बांग्लादेश में अशांति के बीच श्रीलंका को भारत से उम्मीद, सांसद राजपक्षे ने कह दी बड़ी बात

श्रीलंका के सांसद नामल राजपक्षे ने दक्षिण एशिया में राजनीतिक अस्थिरता और चरमपंथी खतरों के बीच भारत की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि क्षेत्र के देशों को मिलकर काम करना होगा और भारत इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है.

Advertisement
नामल राजपक्षे ने भारत का समर्थन किया है नामल राजपक्षे ने भारत का समर्थन किया है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:06 PM IST

पाकिस्तान और बांग्लादेश से तनावपूर्ण रिश्तों के बीच भारत को अपने एक पुराने पड़ोसी श्रीलंका से समर्थन मिला है. श्रीलंका के सांसद नामल राजपक्षे ने उम्मीद जताई है कि दक्षिण एशिया में राजनीतिक अस्थिरता, जन आंदोलन और चरमपंथी खतरों के बीच भारत एक केंद्रीय भूमिका निभा सकता है. राजपक्षे का यह बयान हिंसा प्रभावित बांग्लादेश और नेपाल में होने वाले चुनावों से पहले आया है, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है.

Advertisement

पूर्व श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बड़े बेटे नामल राजपक्षे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा पोस्ट कर दक्षिण एशिया में देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग की वकालत की है. उन्होंने बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में बार-बार हो रही राजनीतिक उथल-पुथल का जिक्र किया. बीते कुछ सालों में इन दोनों देशों में लोगों के आंदोलनों के चलते सत्ता परिवर्तन देखने को मिला है.

राजपक्षे ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'हाल के वैश्विक सुरक्षा घटनाक्रमों के बीच दक्षिण एशिया में मजबूत क्षेत्रीय सहयोग की तत्काल जरूरत बढ़ गई है. इस क्षेत्रीय सहयोग में भारत एक केंद्रीय भूमिका निभा सकता है. हाल के सालों में बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका ने राजनीतिक उथल-पुथल के दौर देखे हैं, जिनमें जन आंदोलन की वजह से सरकारें बदली हैं.'

दक्षिण एशिया में उथल-पुथल

नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश- तीनों देशों में एक समान पैटर्न देखने को मिला है. इसकी शुरुआत 2022 में श्रीलंका से हुई, जब आर्थिक संकट और घरेलू मुद्दों को लेकर जनता का गुस्सा भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों में बदल गया और तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को सत्ता छोड़नी पड़ी.

Advertisement

2024 में बांग्लादेश में नौकरियों के कोटा सिस्टम के खिलाफ छात्र सड़क पर उतर आए. आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया और शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए. आखिरकार प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा और वो भागकर भारत में आ गईं. इसके बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनाई गई.

इसके अगले ही साल 2025 में नेपाल में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला. सोशल मीडिया पर बैन के खिलाफ जेन-जी का आंदोलन शुरू हुआ जो जल्द ही भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन में बदल गया. इस आंदोलन के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति को इस्तीफा देना पड़ा.

भारत क्यों अहम

नामल राजपक्षे ने अपनी पोस्ट में संकेत दिया कि इन घटनाओं में कुछ हद तक चरमपंथी तत्वों की भूमिका भी हो सकती है और इससे निपटने के लिए क्षेत्र के सभी देशों को मिलकर काम करना होगा.

उन्होंने कहा, 'इन चुनौतियों से निपटने के लिए चरमपंथ का मुकाबला करने, राजनीतिक हिंसा को रोकने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता जरूरी है. ऐसे में दक्षिण एशिया को उभरते संकटों का सामना करने और साझा चुनौतियों पर सामूहिक प्रतिक्रिया देने के लिए अधिक क्षेत्रीय एकजुटता की जरूरत है.'

Advertisement

उन्होंने भारत के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, 'क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत का नेतृत्व बेहद महत्वपूर्ण है. बांग्लादेश और नेपाल में होने वाले आगामी चुनाव लोकतांत्रिक वैधता को फिर से स्थापित करने का एक उम्मीद भरा मौका हैं. यह क्षेत्रीय सुरक्षा को और मजबूत करने में योगदान देंगे.'

दक्षिण एशिया में भारत की बड़ी भूमिका की राजपक्षे की यह अपील ऐसे समय में आई है, जब भारत-श्रीलंका संबंधों में सुधार देखा जा रहा है. 2022 के संकट के दौरान भारत ने श्रीलंका को वित्तीय मदद दी और क्रेडिट लाइन दी थी.

पिछले साल चक्रवात दित्वाह के बाद खोज और बचाव अभियानों में मदद कर भारत ने क्षेत्र में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की अपनी छवि को और मजबूत किया. इसके अलावा भारत ने श्रीलंका के पुनर्निर्माण के लिए 45 करोड़ डॉलर के सहायता पैकेज की भी घोषणा की थी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement