वित्तमंत्री जेटली ने बजट को फाइनल टच दे दिया है. सोमवार को वह अपना तीसरा चुनौतीपूर्ण बजट पेश करेंगे. उनके समक्ष कृषि क्षेत्र और उद्योग जगत की जरूरतों के बीच संतुलन बिठाने की कड़ी चुनौती होगी. जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बीच सार्वजनिक खर्च के लिए संसाधन जुटाने का लक्ष्य भी होगा. लेकिन आकलन है कि मोदी सरकार के दूसरे बजट में ये पांच महत्वपूर्ण चीजें हो सकती हैं-
1) सर्विस टैक्स बढ़ेगा
सरकार सर्विस टैक्स 14.5 फीसदी से बढ़ाकर 16 फीसदी कर सकती है. हालांकि इसके साथ ही सर्विस टैक्स के लिए न्यूनतम सालाना कारोबार की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख भी कर सकती है. मतलब कुल मिलाकर नहीं पड़ेगा. छोटे कारोबारियों को फायदा होगा, क्योंकि उनका एक बड़ा तबका सर्विस टैक्स के दायरे से बाहर हो जाएगा.
2) रॉबिन हुड टैक्स के लिए तैयार रहें
जैसे रॉबिन हुड अमीरों को लूटकर गरीबों में पैसे बांटता था हो सकता है, बजट में उसी तर्ज पर अमीरों पर ज्यादा टैक्स का ऐलान किया जाए. पिछले साल एक करोड़ रुपये से ज्यादा सालाना कमाई वालों के टैक्स पर 10 से 12 फीसदी का सरचार्ज लगाया गया था. लेकिन इकोनॉमिक सर्वे में ही इस बात के संकेत दे दिए गए हैं कि अमीरों पर आम लोगों के बजाय कुछ ज्यादा टैक्स होना चाहिए.
3) होमलोन पर बढ़ेगा टैक्स का फायदा
बहुत उम्मीद है कि दिल्ली-एनसीआर और मुंबई जैसे बड़े शहरों में होमलोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट की सीमा 2 लाख सालाना से बढ़ा दी जाए. एसोचैम ने तो इसे 4 लाख करने की मांग की है. इस बार बहुत चांस है कि हाउसिंग सेक्टर को से इस पर मुहर लग जाए.
4) पीपीएफ की मैच्योरिटी पर टैक्स
अगर ये हुआ तो बहुत सारे लोगों को निराशा हो सकती है. अभी पीपीएफ में आप जो पैसा जमा करते हैं, उसे निकालते वक्त कोई टैक्स नहीं देना होता. अगर लेकिन इकोनॉमिक सर्वे में रकम निकासी पर टैक्स नहीं लगाने को गलत ठहराया गया है. इसी वजह से ये आशंका जताई जा रही है कि सरकार अब पीपीएफ की रकम निकालने पर टैक्स लगा सकती है.
5) सस्ते गैस सिलेंडर कम हो सकते हैं
हो सकता है कि सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों की संख्या कम कर दी जाए या एक तय आमदनी से ज्यादा के लोगों के लिए सस्ते सिलेंडर पूरी तरह खत्म कर दिए जाएं. है कि सब्सिडी का फायदा उन्हीं लोगों को मिले, जिन्हें इसकी जरूरत है. इस नीति का असर आपके रसोई गैस के बिल पर दिख सकता है.
स्वपनल सोनल