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क्या है Blockchain टेक्नोलॉजी जिस वजह से आज Bitcoin इतना पॉपुलर है

What is Blockchain: Bitcoin क्रिप्टोकरेंसी है और फिलाहल ये काफी पॉपुलर है. इसे आम करेंसी के विकल्प के तौर पर भी देखा जा रहा है. लेकिन इस क्रिप्टोकरेंसी के पीछे की टेक्नोलॉजी Blockchain आखिर काम कैसे करती है. आज हम इसे समझेंगे.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin जिस टेक्नोलॉजी पर काम करता है उसे Blockchain कहा जाता है.
  • ब्लॉक चेन की वजह से ही Bitcoin सिक्योर और डीसेंट्रलाइज्ड है.

What is Blockchain: ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी काफी पुरानी है, लेकिन इसे 2009 में सतोशी नाकामोतो ने क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin के लिए यूज करने की थ्योरी दी. सतोशी नाकामोटो कौन हैं ये एक मिस्ट्री है. उन्होंने Blockchain पर आधारित डिजिटल करेंसी के बारे में पेपर पब्लिश किया. 

ब्लॉकचेन का यूज सिर्फ Bitcoin में ही नहीं, बल्कि कई और भी सेक्टर्स में हो सकता है और होता भी है. ये एक सिक्योर, सेफ और डीसेंट्रलाइज्ड टेक्नोलॉजी है जिसे हैक या टैंपर करना लगभग नामुमकिन है. 

Bitcoin के वैल्यू का आप अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 2010 में 1 Bitcoin की वैल्यू वैल्यू महज 0.06 अमेरिकी डॉलर (लगभग  2.85 रुपये) से भी कम थी, लेकिन अब 1 Bitcoin की वैल्यू 30 लाख के पार जा चुकी है. ये मुमकिन कैसे हुआ? जाहिर है ब्लॉकचेन की वजह से ये इतना सिक्योर और पॉपुलर है.. 

ज्यादा टेक्निकैलिटी में न जाते हुए हम आपको बोलचाल की भाषा में, कुछ उदाहरण के साथ Blockchain के बारे में समझाते हैं. अगर आपको पहले से ही Blockchain के बारे में पता है तो अच्छी बात है, लेकिन अगर आपने सिर्फ Blockchain के बारे में सुना है तो इसे समझने में ये आर्टिकल आपकी काफी मदद करेगा. 

क्या है ब्लॉकचेन, कैसे करता है ये काम और कितना सिक्योर है? 

जैसा की नाम है वैसा ही काम है. इसमें कई ब्लॉक्स होते हैं और ये एक दूसरे से जुड़े होते हैं-- ऐसे ये ब्लॉकचेन हो गया. हर एक ब्लॉक में डेटा, हैश और पिछले ब्लॉक का हैश होता है. अब आपको डेटा, हैश और पिछले ब्लॉक के हैश के बारे में बताते हैं.

Bitcoin ब्लॉकचेन में जो डेटा रहता है दरअसल उस डेटा में ट्रांजैक्शन की डीटेल्स होती हैं. सेंडर, रीसिवर और अकाउंट जैसी जानकारियां इसमें दर्ज रहती हैं. 

 

डेटा, हैश और पिछले ब्लॉक का हैश.. 

डेटा के बाद नंबर आता है हैश का. हैश को आप बायोमेट्रिक की तरह समझ सकते हैं जो हर किसी के लिए युनीक होता है. आपकी फेस आईडी किसी और से मैच नहीं कर सकती, इसी तरह ये हैश भी युनीक होता है. अगर ब्लॉक में कोई भी बदलाव हुआ तो ये हैश को बदल देता है.

सभी ब्लॉक्स एक दूसरे से वर्चुअली कनेक्टेड होते हैं. ये एक तरह से ऐसा सिस्टम है जिसमें छेड़ छाड़ की गुंजाइश नहीं है. क्योंकि अगर कोई चाहे भी तो ब्लॉकचेन की इनफॉर्मेशन बदल नहीं सकता है. 

पिछले ब्लॉक का हैश - एक ब्लॉक में पिछले ब्लॉक का भी हैश होता है और इसकी वजह से ही ब्लॉक्स का चेन बनता है. यानी ये एक दूसरे से जुड़े रहते हैं. 

अगर आप एक ब्लॉक का डेटा बदलेंगे, दो फिर आपको दूसरे ब्लॉक का भी डेटा बदलना होगा. अगर ऐसा नहीं किया तो ब्लॉक आपस में कनेक्टेड रह ही नहीं सकते. ये एक तरह से मुमकिन ही नहीं है कि आप दुनिया भर के सभी ब्लॉक से डेटा बदल दें. लेकिन हैकर्स कुछ भी कर सकते हैं.. 

प्रूफ ऑफ वर्क क्या है? 

हालांकि कंप्यूटर इतने पावरफुल हो गए हैं कि कैलकुलेशन करके हैश में भी बदलाव कर देते हैं. इसे रोकने के लिए ब्लॉक चेन में प्रूफ ऑफ वर्क भी होता है.  ये एक तरीका है जो नए नए ब्लॉक के बनने को स्लो करता है. इसमें लगभग 10 मिनट का समय  लगता है. 

प्रूफ ऑफ वर्क एक प्रोटोकॉल या तरीका है जो ट्रांजैक्शन को एक तरह से वेरिफाई करता है. Bitcoin माइनर्स काफी पावरफुल कंप्यूटर्स के साथ रहते हैं जो काफी जटील मैथेमैटिकल प्रॉब्लम सॉल्व करते हैं.

जो माइनर सबसे पहले उसे सोल्व करता है उसे बिट्क्वाइन के तौर पर उसे रिवॉर्ड मिलता है. इसमें 10 मिनट का समय लग सकता है. ये प्रॉब्लम दरअसल ब्लॉक में ट्रांजैक्शन को वैलिडेट करने के लिए किया जाता है. 

ब्लॉकचेन की अच्छी बात ये है कि ये सेंट्रलाइज्ड नहीं होता है. दुनिया भर के लाकों कंप्यूटर्स में डिस्ट्रिब्यूटेड होता है जिसे पियर टु पियर नेटवर्क कहा जाता है. 

यहां ट्रांजैक्शन की जानकारी सभी लोगों तक पहुंचती है... 

उदाहरण के तौर पर जैसे ही ब्लॉकचेन में एक नया ब्लॉक किसी ने जोड़ा तो इसकी जानकारी उन सभी लोगों को जाती है जो ब्लॉकचेन सिस्टम से कनेक्टेड हैं. हालांकि इन जानकारियों में ये किसी की पर्सनल डीटेल्स या लोकेशन कतई शेयर नहीं की जाती हैं. 

ब्लॉकचेन की वजह से Bitcoin ऐसी क्रिप्टोकरेंसी है जो पूरी तरह से डीसेंट्रलाइज्ड है और इसका कंट्रोल किसी एक के हाथ में नहीं है. जैसे हम UPI के जरिए ट्रांजैक्शन करते हैं तो इसका पूरा कंट्रोल बैंक के पास होता है. यहां तक की आपके पैसे के भी कंट्रोल बैंक और सरकार के पास होता है.

कंट्रोल एक के पास नहीं है...यानी खतरा कम है.. 

आपके पैसे को बैंक बाजार में निवेश करता है और पैसे कमाता है. अगर सरकार चाहे तो आपके हाथ में रखा 2000 का नोट इनवैलिड हो जाएगा. इन्हीं सब वजहों से ब्लॉकचेन बेस्ड Bitcoin का आईडिया सतोशी नाकामोतो ने पब्लिश किया था. 

Bitcoin में किए गए ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड किसी एक पास नहीं, बल्कि लाखों कंप्यूटर्स में जाता है और ये एन्क्रिप्टेड होता है. 

जैसे बैंक में उसके सभी कस्टमर्स का डेटा होता है. यानी किस शख्स के अकाउंट  कितना पैसा है. लेकिन Bitcoin की बात करे तो यहां ब्लॉकचेन में ऐसा नहीं है. यहां किसी एक के पास सभी की डीटेल्स नहीं है, बल्कि सभी के पास हर किसी की डीटेल्स है. 

उदाहरण के तौर पर आप चार दोस्त हैं और एक दूसरे को बिट्कवाइन में पैसे दे रहे हैं. अगर आपके पास 1 बिट क्वाइन बचा है तो ऐसे में ये जानकारी सभी ब्लॉकचेन कनेक्टेड यूजर्स के पास होगी. आप जैसे ही 2 बिट क्वाइन भेजने की कोशिश करेंगे ट्रांजैक्शन फेल हो जाएग. 

 

सभी के पास आपका बही खाता होने का ये मतलब नहीं है कि सभी को आपका नाम और पता मालूम है. क्योंकि आपकी पर्सनल डीटेल्स एन्क्रिप्टेड होती है और आपकी एक डिजिटल आईडेंटिटी तैयार होती है जो आपसे लिंक तो होती है, लेकिन इसमें छेड़ छाड़ करना अंसभव है. यानी किसी को ये नहीं पता होगा कि आप कौन हैं, आप कहां रहते हैं, आपके पास कितने पैसे हैं. 

Bitcoin ट्रांजैक्शन कैसे होता है? 

Bitcoin नेटवर्क के सभी यूजर्स के पास पब्लिक की और प्राइवेट की होता है. पब्लिक की एक अड्रेस है जो इस नेटवर्क के सभी यूजर्स को पता है यानी ये पब्लिक है. ये एक ईमेल अड्रेस की तरह ही होता है. 

प्राइवेट की सिर्फ आपको पता होगा और इसे आप पिन या पासवर्ड की तरह भी समझ सकते हैं. किसी को बिट क्वाइन ट्रांसफर करने के लिए पब्लिक की की जरूरत होती है. ठीक वैसे ही जैसे UPI से पैसे ट्रांसफर करने के लिए UPI आईडी की जरूरत होती है. 

 

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