खीरे की खेती से बदली किसान की किस्मत, साल में 14 से 15 लाख रुपये तक का मुनाफा

Farmer Success Story: राजस्थान के नागौर के रहने वाले रामनिवास पॉलीहाउस तकनीक से खेती करते हैं. वह 90 प्रतिशत तक की फसल खीरे की लगाते हैं. ज्यादातर मुनाफा बाजार में चल रहे भाव पर निर्भर रहता है. साल भर में वह दो बार इस फसल की खेती करते हैं. इससे वह तकरीबन 14 लाख रुपये का मुनाफा कमा लेते हैं.

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सचिन धर दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 08 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 4:10 PM IST

खेती-किसानी को लेकर लगातार किसान जागरूक हो रहे हैं. पारंपरिक तरीके से खेती करने वाले किसान अब कुछ नई तकनीकों का उपयोग करके फसलों से बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं. राजस्थान के नागौर जिले के गोगौर गांव के रहने वाले किसान रामनिवास चौधरी पॉलीहाउस और शेडनेट हाउस में खीरे और मिर्च की खेती से बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं. 

एक सीजन में 400 कुंतल की उपज

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रामनिवास बताते हैं पॉलीहाउस में वह 90 प्रतिशत तक की फसल खीरे की लगाते हैं. ज्यादातर मुनाफा बाजार में चल रहे भाव पर निर्भर रहता है. खीरे को लगाने के लिए उनको एक एकड़ में 70 हजार रुपये के बीज लगते हैं. जुताई से लेकर कटाई तक की लागत मिलाकर इसमें 2 से 3 लाख रुपये की लागत आती है. इसकी एक सीजन की फसल 4 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है. एक एकड़ में 400 कुंतल तक उपज हासिल हो जाता है. इससे वह तकरीबन 7 से 8 लाख रुपये तक का मुनाफा हासिल कर पाते हैं.

एक साल में 14 लाख तक का मुनाफा

रामनिवास के मुताबिक, मई-जून में खीरा 45 रुपये किलो तक बिक रहा था, तब उन्हें मुनाफा ज्यादा मिल रहा था. अब वह यही खीरा 15 से 20 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, थोड़ा नुकसान हो रहा है. हालांकि, साल भर में वह दो बार खीरे की खेती करते हैं. साथ ही मिर्च की भी खेती कर लेते हैं. इससे वह साल भर में तकरीबन 14 लाख रुपये का मुनाफा उन्हें हासिल हो जाता है.

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जैविक तरीके से करते हैं खेती

रामनिवास बताते हैं कि खीरे की खेती में ज्यादा मेहनत नहीं है. तीन से चार महीने में ये फसल आपको उत्पादन दे देता है. उन्हें इसकी फसल की बुवाई के लिए मजदूर नहीं लगाने होते हैं. जिससे मजदूरों पर होने वाले खर्च से उन्हें छुटकारा मिला हुआ है. साथ ही रासायनिक खाद की जगह पूरी तरह से जैविक खाद का ही उपयोग करते हैं. इससे भी खेती-किसानी में उनके खर्च में ज्यादा वृद्धि नहीं होती है.

सरकार को किसानों की मदद करनी चाहिए

रामनिवास एक बात पर जोर देते हुए कहते हैं कि अगर सरकार मदद करे तो किसान बहुत अच्छा मुनाफा कमा सकता है. नई-नई तकनीकें आ गई हैं, इसका उपयोग कर किसान अपनी उपज बढ़ा सकता है. हालांकि, ये तकनीकें बहुत महंगी हैं. कमजोर आय वर्ग के किसान इसका लाभ नहीं ले पाते हैं. दरअसल, एक पॉलीहाउस और शेडनेट हाउस स्थापित करने में 20 लाख लागत आती है. सरकार हर जिले का टार्गेट तय कर देती है. नागौर जिले में अगर 25 किसानों को सब्सिडी देने का टार्गेट रखा गया है तो उतने ही किसानों को शेडनेट या पॉलीहाउस लगाने की सब्सिडी दी जाएगी. बाकि किसानों को इससे वंचित रखा जाता है.

खुद 20 लाख रुपये लगाना पड़ा

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रामनिवास के मुताबिक, उन्होंने आज से 5 साल पहले खुद 20 लाख रुपये लगाकर शेडनेट हाउस की स्थापना की थी. उस समय उन्हें बहुत मुश्किलें आई है. आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. अगर मुझे सब्सिडी मिल जाती तो शेडनेट लगाने में मेरी लागत आधी हो जाती, साथ ही मुनाफा भी बढ़ जाता है.

 

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