साइबर ठगी का शिकार आम लोग ही नहीं माननीय भी हो रहे हैं. बिहार विधान परिषद में जब साइबर ठगी को लेकर चर्चा हुई तो सदन के कई सदस्यों का दर्द छलक पड़ा.
विधान परिषद में गुरुवार को महेश्वर सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि ठगी के तौर-तरीके अपनाकर बड़े पैमाने पर साइबर क्रिमिनल्स राज्य की जनता को ठग रहे हैं. हजारों लोग इसका शिकार हो चुके हैं.
मॉल या बड़ी दुकान में फीडबैक लेने के नाम पर, छुट्टी में घूमने, मुफ्त डिनर, टूर पैकेज या सीबीआई अधिकारी बताकर ठगी की जा रही है. महेश्वर सिंह ने कहा कि साइबर ठगी करने वालों के घरों पर बुलडोजर क्यों नहीं चलाया जाता है?
एमएलसी संजय सिंह ने कहा कि एक बार मुझे भी फोन आया. ठगों ने कहा कि आपके बेटे का किडनैप हो गया है. इस मोबाइल पर पैसा ट्रांसफर कर दो.
उन्होंने कहा कि भोले-भाले लोग साइबर ठगी में फंस रहे हैं. गुमनाम फोन उठाने पर कई तरह की धमकी दी जाती है. तीन साल पहले मैंने खुद साइबर थाने में केस दर्ज करवाया था.
वहीं, एमएलसी संजीव सिंह ने कहा कि स्कूल के सिलेबस में साइबर से जुड़े मुद्दे भी शामिल किया जाए. माध्यमिक स्कूलों से ही साइबर शिक्षा का पाठ्यक्रम शामिल किया जाए.
एमएलसी शशि यादव ने बताया कि एक बार मेरी दोस्त ने साइबर थाने में मामला दर्ज कराया, लेकिन तुरंत एक्शन नहीं लिया गया. हैरानी की बात है कि एक दिन बाद पैसा ट्रांसफर हो गया. इसका तुरंत समाधान खोजा जाए.
माननीयों की शिकायत पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि साइबर ठगी के 1,17,812 मामले सामने आए हैं. इनमें से 54,256 का अकाउंट्स तुरंत ब्लॉक कराया गया. 5000 से ज्यादा का पूरा पैसा वापस भी कराया गया.
तीन महीने पहले ही संबंधित यूनिट की स्थापना सरकार ने की है. यह सरकार की महत्वपूर्ण यूनिट है. इससे जुड़ी वैकेंसी भी सरकार ला रही है. सरकार की कोशिश है कि साइबर ठगी को पूरी तरह से रोका जाए.
शशि भूषण कुमार