पाकिस्तान में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की कैबिनेट ने मंगलवार को शपथ ले ली. कैबिनेट में 3 मिनिस्टर ऑफ स्टेट समेत 34 मंत्री हैं. इसके अलावा प्रधानमंत्री के तीन सलाहकारों ने शपथ ली है. हालांकि, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने मंत्रिपद की शपथ न लेकर सभी को चौंका दिया. पहले कहा जा रहा था कि बिलावल शहबाज शरीफ की कैबिनेट में विदेश मंत्री बनेंगे. इससे पहले आसिफ अली जरदारी ने भी कैबिनेट में शामिल होने से इनकार कर दिया था. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या पाकिस्तान की गठबंधन वाली नई सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है.
पाकिस्तान में इमरान खान को सत्ता से बाहर करने के विपक्ष एक साथ आया है. लेकिन ये बात किसी से छिपी नहीं है कि इससे पहले तक शहबाज शरीफ की पार्टी PML-N और भुट्टो की पार्टी एक दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं. दोनों पार्टियों के साथ आने पर इमरान खान भी इसे लेकर शहबाज और बिलावल पर निशाना साधते रहे हैं. इतना ही नहीं यह भी कहा जा रहा है कि अगले आम चुनाव में ये पार्टियां अलग अलग चुनाव लड़ सकती हैं.
कैबिनेट में क्यों शामिल नहीं हुए बिलावल भुट्टो?
- कहा जा रहा है कि बिलावल ने आखिरी समय में कैबिनेट में न शामिल होने का फैसला किया है. दरअसल, पीपीपी में कुछ नेताओं का मानना है कि बिलावल भुट्टो पीपीपी चेयरमैन हैं और पाकिस्तान में पीएम उम्मीदवार रहे हैं. तो वे इस बार अगर शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार में अगर विदेश मंत्री के तौर पर शामिल होते हैं, तो उनकी छवि पर असर पड़ेगा. इतना ही नहीं, अगले चुनाव में भी जब वे जनता के सामने पीपीपी की ओर से पीएम का चेहरा बनकर जाएंगे, तब भी उन्हें परेशानी उठानी पड़ सकती है.
- ये भी कहा जा रहा है कि गठबंधन सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. पीपीपी कैबिनेट में जगह को लेकर शहबाज शरीफ से नाराज हैं. ऐसे में भुट्टो ने कैबिनेट में शामिल न होने का फैसला किया है.
- इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व रक्षा मंत्री आसिफ ने दावा किया था कि पीपीपी चेयरमैन बिलावल भुट्टो विदेश मंत्री बन सकते हैं. हालांकि, पीपीपी के एक अन्य नेता ने बताया है कि पहले चरण में बिलावल भुट्टो कैबिनेट में शामिल नहीं होंगे. वे कुछ दिन बाद शपथ ले सकते हैं.
- इतना ही नहीं ये भी कहा जा रहा है कि बिलावल पहले विदेश मंत्री का पद लेने के लिए तैयार नहीं थे. उन्हें लगता था कि पाकिस्तान में कुछ समय बाद आम चुनाव होने हैं और अगर वे मंत्री बन जाते हैं तो इससे पार्टी चेयरमैन के तौर पर उनके काम पर असर पड़ेगा.
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