भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने बड़े खतरे को लेकर चेतावनी दी है और कहा है कि दुनिया इस समय बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही है. उन्होंने बजट में बड़े सुधार की उम्मीद जताई. रघुराम राजन ने बुधवार को कहा कि भारत का आगामी बजट अर्थव्यवस्था को मजबूत, अधिक आत्मनिर्भर और तेजी से विकसित करने के लिए लॉन्ग टर्म नजरिए पर फोकस होना चाहिए.
पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में राजन ने कहा कि दुनिया बेहद खतरनाक दौर से गुजर रही है. मेरा मानना है कि (2026-27 का केंद्रीय बजट) एक लॉन्गटर्म नजरिए के साथ एकीकृत होना चाहिए. हम एक अर्थव्यवस्था के रूप में अधिक लचीले, अधिक स्वतंत्र और साथ ही तेजी से आगे कैसे बढ़े, इसपर फोकस करना चाहिए. ताकि अन्य सभी देश भारत को मित्र बनना चाहें, इसके लिए काफी मेहनत की आवश्यकता है और मुझे उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का अगला बजट हमें उस दिशा में ले जाएगा.
पूर्व गवर्नर ने कहा कि AI में निवेश रोमांचक अवसर पेश करता है, लेकिन इसमें बड़ा रिस्क भी शामिल है. लेकिन संस्थाओं पर ज्यादा निर्भर भी नहीं होना चाहिए, जो हमे निचोड़ सकती हैं और हमें कमजोर बना सकती हैं. क्योंकि हमारे पास कोई ऐसा मार्केट नहीं है, जो पास में हो, समृद्ध हो, जिसे हम अपने अलावा दूसरों को भी सप्लाई कर सकें.
पड़ोसी देशों से मजबूत संबंध बनाने की जरूरत
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें निवेशकों के अनुकूल पॉलिसी बनाकर पहले से ही योगदान दे रही हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अभी और भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है. राजन ने बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों समेत मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंध बनाने के महत्व पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत के पास मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों का विस्तार करने और वैश्विक आपूर्ति चेन में अधिक गहराई से एकीकृत होने का एक वास्तविक अवसर है.
चीन से सीख लेने की आवश्यकता
भारत की विकास यात्रा पर राजन ने कहा कि देश को चीन की गलतियों से सीख लेने की जरूरत है, जिसके कुछ हिस्से अस्थिर साबित हुए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उसमें से कुछ चीजें अस्थिर थीं और हम देख रहे हैं कि चीनी असेट मार्केट को अब किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और आप जानते हैं कि इसके ठीक होने में कई साल लग सकते हैं. रघुराम राजन ने अव्यवहारिक बुनियादी ढांचे और आवास निवेशों के खिलाफ भी चेतावनी दी.
हर शहर मेट्रो चाहता है, लेकिन हर शहर में मेट्रो स्टेशनों को सही जगह पर बनाने की क्षमता नहीं होती है और अगर मेट्रो आ जाए तो उसमें निवेश का कुछ हिस्सा समय के साथ वसूल करना मुश्किल हो सकता है. स्पष्ट तौर र हमें ऐसी पब्लिक संरचना का निर्माण नहीं करना चाहिए, जिसका लोग उपयोग नहीं कर सकें.
इसमें आवास भी शामिल है, क्योंकि सभी प्रकार के आवास, भले ही हम एक गरीब देश हों जहां बहुत से लोग बेघर हों, का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं किया जा सकता है, इसलिए हमें अनियंत्रित विकास के प्रति सतर्क रहना होगा.
आजतक बिजनेस डेस्क