फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच की जुबानी जंग अब कानूनी दांवपेच में बदल गई है. बीएमसी के द्वारा बुधवार को कंगना के दफ्तर का अवैध हिस्सा गिरा दिया, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इस पूरे विवाद के बीच कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जहां कुछ लोग कंगना का समर्थन कर रहे हैं तो कई ने विरोध किया है. ऐसे ही कुछ बयानों पर एक नज़र डालिए...
जदयू नेता केसी त्यागी ने भी कंगना रनौत के खिलाफ हुई बीएमसी की कार्यवाही पर प्रतिक्रिया दी. केसी त्यागी बोले कि इसकी टाइमिंग ठीक नहीं है, ऐसा लगता है कि बदले की भावना से की गई है. अगर कंगना ने ड्रग पैडलर की बात की हैं तो जांच होनी चाहिए. हालांकि, केसी त्यागी ने कंगना द्वारा मुंबई की तुलना PoK से किए जाने पर अपनी असहमति जताई.
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग का कहना है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को तुरंत आदित्य ठाकरे का इस्तीफा लेना चाहिए और उनके खिलाफ जांच करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ये वो शिवसेना नहीं है, जो भाजपा के साथ थी.
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी कहा कि महाराष्ट्र सरकार का इस तरीके का रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि कंगना हिमाचल प्रदेश की बेटी हैं, जिन्होंने हिमाचल प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया है इसलिए उन्हें पूरी सुरक्षा दी जा रही है. सीएम ने कहा कि BMC द्वारा जो कार्रवाई कंगना के दफ्तर पर की गई है, वो पूरी तरह से गलत है और बदले की भावना से की गई है. जयराम ठाकुर बोले कि कंगना रनौत ने केवल अपनी आवाज बुलंद की और बदले की भावना से उन पर कार्रवाई की जा रही है.
दिल्ली बीजेपी के सांसद प्रवेश वर्मा ने भी इस मसले पर ट्वीट किया. उन्होंने कहा कि शायद इतिहास में किसी सरकार को इतनी बदहवास देखा होगा. अगर गिराना है तो दाऊद का घर गिराओ. उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे और संजय राउत से अपील करता हूं कि वो कंगना रनाउत से माफी मांगें.
जबकि महाराष्ट्र से बीजेपी नेता नीतीश राणे ने कहा कि क्या ये नियम हर किसी पर लागू होता है, अगर हां तो शाहरुख खान के मन्नत पर क्या BMC जाएगी? लेखक प्रसून जोशी ने ट्वीट कर कंगना रनौत के समर्थन का ऐलान किया.
Stay strong you have the inner strength to see you through the toughest of times
— Prasoon Joshi (@prasoonjoshi_)
बता दें कि कंगना रनौत के दफ्तर के बाहर बीएमसी ने मंगलवार को ही नोटिस लगा दिया था. बीएमसी की ओर से 24 घंटे का वक्त दिया गया था, लेकिन जवाब ना मिलने पर अब दफ्तर को ढहा दिया गया.