बिहार के राजस्व अधिकारी सप्ताह में दो दिन करेंगे जन सुनवाई, सिस्टम को पारदर्शी बनाने में जुटी नीतीश सरकार

बिहार सरकार ने राजस्व प्रशासन को आम जनता के और करीब लाने और शिकायत निस्तारण को पारदर्शी बनाने का कदम उठाया है. 19 जनवरी, 2026 से सभी राजस्व पदाधिकारी हर सोमवार और शुक्रवार को कार्यालय में उपस्थित रहकर आम नागरिकों की समस्याएं सुनेंगे. नागरिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और शिकायतों का डिजिटल संधारण अनिवार्य किया गया है. प्रमंडलीय आयुक्त और समाहर्ता प्रशासन को संवेदनशील और जवाबदेह बनाने में नेतृत्व करेंगे, जिससे जनविश्वास मजबूत होगा.

Advertisement
नागरिकों के साथ शालीन और सम्मानजनक व्यवहार करना होगा. (File Photo: ITG) नागरिकों के साथ शालीन और सम्मानजनक व्यवहार करना होगा. (File Photo: ITG)

रोहित कुमार सिंह

  • पटना,
  • 17 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:54 PM IST

बिहार सरकार ने राजस्व प्रशासन को आम जनता के और करीब लाने और शिकायत निस्तारण को पारदर्शी बनाने का बड़ा कदम उठाया है. अब राज्य के सभी राजस्व पदाधिकारी हर सोमवार और शुक्रवार को अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपस्थित रहकर आम नागरिकों की समस्याएं सुनेंगे. यह नई व्यवस्था 19 जनवरी, 2026 से लागू होगी.

उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राजस्व प्रशासन का मकसद केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और सम्मानजनक समाधान सुनिश्चित करना है. इसी उद्देश्य से राज्य के सभी राजस्व पदाधिकारियों को प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपस्थित रहकर आम लोगों की शिकायतें सुनने का निर्देश दिया गया है. यह व्यवस्था 19 जनवरी, 2026 से प्रभावी होगी.

Advertisement

उपमुख्यमंत्री ने दिए ये निर्देश
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लागू सात निश्चय–3 (2025–2030) के तहत स्तंभ–7 ‘सबका सम्मान–जीवन आसान (Ease of Living)’ के संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए यह फैसला लिया गया है. इस संबंध में विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल के माध्यम से सभी जिलों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं.

उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग से जुड़ी जमीनी समस्याओं को समझने और समाधान के लिए ‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ की शुरुआत पटना से की गई थी. इसके बाद लखीसराय, मुजफ्फरपुर, सहरसा, पूर्णिया और भागलपुर में भी संवाद कार्यक्रम आयोजित हुए, जहां नागरिकों ने सीधे अपनी समस्याएं रखीं. इन अनुभवों से राजस्व प्रशासन को और अधिक संवेदनशील व जवाबदेह बनाने की जरूरत सामने आई.

नागरिकों के साथ शालीन और सम्मानजनक व्यवहार करना होगा
निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी राजस्व कार्यालयों में आम नागरिकों के साथ शालीन और सम्मानजनक व्यवहार किया जाए. साथ ही कार्यालय परिसरों में पेयजल, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी, जिसके लिए मुख्यालय स्तर से अलग आवंटन की व्यवस्था की जा रही है.

Advertisement

इसके अलावा, राजस्व विभाग में प्राप्त सभी शिकायतों का डिजिटल संधारण अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि उनके त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी निस्तारण के साथ निगरानी भी सुनिश्चित की जा सके. इससे प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी. निर्देश के तहत प्रमंडलीय आयुक्त और जिलों के समाहर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में राजस्व प्रशासन को सुदृढ़ बनाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगे. उनका दायित्व होगा कि राजस्व प्रक्रियाओं के कारण आम लोगों को होने वाली परेशानियों को कम किया जाए और जीवन स्तर में सुधार लाया जाए.

राज्य सरकार के इस निर्णय को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे राजस्व विभाग आम नागरिकों के और करीब आएगा और जनविश्वास को मजबूती मिलेगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement