95 साल में पति का निधन, शव के पास रोते-रोते 90 साल की पत्नी ने भी तोड़ा दम, एक साथ निकली शव यात्रा

बिहार के समस्तीपुर जिले से पति-पत्नी के अटूट प्रेम की एक दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई है. 95 वर्षीय पति की मौत के कुछ ही घंटों बाद उनकी 90 वर्षीय पत्नी ने भी प्राण त्याग दिए. इसके बाद गांव में दोनों की एक साथ गाजे-बाजे के साथ शव यात्रा निकाली गई, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं.

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बुजुर्ग पति-पत्नी की एक साथ निकली शव यात्रा. (File Photo: ITG) बुजुर्ग पति-पत्नी की एक साथ निकली शव यात्रा. (File Photo: ITG)

जहांगीर आलम

  • समस्तीपुर,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:39 AM IST

बिहार के समस्तीपुर का यह मामला पति-पत्नी के अटूट प्रेम की मिसाल है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. यहां 95 वर्षीय पति की मौत के कुछ ही घंटों बाद 90 वर्षीय पत्नी ने भी प्राण त्याग दिए. इसके बाद गांव में गाजे-बाजे के साथ पति-पत्नी की एक साथ शव यात्रा निकाली गई, जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया.

मामला समस्तीपुर जिले के उजियारपुर प्रखंड अंतर्गत परोरिया पंचायत के वार्ड संख्या 11 का है. यहां रहने वाले 95 साल के युगेश्वर राय का निधन हो गया था. इस खबर से परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई. परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट ही रहे थे कि तभी एक और दुखद घटना घट गई.

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पति की मौत से सदमे में आईं उनकी 90 वर्षीय पत्नी तेतरी देवी शव के पास बैठकर लगातार रोती रहीं. परिजनों के अनुसार, वह बार-बार पति का नाम ले रही थीं. इस दौरान वह अचानक बेसुध होकर गिर पड़ीं. परिजन कुछ समझ पाते, उससे पहले ही उनकी भी सांसें थम गईं. इस तरह पति की अर्थी उठने से पहले ही पत्नी ने भी प्राण त्याग दिए.

बुजुर्ग दंपति की एक साथ मौत की खबर मिली तो आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचने लगे. हर कोई इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठा. ग्रामीणों का कहना था कि आज के दौर में जहां रिश्ते कमजोर होते जा रहे हैं, वहीं इस दंपति ने सात जन्मों तक साथ निभाने के वचन को सच कर दिखाया.

यह भी पढ़ें: अंतिम सांस तक निभाया वादा... पति की मृत्यु के 20 मिनट बाद पत्नी ने भी तोड़ा दम, घर से एक साथ उठी दो अर्थियों को देख हर कोई हुआ गमगीन

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मृतक दंपति अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. उनके तीन बेटे जीवछ राय, रंजीत राय और राजीव राय और दो बेटियां हैं. सभी की शादी हो चुकी है. परिवार में पोते-पोतियां भी हैं. बच्चों का कहना है कि उनके माता-पिता का रिश्ता बेहद मजबूत था. वे हमेशा एक-दूसरे के साथ ही जीवन बिताना चाहते थे.

गांव के लोगों ने मिलकर दंपति की एक साथ शव यात्रा निकालने का निर्णय लिया. गाजे-बाजे के साथ निकली इस शव यात्रा में पूरा गांव शामिल हुआ. हर आंख नम थी और हर जुबान पर सिर्फ यही बात थी कि यह सच्चे प्रेम और समर्पण की मिसाल है. अंतिम संस्कार के लिए दोनों पार्थिव शरीर को बेगूसराय जिले के तेघड़ा स्थित अयोध्या घाट ले जाया गया, जहां गंगा तट पर रीति-रिवाजों के साथ पति-पत्नी का अंतिम संस्कार किया गया. इस घटना की चर्चा पूरे इलाके के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी हो रही है.

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