Lumpy Virus: हरियाणा में इस वायरस की हुई एंट्री, गायों पर टूट रहा कहर, दहशत में लोग

Lumpy Virus: हरियाणा के भी कई जिलों में लंपी वायरस से गायें बीमार हो रही है. यमुनानगर जिले में सबसे ज्यादा गायें इससे प्रभावित हैं. इस बीमारी के संक्रमण के साथ-साथ पशुपालकों की चिंताएं भी लगातार बढ़ रही है. लंपी की दहशत में कुछ पशुपालक अपने पशुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने के लिए परेशान हो रहे हैं.

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Lumpy Virus enters in Haryana Lumpy Virus enters in Haryana

आशीष शर्मा

  • यमुनानगर,
  • 08 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 4:04 PM IST

Lumpy Virus Disease: राजस्थान में अब भी लंपी वायरस का कहर जारी है. इस वायरस से मरने वाली गायों को दफनाने के लिए जमीनें कम पड़ने लगी हैं. पंजाब के भी कई जिले में अब इस वायरस की एंट्री हो चुकी है.अब हरियाणा के यमुनानगर में इस वायरस से कई गायों के बीमार होने की खबर है.

यमुनानगर के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहरी इलाकों में भी गायें लंपी वायरस की शिकार हो रही हैं. ऐसे में पशुपालक दहशत में हैं. डर के मारे वे अपनी गायों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने की कोशिश कर रहे हैं.

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रोकथाम के लिए जारी हुए निर्देश

हरियाणा के पशु पालन मंत्री जेपी दलाल ने भी इस मामले में विभाग को सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश जारी कर दिए हैं. वहीं, पशुपालन विभाग के डायरेक्टर जनरल डॉक्टर बीएस लौरा ने यमुनानगर के विभिन्न इलाकों का दौरा कर जमीनी हकीकत जानी. डायरेक्टर जनरल डॉक्टर बीएस लौरा ने पशुपालकों और विभाग के डॉक्टरों से मुलाकात कर उन्हें जरूरी हिदायतें भी दी.

जिले में 4 से 5 हजार गायें इस वायरस से पीड़ित

 डॉक्टर बीएस लौरा के मुताबिक यमुनानगर जिला में 4 से 5 हजार गाय लंपी स्किन रोग से प्रभावित हुई हैं. 3 गायों की मौत भी हुई है. बीमारी को काबू करने के लिए विभाग द्वारा सभी कदम उठाए जा रहे हैं.  यमुनानगर में बड़ी संख्या में गायें इस रोग से प्रभावित हैं. यहां डॉक्टरों की विभिन्न टीमें तैनात की गई हैं. इसके अलावा प्रभावित गायों का इलाज भी किया जा रहा है.

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क्या कहते हैं पशुपालन विभाग के डायरेक्टर

बीएस लौरा ने कहते हैं कि यह रोग गाय और भैंसों से संबंधित है और इंसान में नहीं फैलता, इसलिए इससे दहशत में आने की जरूरत नहीं है. यह बीमारी हरियाणा के साथ लगते राजस्थान व पंजाब से आई हो सकती है. इसलिए हरियाणा के सभी उपायुक्त व पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि पशुओं को भारत सरकार के दिशानिर्देशों एवं गाइडलाइन के मुताबिक बॉर्डर क्रॉस होने से रोके. कोई भी पशु एक से दूसरे राज्य में ना जा पाए, इसकी व्यवस्था की जाए.

ना उठाएं ऐसे कदम

डॉक्टर बीएस लौरा ने इस रोग के लक्षणों के बारे में बात करते हुए कहा कि वायरस से पीड़ित गायों में दूध उत्पादन की क्षमता कम हो जाती है. चार-पांच दिन के बुखार के बाद बुखार कम होना शुरू हो जाता है. जिसके चलते धीरे-धीरे दूध भी बढ़ने लगता है. इसके अलावा उन्होंने किसानों को गायों के इलाज के लिए जल्दीबादी  प्राइवेट कंपनियों मार्केट में बेचे जा रहे इंजेक्शन को ना लगाने की सलाह दी है. इससे गायों के बीमार होने का खतरा और बढ़ जाता है.


 

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