देश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से बढ़ी किसानों की टेंशन, इन फसलों को हुआ भारी नुकसान

देश में बेमौसम बारिश से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है, जिसकी वजह से किसान काफी परेशान हैं. वहीं, राज्य सरकारों ने क्षतिग्रस्त फसलों का मुआवजा देने की बात कही है. आइए जानते हैं किन फसलों को बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान हुआ है.

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Crop destroyed due to rainfall and hailstorm Crop destroyed due to rainfall and hailstorm

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 2:38 PM IST

देश के कई राज्यों में हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है. उत्तर भारत में बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है. गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंग, आम, नींबू, प्याज, कपास, मिर्च, केला, हल्दी और सब्जियों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है. देश के कई हिस्सों में आंधी और तूफान से आम के बोर झड़ गए हैं. जिससे इस साल आम की पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है. 

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सीहोर (मध्य प्रदेश)
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के जावर और डोडी गांव में जमकर ओलावृष्टि हुई. सड़कों पर ओले की सफेद चादर बिछ गई. तेज बारिश और ओले गिरने की वजह से सीहोर में प्याज, मूंग, आम और नीबू की फसलों को काफी नुकसान हुआ है. 

संभाजी नगर (महाराष्ट्र)
महाराष्ट्र के संभाजी नगर के सिल्लोड तालुका में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों का जायजा लेने के लिए मंत्री अब्दुल सत्तार रविवार को किसानों से मिलने पहुंचे और भरोसा दिलाया कि सरकार उनके नुकसान की भरपाई जरूर करेगी. सिल्लोड में मक्का, बाजरा, ज्वार, प्याज, कपास, मिर्च और आम की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है.

नांदेड (महाराष्ट्र)
महाराष्ट्र के नांदेड के नीमगांव, खैरगांव, कारवाड़ी, पारडी आदि गांवों में तूफान और बारिश के कारण केला, आम, चीकू, हल्दी और ज्वार की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है. किसानों का कहना है कि लगातार बारिश की वजह से हल्दी में फफूंद लग गई है. वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज्य भर में बेमौसम बारिश का पंचनामा करने के आदेश दिए हैं. 

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हरियाणा
हरियाणा में भी बेमौसम बारिश ने काफी तबाही मचाई है. खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को 20 से 25 प्रतिशत नुकसान पहुंचा है. वहीं, सोनीपत की अनाज मंडी में खुले में रखे गेहूं भी बारिश की वजह से खराब हो गए हैं, जिसकी वजह से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है. अनाज मंडी के चेयरमैन का कहना है कि वे लगातार प्रयास कर रहे हैं कि कम से कम नुकसान हो. 

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