देश के बड़े बैंक Kotak Mahindra Bank के फाउंडर उदय कोटक को Padma Awards 2026 के दौरान 'ट्रेड एंड इंडस्ट्री' कैटेगरी में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है. भारतीय बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में बड़ा योगदान देने के लिए उन्हें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या (Republic Day 2026) पर इस अवॉर्ड से नवाजा गया है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि देश के सबसे बड़े बैंकर के रूप में पहचाने जाने वाले Uday Kotak का सपना कुछ और था. जी हां वे क्रिकेटर बनना चाहते थे और बन गए बैंकर. Uday Kotak Networth की बात करें, को फोर्ब्स बिलेनियर्स इंडेक्स के मुताबिक, ये 14.4 अरब डॉलर है. आइए जानते हैं उनके इस सफर की दिलचस्प कहानी...
बनना था क्रिकेटर, बन गए बैंकर
कोटक महिंद्रा बैंक की गिनती देश के दिग्गज Banks में होती है और इसे शुरू करने वाले उदय कोटक (Uday Kotak) देश के सबसे सफल और अमीर बैंकर माने जाते हैं. खास बात ये है कि कोटक बैंक फाउंडर का सपना बैंकर बनना था ही नहीं, बल्कि उदय कोटक तो शुरू से ही क्रिकेटर बनना चाहते थे. फिर एक हादसे ने पूरी तस्वीर ही बदल दी और साथ ही उनका सपना भी. इसके बाद अस्तित्व में आया कोटक महिंद्रा बैंक.
सचिन तेंदुलकर के गुरु से ली थी ट्रेनिंग
देश के सबसे अमीर बैंकरों में शुमार उदय कोटक का जन्म 15 मार्च 1959 को एक गुजराती कारोबारी परिवार में हुआ था. बचपन से ही वे अच्छे क्रिकेटर के साथ-साथ पढ़ाई में भी आगे रहे थे. क्रिकेट में करियर बनाने का सपना लेकर उन्होंने 1970 के दशक में दिग्गज क्रिकेट कोच रमाकांत आचरेकर से ट्रेनिंग भी ली थी. बता दें मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) के भी गुरु भी Ramakant Achrekar ही थे. सब सही चल रहा था, लेकिन 20 साल की उम्र में कुछ ऐसा हुआ कि उदय कोटक का क्रिकेटर बनने का सपना ही टूट गया.
सिर पर क्रिकेट बॉल और टूट गया सपना
20 साल के उदय कोटक जब क्रिकेट ग्राउंड में खेल रहे थे, तभी अचानक एक तेज बॉल उनके बल्ले से ना टकराकर उनके सिर पर जा लगी. गेंद लगते ही वे बेहोश होकर गिर पड़े, उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए बोल दिया. इसके बाद ही Uday Kotak ने क्रिकेट के मैदान को अलविदा कह दिया. हालांकि, उन्होंने अपने पारिवारिक कॉटन ट्रेडिंग के बिजनेस में एंट्री लेने के बजाय, एक अलग ही पिच पर खेलने का फैसला किया और बैंकिंग सेक्टर में उतर गए.
ऐसे बना कोटक महिंद्रा बैंक
उदय कोटक ने सिडनम कॉलेज से ग्रेजुएट किया था और इसके बाद जमना लाल बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से MBA की डिग्री हासिल की थी. पारिवारिक बिजनेस से अलग कुछ बड़ा करने के इरादा लेकर उन्होंने महज 26 साल की उम्र में Kotak Mahindra Bank की नींव रख दी थी. हालांकि, उन्होंने पहले 'कोटक कैपिटल मैनेजमेंट फाइनेंस लिमिटेड' से बिल डिस्काउंट सर्विस शुरू की थी. इसकी नींव साल 1985 में पड़ गई थी.
RBI से मिला पहला बैंकिंग लाइसेंस
बिल डिस्काउंट के काम के साथ शुरू हुई फर्म ने बाद में लोन पोर्टफोलियो, स्टॉक ब्रोकरिंग, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड्स में विस्तार किया. इसके बाद 2003 में महज 30 लाख रुपये के निवेश से शुरू हुई नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी महिंद्रा ग्रुप के साथ कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) में बदल गई. खास बात ये है कि 22 मार्च 2003 को कोटक महिंद्रा फाइनेंस लिमिटेड को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से बैंकिंग लाइसेंस मिला था. भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में यह पहली कंपनी थी, जिसे बैंकिंग के लिए हरी झंडी मिली थी. बीते 1 सितंबर 2023 को उन्होंने बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ पद को छोड़ दिया था और बैंक के गैर-कार्यकारी निदेशक बन गए थे.