संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने के आरोप में ईरानी सुरक्षा अधिकारियों और उनसे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार को इसकी घोषणा की. यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब ईरान में इस्लामिक गणराज्य के इतिहास के सबसे बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ये प्रतिबंध राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर लगाए गए हैं. उन्होंने बयान में कहा कि अमेरिका स्वतंत्रता और न्याय की मांग कर रहे ईरानी लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है. ट्रेजरी के अनुसार, जिन अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई को अंजाम दिया और तेल से होने वाली अरबों डॉलर की कमाई को गुप्त तरीकों से इधर-उधर किया.
प्रदर्शनों के दमन के आरोप में ईरानी अधिकारियों पर अमेरिकी प्रतिबंध
प्रतिबंधों की सूची में ईरान की सुप्रीम काउंसिल फॉर नेशनल सिक्योरिटी के सचिव अली लारीजानी का नाम भी शामिल है. वॉशिंगटन का आरोप है कि लारीजानी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई का समन्वय किया और बल प्रयोग के निर्देश दिए. इसके अलावा ईरान की कानून प्रवर्तन एजेंसियों और रिवोल्यूशनरी गार्ड के चार क्षेत्रीय कमांडरों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं. इन पर लोरेस्तान और फार्स प्रांतों में कार्रवाई का नेतृत्व करने का आरोप है.
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कहा कि फार्स प्रांत में सुरक्षा बलों ने बड़ी संख्या में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या की. हालात इतने गंभीर थे कि अस्पताल गोली लगने से घायल लोगों से भर गए और अन्य मरीजों को भर्ती तक नहीं किया जा सका.
अली लारीजानी समेत सुरक्षा बलों के कमांडरों पर कार्रवाई
ट्रेजरी ने इसके साथ ही 18 व्यक्तियों और संस्थाओं को भी नामित किया है, जिन पर शैडो बैंकिंग नेटवर्क चलाने का आरोप है. इन नेटवर्कों के जरिए ईरानी तेल की बिक्री से होने वाली आय को संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर और यूनाइटेड किंगडम की फर्जी कंपनियों के माध्यम से सफेद किया जाता था. ट्रेजरी के अनुसार, ये नेटवर्क हर साल अरबों डॉलर की हेराफेरी करते रहे, जबकि ईरानी नागरिक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.
इन प्रतिबंधों के तहत अमेरिका में मौजूद संबंधित लोगों और संस्थाओं की संपत्ति फ्रीज कर दी गई है और अमेरिकी नागरिकों को इनके साथ किसी भी तरह का व्यापार करने से रोक दिया गया है. इसके अलावा, जो विदेशी वित्तीय संस्थान इनके साथ लेनदेन करेंगे, उन पर भी द्वितीयक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.
फार्स और लोरेस्तान में हिंसा के आरोप, अस्पताल घायलों से भरे
यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन की ईरान के खिलाफ अधिकतम दबाव नीति का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते से एकतरफा हटने के बाद हुई थी. ट्रेजरी के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक इस अभियान के तहत 875 से अधिक व्यक्तियों, जहाजों और विमानों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं.
ईरान में प्रदर्शन 28 दिसंबर को शुरू हुए थे। शुरुआत में ये प्रदर्शन ईरानी मुद्रा रियाल के पतन के खिलाफ थे, लेकिन बाद में यह असंतोष सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया. हालांकि बीते कुछ दिनों में दमन और लगभग एक हफ्ते तक चले इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण प्रदर्शन कमजोर पड़े हैं.
ट्रंप प्रशासन की अधिकतम दबाव नीति के तहत नई कार्रवाई
इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि ईरान में प्रस्तावित फांसी की योजनाएं फिलहाल रोक दी गई हैं. यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के न्याय प्रमुख घोलामहुसैन मोहसेनी एजई ने 18 हजार से अधिक हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ त्वरित सुनवाई और सजा देने की बात कही थी.
नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स संस्था के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 3,428 लोगों की मौत हो चुकी है. यह आंकड़ा दशकों में ईरान में किसी भी आंदोलन के दौरान सबसे ज्यादा बताया जा रहा है और 1979 की इस्लामिक क्रांति के समय की अराजक स्थिति की याद दिलाता है.
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