डोनाल्ड ट्रंप के बर्ताव पर असर डाल रहा है एस्पिरिन का 'ओवर डोज़'?

लंबे समय बाद दुनिया एक ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति को देख रही है जिनके रणनीतिक फैसले ही नहीं शारीरिक भाव भंगिमाएं भी लोगों को अचरज में डाल रही है. डोनाल्ड ट्रंप की कारगुजारियां आज फैमिली गपशप का हिस्सा बन गई हैं. क्या ट्रंप का बिहैवियर किसी चीज से प्रभावित हो रहा है. आपको बता दें कि 79 साल के ट्रंप अपने दिल का ख्याल रखते हुए वर्षों से एस्पिरिन की गोली का ओवरडोज ले रहे हैं.

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ट्रंप लेते रहे ज्यादा एस्पिरिन (Photo: PTI) ट्रंप लेते रहे ज्यादा एस्पिरिन (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:02 PM IST

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप का बर्ताव पूरी दुनिया को बेचैन कर रहा है. कोई उन्‍हें सनकी कह रहा है, कहीं वो अहंकारी नजर आते हैं, तो कहीं अपनी ही कही बात से बार बार पलट जाने वाले. वे जिस तरह से दुनिया के राष्‍ट्राध्‍यक्षों का मजाक उड़ा रहे हैं, अजीब अजीब चेहरे बना रहे हैं. एक अमेरिकी राष्‍ट्रपति के लिए ये सामान्‍य नहीं लगता है. सवाल उठ रहा है कि ट्रंप का बिगड़ा व्‍यवहार कहीं उस दवा का नतीजा तो नहीं है, जो वे डॉक्टरों के बार बार मना करने के बावजूद लेते जा रहे हैं. जी हां, ट्रंप खून पतला करने के लिए एस्पिरिन ड्रग का सेवन कर रहे हैं. वो भी जरूरत से ज्‍यादा मात्रा में. विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके साइड इफेक्‍ट शरीर ही नहीं, बर्ताव पर भी असर डालते हैं.  

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एस्पिरिन टेबलेट लेते हैं. एस्पिरिन दवा दुकानों पर मिलने वाली एक सामान्य सी गोली है. जो सिरदर्द, दांत दर्द, मांसपेशियों के दर्द, पीठ दर्द दूर करने में काम आती है. लेकिन इसका एक और भी काम है जो ज्यादा अहम है, वो है खून को पतला करने का. राष्ट्रपति ट्रंप रोजाना एस्पिरिन की ज़्यादा डोज़ लेते हैं, और वो भी पिछले दो दशकों से.

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने ट्रंप द्वारा रोजाना एस्पिरिन लेने पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है. इस रिपोर्ट में इस दवाओं के असर पर भी चर्चा है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप को उनके डॉक्टरों और मेडिकल टीम ने कहा है कि वे इस दवा का डोज कम करें लेकिन ट्रंप ने इस सलाह को नजरअंदाज़ करते हुए कम डोज़ लेने से मना कर दिया है. ट्रंप तय मात्रा से लगभग चार गुना ज्‍यादा यानी 325 मिलीग्राम एस्पिरिन ले रहे हैं. गाइडलाइंस के अनुसार, 60 या 70 साल से कम उम्र के लोग, जिन्हें हार्ट अटैक का ज़्यादा खतरा है, उन्हें एस्पिरिन देने पर विचार किया जा सकता है. लेकिन ये आकलन अलग अलग केस और परिस्थितियों पर निर्भर करता है.

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ट्रंप ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल को एक इंटरव्यू में बताया, 'लोग कहते हैं कि एस्पिरिन खून को पतला करने के लिए अच्छी होती है, और मैं नहीं चाहता कि मेरे दिल में गाढ़ा खून बहे.' 79 साल के राष्ट्रपति ट्रंप को पिछले साल ही पता चला है क‍ि उन्‍हें क्रॉनिक वीनस इनसफिशिएंसी नामक बीमारी है. यह एक ऐसी स्थिति है जब नसों को खून वापस दिल तक पहुंचाने में दिक्कत होती है. उनके हाथ पर खून के थक्‍के दिखे थे, जिसे उनके डॉक्टर ने बार-बार हाथ मिलाने की आदत और दिल की सेहत के लिए एस्पिरिन लेने से जोड़ा था.
 
एक दशक पहले तक हुई रिसर्च से यह माना जाता था कि जिन लोगों को दिल की कोई बीमारी रही है, उनके लिए एस्पिरिन का रोजाना इस्तेमाल हार्ट अटैक और स्ट्रोक की संभावना को कर सकता है. क्योंकि यह खून के थक्के नहीं बनने देता है. लेकिन 2018 में पब्लिश हुए तीन बड़े, रैंडम ट्रायल ने इस सोच को बदल दिया. पता चला कि जिन लोगों को दिल की बीमारी का कोई इतिहास नहीं है, उनमें एस्पिरिन शायद उतना फायदा न पहुंचाए और यह भी दिखाया कि इससे खून बहने और कैंसर, खासकर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर से मरने का खतरा बढ़ जाता है.

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यह तो हुई शरीर पर साइड इफेक्‍ट की बात. जाहिर है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति के स्‍वास्‍थ्‍य का ख्‍याल रखने के लिए व्‍हाइट हाउस में बहुत से डॉक्‍टर हैं. लेकिन, एस्पिरिन का ओवर डोज़ सिर्फ शरीर ही नहीं, इंसान के बर्ताव पर भी असर डालता है. और जब मामला ट्रंप के बर्ताव का हो, तो यह पूरी दुनिया के लिए चिंता की बात हो जाती है.

ओवरडोज़ से डिप्रेशन, घबराहट, व्‍याकुलता बढ़ जाती है, जैसा क‍ि ट्रंप में दिखता है

एस्पिरिन के ड्रग सब ग्रुप एस्‍प्री-डी के ट्रायल से पता चला है कि जिन बुजुर्गों को डिप्रेशन की श‍िकायत रही है, उसमें इस दवा ओवरडोज़ डिप्रेशन और बढ़ा देता है. मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर बुरा असर होता है. कन्‍फ्यूजन बढ़ने लगता है. बेचैनी होती है. नर्वस महसूस होता है. ट्रंप के बर्ताव में ये सब दिखता है, भले वह एस्पिरिन के ओवर डोज़ से हो, न हो. न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट आने के बाद से यह सवाल जरूर पूछा जा रहा है क‍ि क्‍या ट्रंप स्‍वस्‍थ्‍य हैं? क्‍या ट्रंप राष्‍ट्रपति होने के लायक संतुलित हैं? 

एस्पिरिन किनको रोज लेना चाहिए? और कितनी?

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यूं तो एस्पिरिन दैनिक उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए. प्रिवेंटिव टास्क फोर्स, अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन जैसे ग्रुप्स की मेडिकल गाइडलाइंस 60 या 70 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों में कार्डियोवैस्कुलर बीमारी को रोकने के लिए रूटीन तौर पर एस्पिरिन लेने या नियमित रूप से इसका इस्तेमाल शुरू करने की सलाह नहीं देती हैं.

कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी लॉस एंजिल्स के प्राइमरी केयर फ़िज़िशियन डॉ. जॉन माफी ने कहा कि सिर्फ़ उन्हीं लोगों को रोज़ाना एस्पिरिन लेने की सलाह दी जाती है, जिन्हें कार्डियोवैस्कुलर बीमारी का इतिहास रहा है, यानी जिन्हें पहले हार्ट अटैक, इस्केमिक (बिना ब्लीडिंग वाला) स्ट्रोक या पेरिफेरल आर्टरी डिजीज हुई हो. 

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रोजाना एस्पिरिन लेने के क्या जोखिम हैं?

एस्पिरिन प्लेटलेट्स के बहाव को रोकने का काम करती है. प्लेटलेट्स हमारे खून का वह हिस्‍सा है जो एक साथ चिपककर थक्का भी बना देता है. और खून को बहने से रोकता है. खून के थक्के हार्ट अटैक और इस्केमिक स्ट्रोक के लिए ज़िम्मेदार होते हैं. लेकिन एस्पिरिन का यही एंटी-क्लॉटिंग गुण खून के अंदरुनी रिसाव का खतरा बढ़ा देता है. जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग या अचानक ब्रेन हेमरेज. जो जानलेवा भी हो सकती है. जिसका खतरा उम्र के साथ बढ़ता जाता है.

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पिछले महीने व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक मेमो में कहा गया था कि ट्रम्प की कार्डियोवैस्कुलर इमेजिंग की रिपोर्ट पूरी तरह से नॉर्मल आई है. उसके पिछले स्कैन में उनकी धमनियों में प्लाक होने का पता चला था जो उनकी उम्र के पुरुषों में सामान्य है. लेकिन, ऐसे हैल्‍थ चैकअप के बारे में ट्रंप मानते हैं कि इससे उनके स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर अनावश्‍यक टिप्‍पणियां होती हैं. ट्रंप का नजरिया उनकी अपनी सेहत को लेकर डॉक्‍टरों की राय से परे है. अब आप चाहें तो इसके उनकी पर्सनालिटी को जिम्‍मेदार मान सकते हैं, या एस्पिरिन के ओवर डोज़ को. लेकिन, मामला सिर्फ ट्रंप या उनके डॉक्‍टरों तक सीमित नहीं है. उनके इस बर्ताव का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है.

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