ADB Report on Economy: कोरोना के बाद भारत ने दुनिया में किया कमाल, ये 5 फैसले कर गए काम

भारत की विकास दर को लेकर आया ADB का अनुमान देश की बढ़ती आर्थिक ताकत का सबूत है. यही नहीं, जॉर्जीवा ने भारत को आर्थिक सुस्ती की धुंध के बीच चमकता सितारा करार दिया है. 

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भारत की तरक्की की कहानी भारत की तरक्की की कहानी

आदित्य के. राणा

  • नई दिल्ली,
  • 19 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 7:07 PM IST

भारत की ग्रोथ स्टोरी को लेकर दुनिया में किसी को शक-ओ-शुब्हा नहीं है. दुनिया में चाहे आर्थिक सुस्ती का जितना असर हो लेकिन भारत की विकास दर लगातार कुलांचे भर रही है. अब एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के एशियन डेवलपमेंट आउटलुक अपडेट में 2023-24 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.4% पर बरकरार रखा गया है. ADB ने 2024-25 के लिए भी पहले की तरह 6.7% के विकास दर अनुमान को बनाए रखा है.

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ADB के मुताबिक भारत की विकास दर में तेजी की वजह मजबूत डिमांड है. इसके पहले 2022-23 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.2% रही थी. देश की इकोनॉमी में ये इजाफा उस वक्त दर्ज किया गया जब अमेरिका और यूरोप समेत पश्चिमी देशों की अर्थव्यस्थाएं महंगाई के दबाव के सामने घुटने टेक चुकी थीं. लेकिन ये संकट अभी खत्म नहीं हुआ है क्योंकि IMF की MD क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है कि मिड टर्म में वैश्विक अर्थव्यवस्था में कमजोरी बने रहने की आशंका है. ऐसे में भारत की विकास दर को लेकर आया ADB का अनुमान देश की बढ़ती आर्थिक ताकत का सबूत है. यही नहीं, जॉर्जीवा ने भारत को आर्थिक सुस्ती की धुंध के बीच चमकता सितारा करार दिया है. 

कब खत्म होगी महंगाई की मुश्किल?
ADB की रिपोर्ट में महंगाई को लेकर जारी किया गया अनुमान काफी राहत भरा है. इसमें कहा गया है कि महंगाई दर में गिरावट का सिलसिला जारी रहेगा और महंगाई एक बार फिर से प्री-कोविड स्तर पर पहुंच सकती है. अपने अनुमान में ADB ने कहा है कि इस साल विकासशील देशों में महंगाई दर 3.6% रह सकती है. वहीं अगले साल महंगाई दर 3.4% रहने का अनुमान ADB ने जताया है. हालांकि इस मामले में IMF की तरफ से अच्छी खबर नहीं आई है. IMF का कहना है कि महंगे फूड और फर्टिलाइजर की वजह से महंगाई फिलहाल बड़ी मुसीबत बनकर खड़ी रहेगी. इसके लिए IMF की MD क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है कि सेंट्रल बैंक्स को अपनी मौद्रिक नीति को ज्यादा सख्त बनाना होगा. भारत में भी बीते करीब 1 साल में रेपो रेट को 2.5% बढ़ाया जा चुका है. इससे घर और कार समेत तमाम तरह के लोन महंगे हो गए हैं. अगर आगे मॉनेटरी पॉलिसी को ज्यादा सख्त किया गया तो फिर ये ग्रोथ में बड़ी रुकावट बन सकती है. 

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कोरोना के बाद भारत ने किया कमाल
ADB के चीफ इकोनॉमिस्ट अल्बर्ट पार्क ने कहा कि एशिया और प्रशांत क्षेत्र तेजी से महामारी से उबर रहे हैं. घरेलू डिमांड और सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में आई तेजी इस ग्रोथ का फ्यूल बन रहे हैं. साथ ही इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं को टूरिज्म में रिकवरी का भी फायदा मिल रहा है. हालांकि, इंडस्ट्रियल गतिविधियां और निर्यात कमजोर रहने की वजह से ग्लोबल ग्रोथ का आउटलुक कमजोर है और डिमांड अगले साल भी कमजोर रह सकती है. भारत का निर्यात भी जून में 22% लुढ़क गया था. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक्सपोर्ट में आई इस कमी पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा है कि भारत की ताकत रहे जेम्स-ज्वैलरी, लेदर और कपड़ों का निर्यात लगातार घट रहा है. यही नहीं अप्रैल-जून तिमाही में भारत का कुल ऑटोमोबाइल निर्यात 28% घट गया है. इसकी वजह है कि अफ्रीका समेत कई विकासशील देशों में कारों की डिमांड कम हो गई है. इसकी वजह है कि वहां पर मुद्रा का अवमूल्यन होने से भारतीय कारों की कीमत अचानक बढ़ गई है. इसके साथ ही ये देश कार खरीदने की जगह विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल जरुरी सामानों को खरीदने पर कर रहे हैं. 

भारत की ग्रोथ स्टोरी पर मोदी सरकार की सराहना 
इसके पहले हाल ही में आई ब्रोकरेज कंपनी बर्नस्टीन की ‘पीएम मोदी के नेतृत्व का दशक-एक लंबी छलांग’ टॉपिक वाली रिपोर्ट में भी भारत की ग्रोथ स्टोरी की जमकर तारीफ की गई है. इसमें दावा किया गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था बीते करीब 9 साल में दुनिया में दसवें नंबर से पांचवें स्थान पर आ गई है. अब आने वाले चंद बरसों में ये दुनिया की टॉप-3 इकोनॉमी में शुमार होने का दम भर रही है. ब्रोकरेज कंपनी के मुताबिक इसकी वजह ऐतिहासिक सुधारों, महंगाई पर नियंत्रण, वित्तीय समावेशन और डिजिटलीकरण के मोर्चे पर मोदी सरकार का शानदार काम है. ऐतिहासिक सुधारों में GST, सड़क, बंदरगाह और ऊर्जा क्षेत्र जैसे बुनियादी ढांचे पर भारी खर्च का जिक्र इस रिपोर्ट में किया गया है. इसके साथ ही अर्थव्यवस्था को संगठित करना, बेहतर नीतिगत माहौल से विनिर्माण के लिए निवेश आकर्षित करना और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाना भी शामिल है. 

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किस तरह बढ़ी भारत की आर्थिक ताकत?
लेकिन जिन खूबियों के दम पर भारत का परचम लहरा रहा है उनमें सब्सिडी के लिए आधार-पैन लिंक का बेहतरीन इस्तेमाल शुमार है. डिजिटलीकरण की सफलता भी भारत की ग्रोथ स्टोरी में बड़ी भूमिका निभा रही है. इसी तरह 50 करोड़ जनधन खातों से बैंक खाताधारकों की संख्या बढ़कर 2011 के 35 फीसदी से बढ़कर 2021 में 77 फीसदी पहुंच गई है. इस कदम से भी इकोनॉमी को आगे बढ़ाने में भरपूर मदद मिली है. वहीं अगर बात करें डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (DBT) की तो 2022-23 तक ये बढ़कर 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है जो 2013-14 में 74,000 करोड़ रुपये था. 

ग्रोथ दमदार, चुनौतियां बरकरार!
हालांकि भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत के सामने कई चुनौतियां भी बरकरार हैं जिनमें शामिल हैं प्रति व्यक्ति आय जहां भारत 127वें स्थान पर है जबकि 2014 में ये 147वें नंबर पर था. इसके अलावा मानव विकास सूचकांक के मामले में 2016 से रैंकिंग में जारी गिरावट पर भी चिंता जाहिर की गई है. वहीं शिक्षा के मामले में महिला साक्षरता बढ़ाने के मोर्चे पर बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. माध्यमिक स्कूलों में नामांकन में लिंग अनुपात एक फीसदी के नीचे है और भ्रष्टाचार के मोर्चे पर खास सुधार नहीं नजर आया है. ऐसे में अगर भारत अपनी इन बाकी चुनौतियों पर जल्द काम करेगा तो मुमकिन है कि देश की तरक्की की रफ्तार अनुमान से भी ज्यादा तेज हो जाएगी.

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