मॉनसून की ये बारिश कई राज्यों के लिए तबाही लाई. खेती-किसानी पर भी इसका असर पड़ा. खेतों में कुछ दिनों पहले रोपी गई धान की फसलें भी बाढ़ में बर्बाद हो गई. हरियाणा के कुरुक्षेत्र में भी धान की रोपाई को भारी नुकसान हुआ. सरकार दावा कर रही है कि धान की फसलें दोबारा लगाई जा सकती है. हालांकि, किसानों का कहना है कि सरकार के ये दावे खोखले हैं.
खेतों में अभी भी लगा हुआ है पानी
कुरुक्षेत्र के किसानों का कहना है कि अभी भी खेतों में 3 से 4 फीट पानी खड़ा है. पानी निकलने के बाद दोबारा खेत तैयार करने में कम से कम 15 से 20 दिन लगेंगे. उसके बाद पौध तैयार करने में महीना लगेगा. कुल मिलाकर ये बात सामने आती है किसानों को अभी भी तकरीबन डेढ़ महीने धान लगाने में लग जाएंगे.
धान की देरी से बुवाई के चलते रबी फसलों को होगा नुकसान
ऐसे में अगर किसान धान लगाता भी है तो उसे प्रति एकड़ 15 से 20 हजार रुपए खर्च करना पड़ेगा. देरी से धान की बुवाई की है तो उसके पकने में भी वक्त लगेगा. फिर रबी फसलों की बुवाई में भी देरी होगी. इसका नुकसान रबी फसलों की उपज पर पड़ेगा.
सरकार से मुआवजे की मांग
किसानों के मुताबिक उनके लिए बेहतर यही है कि वो इस सीजन खेत को खाली ही छोड़ दें. सरकार उन्हें अगले 6 महीने तक अपना परिवार चलाने के लिए और फसल लगाने के लिए मुआवजा दे ताकि उनके सामने जीवनयापन के लिए संकट नहीं खड़ा हो.
उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश से फसलों को नुकसान
बता दें जुलाई के शुरुआती हफ्तों में खूब जोरदार बारिश दर्ज की गई. हिमाचल, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में भी बारिश से किसानों की फसलों को काफी नुकसान दर्ज किया गया है.
चंद्र प्रकाश