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बंगाल BJP के अंदर 'खेला होबे'? TMC से आए नेताओं में भगदड़ की स्थिति, संगठन में हो सकते हैं बड़े बदलाव

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले, टीएमसी से बीजेपी में आए ज्यादातर नेता चुनाव हार गए हैं. सूत्रों की मानें तो उन्हें डर सता रहा है कि बिना विधायक रहे ममता बनर्जी के खिलाफ राजनीति करना मुश्किल है.

बंगाल भाजपा के नेता शुभेंदु अधिकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की मुलाकात बंगाल भाजपा के नेता शुभेंदु अधिकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की मुलाकात
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शुभेंदु समेत बंगाल BJP के नेता केंद्रीय नेतृत्व से मिले
  • मुकुल रॉय को लेकर पार्टी में अलग-अलग विचार
  • TMC से आए नेताओं के वापस TMC में जाने की अटकलें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश बीजेपी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, इस बात की भनक बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को भी है. यही कारण है कि पिछले दो दिनों से दिल्ली में पश्चिम बंगाल और वहां पार्टी के हालात पर गहन मंथन का दौर जारी है. 

जिस तरह से चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी के कुछ कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है, उसके बाद से बीजेपी नेताओं ने ममता बनर्जी पर हल्ला बोल रखा है, लेकिन उससे भी बड़ी चुनौती बीजेपी नेतृत्व के सामने पार्टी को राज्य में एकजुट रखने और कैडर का मनोबल बनाए रखने की है. खासकर ऐसे माहौल में जबकि टीएमसी छोड़कर चुनावों से पहले बीजेपी में आए कुछ नेताओं की घर वापसी को लेकर अटकलों का दौर जारी है. 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी से बीजेपी में आए ज़्यादातर नेता चुनाव हार गए हैं. सूत्रों की मानें तो उन्हें डर सता रहा है कि बिना विधायक रहे ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ राजनीति करना मुश्किल है.

इसी बीच टीएमसी से आए कुछ नेताओ ने प्रदेश संगठन और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है. दरअसल, ये दिक्कत साल 2018 के बाद से ही टीएमसी से बीजेपी में आए नेताओं की है. बंगाल में बीजेपी की ज़मीन तैयार करने वाले मुकुल रॉय को उम्मीद थी कि चुनाव बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया जाएगा. लेकिन, पार्टी नेतृत्व ने इस पद के लिए नंदीग्राम में ममता बनर्जी को चुनावी मात देने वाले शुभेंदु अधिकारी पर दांव खेलना पसंद किया.

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मुकुल राय ने उसके बाद से ही पार्टी के कार्यक्रमों और प्रोग्राम से कन्नी काटना शुरू कर दिया. यहां तक कि वो पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्या के विरोध में किए गए किसी भी कार्यक्रम में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के साथ खड़े तक दिखाई नहीं दिए. इसी बीच खबर आई कि मुकुल रॉय ने टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष से विधानसभा में मुलाकात की है. 

मुकुल रॉय की पत्नी हॉस्पिटल में हैं और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने हॉस्पिटल जा कर उनके बेटे से मुलाक़ात की. साथ ही उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली. वैसे पीएम नरेंद्र मोदी भी मुकुल रॉय की पत्नी के स्वास्थ्य का हाल ले चुके हैं. इस घटना के बाद से टीएमसी से आए कई नेताओं ने पार्टी के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी शुरू कर दी. शुभेंदु अधिकारी ने दिल्ली आकर बंगाल की स्थिति की पूरी जानकारी पीएम मोदी, पार्टी अध्यक्ष नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह को दी है. 

सूत्रों की मानें तो शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी नेतृत्व के सामने प्रदेश संगठन में कई बड़े बदलाव के सुझाव दिए हैं. साथ ही राजीव बनर्जी, मुकुल रॉय और उनके करीबी नेताओं की पार्टी के ख़िलाफ़ गतिविधियों के बारे में जानकारी दी है. शुभेंदु आधिकारी ने आजतक से बात करते हुए कहा था, “पार्टी का अनुशासित सिपाही हूँ इसलिए जो कुछ कहना था मैंने पार्टी के फोरम पर कह दिया है." मुकुल रॉय पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पार्टी को जो 2 करोड़ 80 लाख वोट मिला है वो किसी व्यक्ति विशेष के कारण नहीं मिला है, वो पार्टी की विचारधारा और नेतृत्व के कारण मिला है इसलिए मैं मुकुल रॉय पर कुछ नहीं बोलूंगा. 

दूसरी तरफ़ टीएमसी से बीजेपी में आए राजीव बनर्जी ने ये बयान देकर प्रदेश बीजेपी में सियासी भूचाल ला दिया है कि बंगाल में ममता बनर्जी सरकार बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन की लगाने की मांग को लोग पसंद नहीं करेंगे.  

इस बीच बंगाल बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष और सांसद सौमित्रो खान ने राजीव बनर्जी पर पलटवार करते हुए कहा है कि अगर इस तरह रहना है तो वो टीएमसी में वापस चले जाएं. 

बंगाल बीजेपी में मची सियासी घमासान के बीच शुभेंदु अधिकारी के बाद सौमित्रो खान, अर्जुन सिंह समेत कई नेता दिल्ली आ गए हैं और पार्टी नेतृत्व से मुलाक़ात कर ज़मीनी हक़ीक़त से रूबरू कराना चाहते हैं. मतलब साफ़ है ये सभी चाहते हैं कि प्रदेश संगठन में बदलाव के साथ साथ मुकुल रॉय और उनसे जुड़े लोगों पर कार्रवाई हो. 

बीजेपी में घमासान के बाद टीएमसी नेताओं का बयान आया है कि बीजेपी के पैंतीस विधायक उनके सम्पर्क में हैं. अभिषेक बनर्जी की मुकुल रॉय के बेटे से मुलाक़ात और फिर मुकुल रॉय का पार्टी के कार्यक्रमों में ना आना बहुत कुछ कहता है. 

अब देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी हाईकमान मुकुल रॉय और बाग़ी नेताओ पर क्या फ़ैसला लेता है. हैरानी की बात है इस पूरी उठापटक में बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय कहीं नज़र नहीं आ रहे हैं. कैलाश विजयवर्गीय 2018 से हर हफ़्ते बंगाल दौरा किया करते थे, लेकिन विधानसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने बंगाल की तरफ़ झांका भी नहीं है. सूत्रों की मानें तों बंगाल में नए प्रदेश अध्यक्ष और नए प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति की जा सकती है क्योंकि पार्टी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का कार्यकाल भी खत्म हो चुका है और पार्टी में संगठनात्मक फेरबदल को लेकर चर्चाओं का दौर भी जारी है. 

पार्टी को इस बात भी अहसास है कि बंगाल में संगठन में समय रहते सब कुछ सामान्य नहीं हुआ तो इसका असर कई अन्य राज्यों पर भी पड़ सकता है. चूंकि अगले साल उत्तर प्रदेश समेत कई महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हैं. 

 

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