मानसून के बीच महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति है.राज्य के तकरीबन 12 जिलों में 50 प्रतिशत से कम तो 15 जिलों में 70 प्रतिशत से कम बारिश हुई है. तकरीबन 2 हजार से ज्यादा गांव मानसून में पीने के पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हैं. स्थिति चिंताजनक हो चुकी है. बारिश की कमी की समस्या को समझने के लिए आजतक ने मराठावाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र से स्थिति का जायजा लिया.
बर्बाद होने के कगार पर खरीफ की फसलें
पिंपलगांव चिटे गांव चौधरी संभाजीनगर से तकरीबन 25 किलोमीटर दूर है. यहां के रहने वाले चरणसिह नांगलोट के पास करीब 7 एकड़ जमीन है उन्होंने इस साल अपने खेतों में कपास, सोयाबीन और बाजरा की बुवाई की थी. वह अच्छी बारिश की उम्मीद में थे. अगस्त का महीना बीत गया. अब सितंबर का महीना चल रहा है, लेकिन बारिश नहीं हुई. अब फसल मरने के कगार पर है. बीमा कंपने में घाटे की भुगतान के लिए क्लेम किया था, लेकिन उधर से भी अभी कुछ नहीं मिला. अब आखिरी उम्मीद है कि सरकार आधिकारिक तौर पर सूखे की घोषणा कर दे.
जल भंडारण में भी आई कमी
चरणसिंह अकेले नहीं हैं. मराठावाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र में कई किसान हैं जिनकी फसल बारिश नहीं होने के चलते बर्बाद होने की कगार पर है. कृषि विभाग के मुताबिक पिछले साल की तुलना में महाराष्ट्र के बांधों में सिर्फ 50 फीसदी जल भंडारण है. यह पूरे साल के लिए पर्याप्त नहीं है. कम जल भंडारण का असर रबी और अन्य नकदी फसलों पर पड़ सकता है.
उजानी महाराष्ट्र के सबसे बड़े बांधों में से एक है. इसकी भंडारण क्षमता लगभग 112 टीएमसी है. इस बांध में अभी सिर्फ 20 प्रतिशत जल भंडारण है. 40 से अधिक चीनी मिलें उजानी के पानी पर निर्भर हैं. इस क्षेत्र में गन्ना किसानों की प्रमुख फसल है. सिंचाई की कमी के चलते इसके उत्पादन पर असर पड़ेगा.
सरकार ने अधिकारियों को सतर्क रहने का दिया निर्देश
औरंगाबाद क्षेत्र के बांधों में मात्र 31.65 फीसदी जल भंडारण है. नासिक क्षेत्र में लगभग 57 प्रतिशत जल भण्डार है. पुणे क्षेत्र में 68 फीसदी पानी का भंडार है. कैबिनेट ने भी स्थिति का जायजा लिया है. जिलाधिकारियों और कृषि अधिकारियों को जरूरतमंद किसानों की मदद के लिए तैयार रहने को कहा.
अभिजीत करंडे