मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के किसान आंदोलन को लेकर ट्वीट के बाद से सियासी घमासान मचा है. सचिन तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के ट्वीट को लेकर एक ट्वीट किया था. सचिन के इस ट्वीट पर बवाल जारी है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने किसी अन्य विषय पर बोलते समय सतर्क रहने की नसीहत दे डाली.
सचिन तेंदुलकर पर विपक्षी दलों की ओर से किए जा रहे वार के बीच केंद्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता उनके पक्ष में खुलकर आ गए हैं. केंद्र सरकार के संसदीय कार्य मंत्री प्रह्वाद जोशी ने कांग्रेस पर नफरत की भाषा बोलने का आरोप लगाया है.
Members of have spoken in the only language they know - the language of hatred. Strongly condemn their spewing of venom on a Bharat Ratna who has upheld national pride on several of international occassions.
— Pralhad Joshi (@JoshiPralhad)
वहीं, महाराष्ट्र बीजेपी के नेता राम कदम ने ट्वीट कर कहा है कि भारत रत्न, देश के भूषण सचिन तेंदुलकर को इस तरह अपमानित किया जाना दुखद है. राम कदम ने अपने ट्वीट में आगे कहा है कि सचिन से बेहद प्यार करने वाले बाला साहब ठाकरे होते तो वे यह कभी नहीं सह सकते थे. वे अपने अंदाज में कड़ा जवाब देते. उन्होंने ट्वीट में शरद पवार पर भी निशाना साधा. बीजेपी नेता राम कदम ने कहा है कि देखना है कि शिवसेना और क्रिकेट में विशेष रुचि लेने वाले शरद पवार सचिन को अपमानित करने वालों का समर्थन करेंगे या विरोध?
भारतरत्न ,देशका भूषण सचिन तेंडूलकरजी का , इसतरह उन्हें अपमानित करना दुखद है, सचिनसे बेहद प्यार करनेवाले स्वर्गीय बालासाहेब होते , तो वे यह कभी नहीं सह सकते ,अपने अंदाज में कडा़ जवाब देते, देखना यह है की तथा क्रिकेटमें विशेष रुची लेनेवाले जी
— Ram Kadam - राम कदम (@ramkadam)
बीजेपी नेता आशीष शेलार ने भी इस मुद्दे पर शिवसेना और कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा है कि हम केरल में सचिन तेंदुलकर का अपमान करने वाली घटना की निंदा करते हैं. उन्होंने शिवसेना पर भी हमला बोला और सवाल खड़े किए. इससे पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रदेश की सत्ता पर काबिज महा विकास अघाडी को घेरते हुए कहा था कि क्या अघाडी के नेता सचिन का यह अपमान बर्दाश्त करेंगे?
बता दें कि शरद पवार ने सचिन तेंदुलकर को अपने क्षेत्र से अलग किसी अन्य विषय पर बोलते समय सतर्क रहने की नसीहत देते हुए कहा था कि किसान आंदोलन को लेकर इन्होंने जो राय रखी है, उससे जनता में नाराजगी है.