पटना गर्ल्स हॉस्टल कांड के बाद उठे सवाल, दरभंगा से सामने आई चौंकाने वाली खामी

पटना गर्ल्स हॉस्टल की घटना के बाद छात्राओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. इसी क्रम में 'आजतक' की टीम दरभंगा के S.K. Tower गर्ल्स हॉस्टल पहुंची, जहां 60 से अधिक छात्राएं रहती हैं. टीम से हॉस्टल प्रबंधन ने बताया कि प्रशासन से कोई गाइडलाइन नहीं मिली है, फिर भी सीसीटीवी और महिला स्टाफ के जरिए सख्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है.

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घर से दूर पढ़ने वाली बेटियां कितनी सुरक्षित?(Photo: Prahalad Kumar/ITG) घर से दूर पढ़ने वाली बेटियां कितनी सुरक्षित?(Photo: Prahalad Kumar/ITG)

प्रह्लाद कुमार

  • दरभंगा,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:07 PM IST

पटना के गर्ल्स हॉस्टल में हुई घटना के बाद यह सवाल तेज हो गए हैं कि घर से दूर हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाली छात्राएं आखिर कितनी सुरक्षित हैं. इसी चिंता के बीच 'आजतक' की टीम दरभंगा के एक बड़े गर्ल्स हॉस्टल S.K. Tower पहुंची, जहां 60 से ज्यादा लड़कियां अपने घरों से दूर रहकर पढ़ाई कर रही हैं. टीम ने हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन को करीब से परखा.

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हॉस्टल में मौजूद महिला मैनेजर ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से उन्हें सुरक्षा को लेकर कोई लिखित गाइडलाइन अब तक नहीं मिली है. इसके बावजूद हॉस्टल प्रबंधन ने अपने स्तर पर पूरी और सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू कर रखी है. मैनेजर के मुताबिक, यहां रहने वाली छात्राएं न सिर्फ खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं, बल्कि उन्हें पढ़ाई के लिए घर जैसा माहौल भी दिया जाता है.

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पांच साल में कोई शिकायत नहीं, CCTV से हर कोना सुरक्षित

हॉस्टल प्रबंधन का दावा है कि बीते पांच वर्षों में छात्राओं की ओर से सुरक्षा को लेकर कोई शिकायत सामने नहीं आई है. पूरे हॉस्टल परिसर को सीसीटीवी कैमरों से कवर किया गया है. कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग दो जगह होती है. एक हॉस्टल के अंदर और दूसरी हॉस्टल संचालक के मोबाइल फोन पर.

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छात्राओं के आने-जाने से लेकर हॉस्टल के बाहर की गतिविधियों पर भी लगातार नजर रखी जाती है. किसी भी तरह की परेशानी या संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है. प्रबंधन का कहना है कि सुरक्षा में कोई भी लापरवाही नहीं बरती जाती है.

पुरुषों की एंट्री पर सख्त पाबंदी, मुलाकात के नियम तय

हॉस्टल के अंदर किसी भी पुरुष के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक है. चाहे वह छात्रा के पिता, भाई या कोई रिश्तेदार ही क्यों न हो. किसी भी पारिवारिक सदस्य से मुलाकात केवल रिसेप्शन काउंटर पर ही कराई जाती है और वह भी परिवार या माता-पिता की पूर्व सूचना के बाद.

अगर किसी विशेष परिस्थिति में मरम्मत या किसी अन्य काम के लिए किसी पुरुष मिस्त्री या मजदूर को अंदर बुलाना पड़ता है, तो महिला वार्डन खुद उसके साथ रहती है और काम पूरा होने तक निगरानी करती है. हॉस्टल का पूरा संचालन महिला स्टाफ के हाथों में है, जो 24 घंटे और सातों दिन मौजूद रहती हैं.

प्रशासन की गाइडलाइन न होने पर सवाल

हालांकि, हॉस्टल संचालक का कहना है कि निजी गर्ल्स हॉस्टलों के लिए सरकार या जिला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट सुरक्षा गाइडलाइन नहीं है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस नियम क्यों नहीं बना रहा है. क्या किसी बड़ी और गंभीर घटना का इंतजार किया जा रहा है?

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पटना जैसी घटनाओं के बाद यह चिंता और भी गहरी हो जाती है कि छात्राओं की सुरक्षा को लेकर एक समान और सख्त नियम क्यों नहीं लागू किए जाते.

छात्राओं की राय-डर है, लेकिन भरोसा भी

हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं का कहना है कि पटना की घटना के बाद उनके मन में थोड़ा डर जरूर है. जब वे हॉस्टल से बाहर निकलती हैं, तो मन में आशंका बनी रहती है. छात्राओं ने यह भी कहा कि बिहार ही नहीं, देशभर में बढ़ती घटनाएं उन्हें चिंता में डालती हैं.

इसके बावजूद छात्राओं का कहना है कि दरभंगा के इस हॉस्टल में वे खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती हैं. यहां रहने वाली मैडम और स्टाफ उनका ख्याल परिवार की तरह रखते हैं, जिससे उन्हें घर से दूर होने का एहसास कम होता है और वे निश्चिंत होकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे पाती हैं.

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