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'Alien गिफ्ट' था Egypt के किंग तुत का खंजर! क्या है इस दावे की वजह?

मिस्र (Egypt) के राजा तुत (King Tut) का खंजर (Dagger) बाहरी दुनिया से आया था. इसे Aliens ने उन्हें तोहफे में दिया था. क्योंकि यह जिस धातु से बना है वह धरती पर नहीं मिलता. इसे लेकर वैज्ञानिकों में हो रही है बहस...

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King Tut Dagger is gift from Alien of Outer Space King Tut Dagger is gift from Alien of Outer Space
स्टोरी हाइलाइट्स
  • खंजर किसी उल्कापिंड की धातु से बना- स्टडी
  • दावे पर वैज्ञानिकों और पुरातत्वविदों में बहस

मिस्र के राजा तुत की कब्र के मिला सोने से बना खंजर किसी बाहरी दुनिया का तोहफा था. इसे किसी एलियन दुनिया से लाए गए धातु से बनाया गया था. ये दावा किया है इसे खोजने वाले पुरातत्वविदों ने. हालांकि, इस बात को लेकर वैज्ञानिकों और पुरातत्वविदों में बहस चल रही है कि ऐसा कैसे हो सकता है. क्योंकि इसमें सोने के अलावा कुछ ऐसे धातु भी मिले हैं, जो धरती पर नहीं पाए जाते. 

राजा तुत (King Tut) के खंजर (Dagger) को लेकर दो नई स्टडीज सामने आई हैं. इस रहस्यमयी हथियार को लेकर चर्चा ये है कि इसे किसी प्राचीन फैरोह ने बनाया था. जिसमें उसने बाहरी दुनिया (Outer Space) से आए किसी धातु का उपयोग किया था. पहली स्टडी कहती है कि यह उल्कापिंडों से मिले धातु से बनाया गया था. जिसे उस समय अनातोलिया (Anatolia) यानी आज के तुर्की (Turkey) से खोजा गया था. वहीं, दूसरी स्टोरी कहती है कि यह इसकी उत्पत्ति और निर्माण आज भी रहस्य है. 

मिस्र के राजा तूतनखामुन के पास जो खंजर था, उसे लेकर दुनिया भर के पुरातत्वविदों में बहस. (फोटोः गेटी)
मिस्र के राजा तूतनखामुन के पास जो खंजर था, उसे लेकर दुनिया भर के पुरातत्वविदों में बहस. (फोटोः गेटी)

राजा तुत यानी तुतनखामुन (King Tutankhamun) 1333 ईसा पूर्व से 1323 ईसापूर्व तक मिस्र का राजा था. उस समय लोहे को पिघलाकर किसी भी प्रकार का हथियार या यंत्र बनाने की कला खोजी नहीं गई थी. यानी यह जिस धातु से बना है वह बेहद दुर्लभ और उस समय के हिसाब से बेशकीमती था. क्योंकि यह किसी उल्कापिंड से मिली धातु से बनाया गया था. 

11 फरवरी 2022 को मिटियोराइट्स एंड प्लैनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक शोधकर्ताओं को पता चला कि यह सोने का खंजर जिस धातु से बनाया गया था, उसे जोड़ने के लिए लाइम प्लास्टर (Lime Plaster) का उपयोग किया गया था. लाइम प्लास्टर उस समय अनातोलिया में उपयोग किया जाता था. क्योंकि मिस्र में उस समय लाइम प्लास्टर का उपयोग इतने बड़े पैमाने पर नहीं होता था.

मिस्र के अमारना (Amarna) से मिले ऐतिहासिक सबूतों, वस्तुओं और दस्तावेजों के मुताबिक अनातोलिया के मितान्नी (Mitanni) के राजा तुशरत्ता (Tushratta) ने तुतनखामुन के दादा यानी अमेनहोतेप 3 (Amenhotep) को लोहे का एक खंजर तोहफे में दिया था. अमेनहोतेप ने मिस्र पर 1390 ईसापूर्व से 1353 ईसापूर्व तक शासन किया था. शोधकर्ताओं को यह भी पता चला कि इस खंजर की लोहे की धार वाला हिस्सा कम तापमान यानी करीब 950 डिग्री सेल्सियस में गढ़ा गया था. 

इस खंजर में ट्रोइलाइट (Troilite) नाम का खनिज मिला है, जो कि लोहेऔर निकल के क्रिस्टल्स की वजह से बनता है. इसे विडमैन्स्टेटन पैटर्न (widmanstätten patterns) कहते हैं. वहीं दूसरी स्टडी, जो अमेरिकन यूनिवर्सिटी इन कायरो प्रेस द्वारा प्रकाशित किताब आयरन फ्रॉम तुतनखामुन टोंब (Iron from Tutankhamun's Tomb) में प्रकाशित हुई थी. इसमें बताया गया था कि फिलहाल यह बता पाना मुश्किल है कि तुतनखामुन के खंजर के धातुओं की उत्पत्ति कहां से हुई थी. किस तरह के लोगों ने इसे बनाया या फिर किस तरह के धातुओं का इसमें उपयोग हुआ है. 

इस किताब में लिखा है कि शोधकर्ताओं के इस खंजर में पथरीले क्रिस्टल्स मिले हैं. जो उस समय एजियन इलाके (Aegean Area) में उपयोग किए जाते थे. लेकिन कहीं से भी यह पता नहीं चल पा रहा है कि यह असल में किस धातु से बना था. क्योंकि इसमें सोना भी है. लोहा भी है. निकल भी है. पथरीले क्रिस्टल्स भी है. ट्रोइलाइट भी है. यह स्टोरी Livescience में प्रकाशित हुई है. 

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