दंगों के बाद श्रीलंका में 10 दिन के लिए इमरजेंसी, टीम इंडिया कोलंबो में मौजूद

मालदीव में राजनीतिक उठापटक के बीच आपातकाल कई दिनों से बनी हुई है. अब श्रीलंका में लगातार हिंसा के बाद स्थानीय सरकार ने देशभर में आपातकाल लगाने का ऐलान किया.

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श्रीलंका में भड़की हिंसा श्रीलंका में भड़की हिंसा

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 5:09 PM IST

भारत के पड़ोसी मुल्कों में हालात इस समय अच्छे नहीं दिख रहे हैं. मालदीव में पहले से ही इमरजेंसी चल रही है और अब शांत राज्य कहे जाने वाले श्रीलंका में भी इमरजेंसी लगा दिया गया है.

में राजनीतिक उठापटक के बीच इमरजेंसी कई दिनों से बनी हुई है. अब श्रीलंका में लगातार हिंसा के बाद स्थानीय सरकार ने देशभर में 10 दिनों के लिए आपातकाल लगाने का ऐलान कर दिया है.

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रोहित शर्मा की अगुवाई में क्रिकेट टीम इस समय श्रीलंका के दौरे पर है और टी-20 सीरीज का पहला मैच आज शाम को खेला जाना है. हालांकि टीम अभी कोलंबो में है जबकि हिंसा कैंडी में भड़की है. टीम की सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

सोमवार को लगा कर्फ्यू

तनाव के हालात उस समय पैदा हो गए जब सोमवार को कैंडी शहर में एक बौद्ध समुदाय का व्यक्ति मारा गया और मुस्लिम व्यापारी को आग लगा दी गई, इससे वहां सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी. फिर वहां कर्फ्यू लगा दिया गया.

पुलिस का कहना है कि कैंडी जिले में सप्ताहांत से ही हिंसा और आगजनी जारी है. इसके बाद से हिंसा देश के अन्य हिस्सों में भी फैलने लगी.

पहले ही वहां सांप्रदायिक हिंसा भड़क चुकी है जो बाद में बेहद खतरनाक साबित हो गई थी. श्रीलंका में करीब 75 फीसदी आबादी बौद्ध सिंघली समुदाय की है जबकि 10 फीसदी मुसलमानों की आबादी रहती है.

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पहले भी हुई है सांप्रदायिक हिंसा

कुछ संगठनों ने इस हिंसा के लिए राष्ट्रवादी बौद्ध संगठन बोडू बाला सेना (बीबीएस) ग्रुप को जिम्मेदार ठहराया. दावा किया जा रहा है कि ये लोग मुसलमानों के स्वामित्व वाली दुकानों और मस्जिदों पर हमले कर रहे हैं.

जून, 2014 में भी मुस्लिम विरोधी अभियान शुरू हुआ गया था जो बाद में हिंसात्मक हो गया और इस हिंसा में काफी लोग मारे गए.

राष्ट्रपति एम सिरीसेना ने 2015 में सत्ता में आने के बाद मुस्लिम विरोध अपराध को लेकर जांच शुरू करवाई थी, लेकिन अभी तक इस पर कोई खास प्रगति नहीं देखने को मिली.

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि हिंसा और आगजनी के मामले में 2 दर्जन दोषी लोगों को गिरफ्तार किया गया है. साथ ही पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई है.

हालांकि सांप्रदायिक हिंसा को लेकर देश के शीर्ष स्तर से कुछ भी नहीं कहा गया है. राष्ट्रपति सिरिसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने पूरे मामले पर अभी कुछ नहीं कहा है.

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