विधायक हॉर्स-ट्रेडिंग केस: बिहार पुलिस संदिग्धों का करा सकती है लाई-डिटेक्शन टेस्ट

बिहार की राजनीति में हलचल मचाने वाले विधायक हॉर्स-ट्रेडिंग मामले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है. आर्थिक अपराध इकाई (EOU) इस मामले में संदिग्धों का लाई-डिटेक्शन टेस्ट कराने पर विचार कर रही है.

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बिहार पुलिस संदिग्धों का करा सकती है लाई-डिटेक्शन टेस्ट. (Representational image) बिहार पुलिस संदिग्धों का करा सकती है लाई-डिटेक्शन टेस्ट. (Representational image)

aajtak.in

  • पटना,
  • 20 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 9:00 PM IST

बिहार की राजनीति में हलचल मचाने वाले विधायक हॉर्स-ट्रेडिंग मामले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है. आर्थिक अपराध इकाई (EOU) इस मामले में संदिग्धों का लाई-डिटेक्शन टेस्ट कराने पर विचार कर रही है. जांच अधिकारियों का कहना है कि कई आरोपियों से पूछताछ की गई, लेकिन कुछ सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिले. ऐसे में पुलिस वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लेने की तैयारी कर रही है.

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किन-किन नेताओं से हुई पूछताछ
EOU ने इस मामले में कई नेताओं से पूछताछ की है. इनमें पूर्व राजद विधायक बीमा भारती और भाजपा विधायक मिश्री लाल यादव शामिल हैं. जांच अधिकारियों का कहना है कि दोनों सहित कुछ अन्य विधायकों से सवाल पूछे गए, लेकिन उनके जवाबों में कई असंगतियां पाई गईं.

क्या है पूरा मामला?
यह केस उस फ्लोर टेस्ट से जुड़ा है, जो फरवरी 2024 में हुआ था. उस समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होकर NDA में वापसी की थी. विश्वास मत जीतने से पहले यह आरोप लगे थे कि विपक्षी दल राजद (RJD) सरकार बचाने के लिए सत्तारूढ़ दल के विधायकों को खरीदने की कोशिश कर रहा था.

जेडीयू विधायक सुधांशु शेखर ने पटना के कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें आरजेडी की तरफ से 10 करोड़ रुपये नकद और एक मंत्री पद की पेशकश की गई थी. इसके बदले उनसे सरकार गिराने और आरजेडी को समर्थन देने को कहा गया था.

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किस ओर बढ़ी जांच की दिशा
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि कई विधायकों से पूछताछ की गई है और जांच लगातार जारी है. उन्होंने कहा, “कुछ संदिग्ध सवालों के सही जवाब नहीं दे पाए. ऐसे में लाई-डिटेक्शन टेस्ट कराने का विकल्प भी खुला है.”

आगे की कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, अगर लाई-डिटेक्शन टेस्ट की अनुमति मिलती है तो संदिग्धों को इसके लिए अदालत की मंजूरी लेनी होगी. अदालत की इजाजत मिलने के बाद ही यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी. फिलहाल, जांच एजेंसी गवाहों और आरोपियों के बयान का मिलान कर रही है.

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