पुराने अंदाज में दिखे लालू यादव, राबड़ी आवास पर हुआ 'लौंडा डांस', देखें VIDEO

पटना में लंबे समय बाद लालू प्रसाद यादव पुराने अंदाज में नजर आए. राबड़ी देवी आवास पर चैता और लौंडा नाच का आयोजन हुआ, जहां तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे. कार्यक्रम में राष्ट्रीय जनता दल के कई बड़े नेताओं को बुलाया गया. कई वर्षों बाद लालू–राबड़ी आवास पर ऐसा सांस्कृतिक आयोजन हुआ.

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आयोजन में तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे.(Photo: Screengrab) आयोजन में तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे.(Photo: Screengrab)

शशि भूषण कुमार

  • पटना,
  • 29 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:37 PM IST

पटना में लंबे समय बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पुराने अंदाज में नजर आए. राजधानी पटना स्थित राबड़ी देवी के आवास पर चैता और लौंडा नाच का आयोजन किया गया, जहां पारंपरिक लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली. इस आयोजन में तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे और उन्होंने लोक गायन चैता तथा लौंडा नाच का आनंद लिया.

जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम में राष्ट्रीय जनता दल के कई बड़े नेताओं को भी आमंत्रित किया गया था. बताया जा रहा है कि कई वर्षों के बाद लालू–राबड़ी आवास पर इस तरह का सांस्कृतिक आयोजन हुआ है. कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक गीतों और नृत्य की प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सव जैसा बना दिया, जहां मौजूद नेताओं और मेहमानों ने लोक संस्कृति का आनंद उठाया. यह आयोजन राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है.

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यह भी पढ़ें: Land For Job Case: लालू प्रसाद यादव पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, ट्रायल रोकने के साथ FIR और चार्जशीट रद्द करने की मांग

‘लैंड-फॉर-जॉब्स’ केस में लालू यादव को झटका

बता दें कि 24 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘लैंड-फॉर-जॉब्स’ मामले में आरजेडी प्रमुख लालू यादव को बड़ा झटका देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी. अदालत ने सीबीआई की एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि मामला कानूनी रूप से आगे बढ़ सकता है. न्यायमूर्ति जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A वर्ष 2018 में लागू हुई थी, जबकि आरोप 2004 से 2009 के बीच के हैं. 

इसलिए पूर्व स्वीकृति का अभाव जांच या एफआईआर को अमान्य नहीं बनाता. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका में कोई दम नहीं है और इसे खारिज किया जाता है. साथ ही 2022, 2023 और 2024 में दाखिल तीनों चार्जशीट तथा संज्ञान आदेशों को रद्द करने की मांग भी ठुकरा दी गई.

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क्या है मामला?

दरअसल, यह मामला 2004-2009 के दौरान भारतीय रेल के वेस्ट सेंट्रल ज़ोन, जबलपुर में ग्रुप-डी भर्ती से जुड़ा है. आरोप है कि भर्ती के बदले जमीन के प्लॉट यादव परिवार या सहयोगियों के नाम ट्रांसफर किए गए.

यादव का तर्क था कि बिना पूर्व अनुमति के जांच और चार्जशीट अवैध हैं. अदालत ने कहा कि आरोप उनके आधिकारिक फैसलों से सीधे जुड़े नहीं बल्कि प्रभाव के इस्तेमाल से संबंधित हैं, इसलिए धारा 17A लागू नहीं होती.

अदालत ने माना कि मामले में बाद में स्वीकृति मिल चुकी है और सुनवाई उन्नत चरण में है. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने भी याचिका को देर से दायर बताया. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार से लड़ाई को मजबूत करना जरूरी है. 

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