वेस्ट एशिया में बीते एक महीने से जंग छिड़ी हुई है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के तमाम हथियारों, फाइटर प्लेन, मिसाइलों के नाम हम सुन चुके हैं. तबाह हुए तमाम शहरों के इतिहास-भूगोल पर भी बात कर ली गई है. किचन से लेकर बाजार पर क्या असर हुआ ये सब सुर्खियों में रह चुका है. लेकिन अब जंग शहरों से समंदर की शिफ्ट हो रही है.
इस नए मोर्चे का नाम है होर्मुज. होर्मुज जलडमरूमध्य जो कि समंदर से शिपिंग और ट्रेड की आवाजाही का एक रास्ता है और इस रास्ते पर ईरान 'टोल' वसूलने की बात कर रहा है. ईरान के इसी फैसले से जंग शहर से समुद्री तट तक आई है. लेकिन इस बीच सवाल आता है क्या है होर्मुज? ये नाम कहां से आया?
11वीं सदी से जुड़ा है इतिहास
होर्मुज शब्द के बारे में जानना है तो इतिहास का सिरा थामे हुए 11वीं सदी में चलना होगा. क्योंकि इसका सीधा संबंध प्राचीन फारसी शब्द 'होर्मोज' (Hormoz) से है. इसी समुद्र तट पर 11वीं सदी से 17वीं सदी तक एक धनी-समृद्ध साम्राज्य का कंट्रोल था. यहां ‘हॉर्मुज़’ नाम का एक समृद्ध बंदरगाह शहर हुआ करता था.
यह आज के ईरान के दक्षिणी तट पर मौजूद था और बाद में सुरक्षा और समुद्री तूफानों से बचने के लिए पास के एक द्वीप पर चला गया. इस व्यापारिक शहर का जुड़ाव भारत, फारस और अरब के साथ बहुत गहरा था और दुनिया भर के व्यापारी यहां व्यापार के सिलसिले में पहुंचते थे. 13वीं से 16वीं सदी के बीच यह क्षेत्र के सबसे समृद्ध व्यापारिक केंद्रों में से एक बन गया था.
धीरे-धीरे इस जलमार्ग का नाम इसी शहर के नाम पर पड़ गया. यानी शहर तो यहां से चला गया लेकिन अपना नाम इस समुद्री रास्ते को दे गया. इसी वजह से इस जलमार्ग को धीरे-धीरे होर्मुज की खाड़ी के नाम से जाना जाने लगा. हालांकि कुछ इतिहासकार ये भी मानते हैं कि, होर्मुज नाम फारसी शब्द 'हुर मोघ' से निकला हुआ हो सकता है. इसका अर्थ है खजूर. इस इलाके में खजूर के पेड़ आम थे. यहां के कबीले ऐतिहासिक रूप से इसी नाम से इसे पहचानते थे.
जोरास्ट्रियन धर्म के देवता अहुरा मज्दा से होर्मुज का कनेक्शन
लेकिन होर्मुज शब्द अपने साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत भी लेकर चलता रहा है. इसका धार्मिक इतिहास सीधे-सीधे जोरास्ट्रियन धर्म के देवता अहुरा मज्दा से जुड़ता है. अधिकांश इतिहासकार ‘हॉर्मुज़’ नाम को मध्य फारसी शब्द ‘हॉर्मोज़’ या ‘अहुरा मज़्दा’ से जोड़ते हैं, जो ज़रथुष्ट्र धर्म के सर्वोच्च देवता थे. ‘अहुरा मज़्दा’ को प्राचीन फारसी आस्था में ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक माना जाता था.
समय के साथ इस नाम में भाषाई बदलाव हुए. ‘हॉर्मोज़’ यूरोपीय अभिलेखों में ‘ऑर्मस’ बन गया. 16वीं सदी में जब पुर्तगाली व्यापारियों ने कुछ समय के लिए इस द्वीप पर नियंत्रण किया, तो उन्होंने इसे इसी नाम से दर्ज किया. समय के साथ यह नाम बदलते-बदलते “होर्मुज” बन गया. इतिहास में झांके तो पहले पर्शिया के लोग इस समुद्री रास्ते को पवित्र मानते थे और इसे अहुरा मज्दा की सड़क कहते थे.
आज हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. इसकी भौगोलिक स्थिति इसे दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक बनाती है. हॉर्मुज का इतिहास सिर्फ व्यापारिक समुद्री रास्ते का नहीं है.
यह अपने साथ आस्था, ट्रेड, और नक्शे की रेखाओं को साथ लेकर चलता है. नक्शे में दिखाई देने वाला और धरती पर मौजूद एक प्राकृतिक समुद्री गलियारा जिसे ईरान अक्सर अपनी रणनीति में साथ लेकर चलता है. होर्मुज के नाम और इसके इतिहास की यही कहानी है.
विकास पोरवाल