प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे. यहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ की विशेष पूजा की. इस दौरान पीएम मोदी जब मंदिर परिसर में दाखिल हुए तब पूरे मंदिर में वेदमंत्र गूंज रहे थे. कई पुजारी पंक्ति में खड़े होकर डमरू वादन कर रहे थे और उन्होंने शंखनाद करके पीएम मोदी का स्वागत किया. पीएम मोदी ने हाथ जोड़कर मंदिर के मुख्य द्वार से परिसर में प्रवेश किया. इसके बाद वह गर्भगृह पहुंचे और भगवान विश्वनाथ की विशेष पूजा की.
उन्होंने विधान के अनुसार बाबा विश्वनाथ को पाद्य, नैवेद्य, अभिषेक, पुष्पमाला आदि अर्पण किया और इसके बाद आरती भी की. पीएम मोदी ने मंत्रोच्चार के साथ षोडषोपचार पूजा की. जिसमें 16 विधान शामिल होते हैं.
सनातन परंपरा में षोडशोपचार पूजा का खास महत्व है. इसे देवताओं की उपासना का सबसे पूर्ण और व्यवस्थित रूप माना जाता है. ‘षोडश’ का अर्थ है सोलह और ‘उपचार’ का अर्थ है सेवा या विधि. यानी, यह ऐसी पूजा है जिसमें भगवान को सोलह प्रकार से आदर, सेवा और श्रद्धा अर्पित की जाती है.
यह पूजन विधि केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जिसमें भक्त अपने आराध्य को अतिथि मानकर उनकी हर प्रकार से सेवा करता है—जैसे उन्हें बुलाना, आसन देना, स्नान कराना, वस्त्र पहनाना, भोजन अर्पित करना और अंत में आरती कर विदा करना.
षोडशोपचार पूजा की 16 विधियां
षोडशोपचार पूजा में कुल सोलह चरण होते हैं, जो क्रमबद्ध तरीके से किए जाते हैं:
1. आवाहन: सबसे पहले भगवान का आह्वान किया जाता है. भक्त उन्हें अपने पूजा स्थल पर विराजमान होने का निमंत्रण देता है.
2. आसन: देवता को बैठने के लिए आसन अर्पित किया जाता है, जिससे वे सम्मानपूर्वक विराजमान हो सकें.
3. पाद्य: भगवान के चरणों को धोने के लिए जल अर्पित किया जाता है. यह श्रद्धा और विनम्रता का प्रतीक है.
4. अर्घ्य: हाथ धोने के लिए जल समर्पित किया जाता है, जो आदर का संकेत है.
5. आचमन: देवता को पीने के लिए जल दिया जाता है.
6. स्नान: मूर्ति को जल, दूध, दही, घी आदि से स्नान कराया जाता है. इसे ‘अभिषेक’ भी कहा जाता है.
7. वस्त्र: भगवान को नए वस्त्र अर्पित किए जाते हैं, जो शुद्धता और सम्मान का प्रतीक है.
8. यज्ञोपवीत (जनेऊ): देवता को जनेऊ धारण कराया जाता है, जो धार्मिक मर्यादा का संकेत है.
9. गंध (चंदन): चंदन या रोली का तिलक लगाया जाता है, जिससे शीतलता और पवित्रता का भाव प्रकट होता है.
10. पुष्प: सुगंधित फूल अर्पित किए जाते हैं, जो भक्ति और प्रेम का प्रतीक हैं.
11. धूप: अगरबत्ती या धूप जलाकर वातावरण को सुगंधित और पवित्र किया जाता है.
12. दीप: दीपक जलाकर भगवान के समक्ष प्रकाश अर्पित किया जाता है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर करने का प्रतीक है.
13. नैवेद्य: भगवान को भोजन या मिठाई का भोग लगाया जाता है.
14. ताम्बूल: पान अर्पित किया जाता है, जो आतिथ्य का एक पारंपरिक रूप है.
15. दक्षिणा/आरती: भगवान को दक्षिणा अर्पित कर आरती की जाती है, जिससे पूजा पूर्ण होती है.
16. प्रदक्षिणा और मंत्रपुष्पांजलि: अंत में देवता की परिक्रमा की जाती है और पुष्प अर्पित कर प्रार्थना की जाती है.
षोडशोपचार पूजा का आध्यात्मिक महत्व
षोडशोपचार पूजा केवल विधियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह भक्त और भगवान के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है. इसमें हर चरण एक भावना को सामने रखता है. आमंत्रण, सेवा, समर्पण और कृतज्ञता. यह पूजा विशेष रूप से बड़े अनुष्ठानों, व्रत, त्योहारों और मंदिरों में की जाती है. इससे मन में एकाग्रता आती है और व्यक्ति अपने भीतर शांति और संतोष का अनुभव करता है.
इस पूजा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अंत में क्षमा प्रार्थना की जाती है. “ॐ मंत्रहीनं क्रियाहीनं…” जैसे मंत्रों के माध्यम से भक्त भगवान से अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा मांगता है. यह विनम्रता और आत्मस्वीकृति का भाव दर्शाता है.
षोडशोपचार पूजा सनातन परंपरा में भक्ति की पराकाष्ठा मानी जाती है. यह केवल पूजा नहीं, बल्कि एक ऐसा आध्यात्मिक अनुशासन है जो व्यक्ति को ईश्वर के और करीब लाता है. इसमें विधि के साथ-साथ भावना का भी उतना ही महत्व है. जब ये दोनों मिलते हैं, तभी पूजा सच्चे अर्थों में सफल और सार्थक होती है.
विकास पोरवाल