बिहार के 42 विधायकों पर लटकी तलवार, पटना हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस, जानकारी छुपाने से जुड़ा है मामला

बिहार विधानसभा के 42 विधायकों के खिलाफ शपथ पत्र में तथ्यों को छिपाने के आरोप पर पटना हाई कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. चुनाव में हारे प्रत्याशियों और कुछ मतदाताओं ने नामांकन की वैधता को चुनौती दी है. सीनियर एडवोकेट शशि भूषण मंगलम ने बताया कि शपथ पत्र के कुछ हिस्से खाली छोड़े गए थे, जिसके बावजूद नामांकन स्वीकार कर लिया गया.

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42 विधायकों की बढ़ी मुश्किलें. (File Photo: PTI) 42 विधायकों की बढ़ी मुश्किलें. (File Photo: PTI)

शशि भूषण कुमार

  • पटना,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:49 PM IST

बिहार के तीन दर्जन से ज्यादा विधायकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. पटना हाई कोर्ट ने बिहार विधानसभा के 42 विधायकों को नोटिस जारी किया है. यह मामला नामांकन के दौरान दाखिल किए गए शपथ पत्र में तथ्यों को छिपाए जाने से जुड़ा है.

पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट शशि भूषण मंगलम ने इस संबंध में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जिन 42 विधायकों को नोटिस जारी किया गया है, उनके द्वारा दाखिल शपथ पत्र में तथ्यों की पूरी और सही जानकारी नहीं दी गई थी. आरोप है कि कुछ विधायकों ने शपथ पत्र के कुछ पैराग्राफ खाली छोड़ दिए थे, जबकि निर्धारित प्रारूप में सभी बिंदुओं की स्पष्ट जानकारी देना आवश्यक होता है.

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पटना हाईकोर्ट ने 42 विधायकों को भेजा नोटिस

इसके बावजूद संबंधित निर्वाची पदाधिकारी द्वारा उनके नामांकन को वैध घोषित कर दिया गया. इसी आधार पर चुनाव में पराजित प्रत्याशियों और कुछ मतदाताओं ने इस मुद्दे को अदालत में चुनौती दी. याचिका में कहा गया कि शपथ पत्र में जानकारी छिपाना गंभीर मामला है और यह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा प्रश्न है.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि शपथ पत्र में आवश्यक जानकारी पूरी तरह से नहीं दी गई थी या कुछ कॉलम खाली छोड़े गए थे, तो नामांकन की वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है. अदालत में दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान नियमों का पालन सुनिश्चित करना निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी है.

तथ्य छिपाने का आरोप

मामले पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट ने संबंधित 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अदालत ने उनसे यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनके द्वारा दाखिल शपथ पत्र में तथ्यों को लेकर जो सवाल उठाए गए हैं, उन पर उनका क्या पक्ष है.अब इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान अदालत सभी पक्षों की दलीलें सुनेगी.

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