साहित्य में दिलचस्पी, पत्रिकाओं में छपते हैं लेख... ट्रेडिशनल खेती से मुनाफा कमा रही ये महिला किसान

ऊषा सिंह बेहद ट्रेडिशनल तरीके से खेती करती हैं. वह सिर्फ गेहूं, सरसों और गन्ना की खेती से ही अच्छा मुनाफा कमा रही हैं. इसके साथ ही उनका साहित्य की तरह बेहद रुझान है. खाली वक्त में वो लेखन भी करती हैं, उनके लेख कल्याण, कादम्बिनी जैसी मैंगजीन में छपते हैं.

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Woman Farmer Usha Devi Woman Farmer Usha Devi

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 12:29 PM IST

एक वक्त था खेती-किसानी को पुरुषों का काम माना जाता था. हालांकि, बदलते दौर में बड़ी संख्या में महिलाओं ने इस खेती-किसानी की तरफ रुख किया है. इनमें से कई महिलाएं ऐसी हैं जो बंपर मुनाफा भी कमा रही हैं. ऐसी ही एक किसान हैं उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बंदी गांव की रहने वाली ऊषा सिंह. महिला किसान दिवस के मौके हम ऊषा देवी के सफलता की कहानी का जिक्र कर रहे हैं.

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गेहूं, सरसों और गन्ना की खेती से ही बढ़िया मुनाफा कमा रहीं ऊषा

किसान तक के मुताबिक गांव में शादी होने के बाद ऊषा खेती में अपने पति का हाथ बंटाया लेकिन धीरे-धीरे वो इस खेती में इतनी निपुण हो गईं कि आस-पास के लोग भी उनसे खेती से जुड़ी सलाह मांगने आते थे. ऊषा सिंह बेहद ट्रेडिशनल तरीके से खेती करती हैं. वह सिर्फ गेहूं, सरसों और गन्ना की खेती से ही अच्छा मुनाफा कमा रही हैं.

खेती के साथ-साथ पठन-पाठन में भी दिलचस्पी

खेती-किसानी के साथ-साथ ऊषा का साहित्य की तरह बेहद रुझान था. उन्होंने मुंशी प्रेमचंद लगभग हर कहानी और उपन्यास को पढ़ा है. गोदान, पूस की रात, दो बैलों की कथा जैसी कहानी उनकी फेवरेट हैं. मुंशी प्रेमचंद के अलावा वो शरतचंद, महादेवी वर्मा समेत बाकी साहित्यकारों की रचनाएं भी पढ़ती हैं. इतना ही नहीं उन्हें इंडिया टुडे की साहित्य वार्षिकी भी पढ़ने का शौक है. इसके अलावा उन्हें संगीत में भी खास दिलचस्पी है. अक्सर वह मोबाइल पर गाने सुनते हुए फसल की बुवाई करती हुई दिखती है.

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मैंगजीन में छपते हैं लेख

सिर्फ किताबें या उपन्यास पढ़ना ही नहीं बल्कि खाली वक्त में वो लेखन भी करती हैं. उनके लेख कल्याण, कादम्बिनी जैसी मैंगजीन में छपते हैं, इसके अलावा वो बाल कहानी, संस्मरण, कविताएं भी लिखती हैं. ऊषा सिंह को हिंदी भाषा की अच्छी जानकारी है. बेहद संवेदशील व्यक्तित्व वाली ऊषा रानी गांव में रहने वाली दूसरी महिला किसानों को सशक्तीकरण के लिए प्रेरित करती हैं और जरूरत पड़ने पर उनकी हर तरह से मदद भी करती हैं.  खेती किसानी से जुड़े रहने के अलावा उन्होंने गाय-भैसों का पालन भी किया जिससे उनका लगाव जानवरों से भी है. 

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