जन-धन से डिजिटल इंडिया और आयकर राहत से लेकर 'अमृत काल' तक का सफर... एक दशक में ऐसे बदली भारत की बजट नीति

मोदी सरकार के पिछले 11 बजटों ने भारत को कल्याणकारी राज्य से वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में काम किया है. 2014 में कर राहत से शुरू हुआ सफर अब ₹12 लाख की कर-मुक्त आय, डिजिटल इंडिया और ग्रीन एनर्जी तक पहुंच गया है.

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एक दशक के बजट में दिखी विकास की अलग कहानी (Photo: ITG) एक दशक के बजट में दिखी विकास की अलग कहानी (Photo: ITG)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:23 AM IST

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में बजट पेश करने जा रही हैं. बीते एक दशक में मोदी सरकार ने बजट को सिर्फ आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं रहने दिया, बल्कि इसे देश की आर्थिक दिशा और भविष्य की रणनीति तय करने का मजबूत माध्यम बनाया है. 

साल 2014 से 2025 तक पेश किए गए बजटों में विकास, कल्याण और सुधार-तीनों का संतुलित समावेश देखने को मिला.मोदी सरकार के शुरुआती बजटों (2014–16) में आम जनता को कर राहत देने के साथ बुनियादी ढांचे पर खास फोकस किया गया. 

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पहले ही बजट में आयकर छूट सीमा बढ़ाकर ₹2.5 लाख और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹3 लाख की गई. निवेश सीमा को ₹1.5 लाख तक बढ़ाया गया. इसी दौरान डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत जैसे बड़े अभियानों की नींव रखी गई.

 2015–16 के बजट में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देते हुए राज्यों को अधिक कर हिस्सेदारी दी गई. जनधन योजना, मुद्रा लोन और अटल पेंशन योजना के जरिए वित्तीय समावेशन को नई गति मिली. साथ ही, कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती और काले धन पर सख्ती का रोडमैप सामने आया.

कई क्षेत्रों में हुए बड़े निवेश

2016 से 2019 के बीच सरकार का फोकस कृषि और ग्रामीण विकास पर रहा. किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया गया. सिंचाई, फसल बीमा और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश हुए. रेलवे बजट को सामान्य बजट में शामिल करना एक ऐतिहासिक सुधार रहा. 

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इसी दौर में आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत हुई, जिसने करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की और दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना बनी. पीएम-किसान योजना के जरिए किसानों को सालाना आय सहायता दी गई. इस दौरान ई-नाम, फसल बीमा, और ग्रामीण आवास जैसी योजनाओं को बढ़ावा मिला. किसानों के लिए एमएसपी को लागत का 1.5 गुना तय किया गया.

2019 के बाद सरकार ने भारत को $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा. आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती दी गई. कोविड महामारी के दौरान स्वास्थ्य बजट बढ़ाया गया और वैक्सीनेशन के लिए विशेष प्रावधान किए गए. 

2019 के अंतरिम बजट में पीएम-किसान योजना लॉन्च हुई, जिसके तहत छोटे किसानों को ₹6,000 सालाना आय सहायता दी गई. साथ ही, ₹5 लाख तक की आय पर कर छूट ने मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी.

2020-21 में आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी गई. ₹100 लाख करोड़ की इंफ्रा योजना, सरलीकृत आयकर व्यवस्था, और LIC IPO जैसे ऐतिहासिक फैसले किए गए. 2021-22 में महामारी के बीच स्वास्थ्य बजट को दोगुना कर ₹2.23 लाख करोड़ किया गया और COVID टीकाकरण के लिए ₹35,000 करोड़ का प्रावधान किया गया. साथ ही, PLI स्कीम के जरिए विनिर्माण को बढ़ावा मिला.

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जब आयकर में मिली बड़ी राहत

2022-23 के बजट में PM GatiShakti योजना के तहत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया. ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, डिजिटल रुपया, और सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड जैसी पहल हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण रहीं.  2024 के अंतरिम बजट में सरकार ने 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर लाने का दावा किया. 

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2025-26 में मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए ₹12 लाख तक की आय को कर मुक्त किया गया. किसानों, MSME, AI, न्यूक्लियर एनर्जी और रिसर्च में बड़े निवेश की घोषणा की गई. बीमा क्षेत्र में 100% FDI और फिस्कल डेफिसिट को 4.4% तक लाने का लक्ष्य वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है.

मोदी सरकार के बजटों ने पिछले दशक में भारत को कल्याणकारी राज्य से विकासशील अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर किया. डिजिटल इंडिया से लेकर ग्रीन इंडिया तक, किसानों से लेकर स्टार्टअप्स तक, और मध्यम वर्ग से लेकर उद्योग जगत तक, हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाई गईं. आने वाले वर्षों में इन बजटों की दिशा भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने में निर्णायक साबित हो सकती हैं.

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