ्लैट्स तो ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट हासिल करने के बावजूद रजिस्ट्री की बाट जोह रहे हैं. वहीं अगर NCLT में जाने वाले दूसरे प्रोजेक्ट्स की बात करें जहां पर अभी तक ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट नहीं मिला है तो वहां भी करीब 34 हजार फ्लैट्स तैयार हैं जिनकी रजिस्ट्री इस नए प्रस्ताव की मंजूरी के बाद मिल सकती है.

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