ईरान के साथ युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल है. इस बीच अमेरिका ने देशों को समंदर में फंसे रूस का तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने को हरी झंडी दे दी है.
अमेरिका ने समंदर में फंसे रूस का तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने के लिए देशों को 30 दिनों का लाइसेंस जारी किया है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए उठाया गया है.
बेसेंट ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि यह फैसला उस समय लिया गया जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं, जो लगभग चार वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है. उन्होंने यह भी कहा कि इस कदम से रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा.
यह घोषणा अमेरिकी ऊर्जा विभाग के उस फैसले के एक दिन बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि ईरान युद्ध के बाद तेजी से बढ़ती तेल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करेगा. यह कदम 32 देशों के अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत कुल 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में जारी किया जाएगा.
यह लाइसेंस 12 मार्च तक जहाजों पर लोड किए गए रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की डिलीवरी और बिक्री तक वैध रहेगा. इससे पहले पांच मार्च को अमेरिकी वित्त विभाग ने भारत के लिए भी 30 दिन की विशेष छूट जारी की थी, जिसके तहत भारत को समंदर में फंसे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी गई थी.
ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए अन्य कदमों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन को खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापार के लिए राजनीतिक जोखिम बीमा और वित्तीय गारंटी देने का निर्देश दिया है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि अमेरिकी नौसेना क्षेत्र में जहाजों को सुरक्षा दे सकती है.
ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों और उसके बाद तेहरान की प्रतिक्रिया के कारण क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है. इससे होर्मुज के रास्ते होने वाला समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है, जो मध्यपूर्व के तेल और गैस आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है और इसी वजह से ऊर्जा कीमतों में और तेजी आई है.
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