विदेश मंत्री एस जयशंकर के पाकिस्तान दौरे की खूब चर्चा है. विदेश मंत्री 15-16 अक्टूबर के बीच आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO)में शामिल होने के लिए मंगलवार को पाकिस्तान पहुंचे. इस्लामाबाद में लैंड होने के कुछ समय बाद ही विदेश मंत्री ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तरफ से आयोजित डिनर में हिस्सा लिया. इस दौरान दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और थोड़ी बातचीत की, जिसकी खूब चर्चा है. पाकिस्तान की मीडिया में कहा जा रहा है कि दशक भर की चुप्पी के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच '20 सेकेंड' की मुलाकात हुई है.
विदेश मंत्री जयशंकर ने एससीओ शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन के बाद सोशल मीडिया साइट एक्स पर किए गए पोस्ट में कुछ तस्वीरे शेयर की हैं. एक तस्वीर में वो पाकिस्तानी पीएम से हाथ मिलाते दिख रहे हैं.
पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने एस जयशंकर और शहबाज शरीफ की मुलाकात पर प्रकाशित अपनी खबर को शीर्षक दिया है- एक दशक की चुप्पी के बाद, एससीओ शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान और भारत ने 20 सेकंड का संक्षिप्त मुलाकात की है.
अखबार ने डिनर से पहले दोनों नेताओं के हाथ मिलाने के संदर्भ में लिखा, 'दोनों नेताओं ने 20 सेकंड से भी कम समय तक चली संक्षिप्त मुलाकात में हाथ मिलाया और एक-दूसरे का अभिवादन किया. भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते करीब एक दशक से तनावपूर्ण बने हुए हैं. जयशंकर की यह यात्रा करीब 10 साल में किसी भारतीय मंत्री की पहली पाकिस्तान यात्रा है. इससे पहले साल 2015 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस्लामाबाद में अफगानिस्तान पर एक सम्मेलन में भाग लिया था, जिसमें तत्कालीन विदेश सचिव जयशंकर उनके साथ थे.'
पाकिस्तानी अखबार ने आगे लिखा कि उसी साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से अचानक मुलाकात की थी. बातचीत को बढ़ावा देने की पिछली सभी कोशिशों के बावजूद, दोनों देशों के बीच वार्ता पटरी से उतर गई है. इस्लामाबाद पहुंचने से पहले जयशंकर ने साफ कर दिया था कि उनका दौरा केवल एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए है और इस दौरान किसी भी द्विपक्षीय वार्ता की संभावना को खारिज कर दिया था.'
'दूसरे नेताओं का स्वागत उच्च अधिकारियों ने किया और जयशंकर का...'
पाकिस्तान ने न्यूज नेटवर्क जिओ टीवी ने अपनी जयशंकर के पाकिस्तान दौरे को दुर्लभ दौरा बताते हुए लिखा है, 'जयशंकर मंगलवार दोपहर इस्लामाबाद के नजदीक एक एयरबेस पर पहुंचे, जहां उनका स्वागत एक निम्न स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने किया, जबकि बाकी नेताओं का स्वागत वरिष्ठ मंत्रियों ने किया था. उनके आने के कुछ घंटे बाद उनका स्वागत पीएम शहबाज शरीफ ने किया जिस दौरान दोनों नेताओं ने हाथ मिलाए. इस दौरान दोनों के चेहरों पर गंभीर भाव थे.'
अखबार ने लिखा कि दोनों देशों के बीच संबंध खास तौर से 2019 के बाद से ज्यादा खराब हो गए हैं जब भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने कश्मीर से धारा 370 रद्द कर दिया. इसे देखते हुए पाकिस्तान ने द्विपक्षीय व्यापार निलंबित कर दिया था और भारत के साथ राजनयिक संबंधों को भी सीमित कर दिया.
जिओ न्यूज ने शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी पर पूर्व राजदूत मलीहा लोधी के हवाले से लिखा, 'मेरा मानना है कि भारतीय विदेश मंत्री के बहुपक्षीय दौरे से भारत और पाकिस्तान के बीच बर्फ नहीं पिघलेगी. हमारा गतिरोध बहुत गहरा है और इस तरह की बैठक से स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सकता.'
'भारत-पाकिस्तान रिश्तों में जमी बर्फ पिघल रही...'
पाकिस्तान के एक और अखबार पाकिस्तान टूडे ने विदेश मंत्री जयशंकर और शहबाज शरीफ के हाथ मिलाने को 'आइस मेल्टिंग' यानी रिश्तों में जमी बर्फ का पिघलना करार दिया है.
अखबार ने लिखा, 'शंघाई सहयोग संगठन के नेताओं के लिए आयोजित भोज के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने एक-दूसरे का हाथ थामा, जो कट्टर विरोधी पड़ोसी देशों के नेताओं के बीच एक दुर्लभ मुलाकात थी. जयशंकर ने लगभग दस सालों के बाद पड़ोसी देश की पहली यात्रा की है.'
जयशंकर के पाकिस्तान दौरे पर क्या बोले वहां के नेता?
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने विदेश मंत्री जयशंकर के पाकिस्तान दौरे का स्वागत किया है. पीपीपी शहबाज शरीफ सरकार में एक सहयोगी है और बिलावल भुट्टो के पिता आसिफ अली जरदारी पाकिस्तान के राष्ट्रपति हैं. पिछली सरकार में बिलावल भुट्टो विदेश मंत्री थे लेकिन इस बार उन्हें कोई कैबिनेट पोस्ट नहीं मिली है.
विदेश मंत्री के पाकिस्तान दौरे को लेकर भुट्टो ने कहा, 'एससीओ सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है क्योंकि यह द्विपक्षीय संबंधों को अपने एजेंडे पर हावी नहीं होने देता है, जो कि सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) के विफल होने का एक कारण था. हमें बातचीत शुरू करने की जरूरत है, लेकिन हमें कश्मीर और भारत की तरफ से बार-बार उठाए जा रहे आतंकवाद के मुद्दों को हल करने के तरीके खोजने होंगे. दोनों देश जलवायु परिवर्तन से भी प्रभावित हैं, इस पर भी बातचीत की जरूरत है.'
बीते हफ्ते पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भतीजी और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने भी सार्वजनिक रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच 'जलवायु डिप्लोमेसी' की वकालत की थी. उन्होंने कहा था कि दोनों देशों को इस मुद्दे पर बात करने की जरूरत है ताकि सीमा के दोनों ओर ग्लोबल वार्मिंग और वायु प्रदूषण से प्रभावित लोगों की मदद की जा सके.
पाकिस्तान की जलवायु परिवर्तन मंत्री शेरी रहमान ने 'द हिंदू' से बात करते हुए कहा कि उन्हें जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद कम है. उन्होंने कहा, 'ऐसा लगता है कि भारतीय विदेश मंत्री दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ को तोड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं रखते हैं.'
पिछले साल के 'नमस्ते' से कितना अलग है इस बार का 'हैंडशेक'
इस बार विदेश मंत्री और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का हाथ मिलाना चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इससे एक साल पहले ही जब दोनों देशों के विदेश मंत्री मिले थे तब भारत-पाकिस्तान रिश्तों की कड़वाहट सार्वजनिक रूप से दिखी थी.
पिछले साल मई में बिलावल भुट्टो एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे थे. उस दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री से हाथ मिलाने से परहेज किया और बस नमस्ते कहा था. बिलावल भुट्टो की भारत यात्रा बेहद ही खट्टे अनुभवों के साथ समाप्त हुई थी जिसमें विदेश मंत्री ने आतंकवाद के लिए पाकिस्तान को निशाने पर लिया और बिलावल को 'आतंक की इंडस्ट्री का प्रवक्ता' बता दिया था.
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