अपनी तिजोरी का राज छिपाने के लिए PAK सांसदों ने निकाला 'कानूनी' रास्ता, संसद में नया बिल पारित

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने एक विधेयक पारित किया है, जो सांसदों को सुरक्षा कारणों से एक तय समय तक अपनी संपत्ति के विवरण को गोपनीय रखने की अनुमति देता है. अब सदन के स्पीकर या चेयरमैन यह तय कर सकेंगे कि संपत्ति का खुलासा सार्वजनिक किया जाए या नहीं.

Advertisement
पाकिस्तान में अब जनता को नहीं पता चलेगा सांसदों का बैंक बैलेंस पाकिस्तान में अब जनता को नहीं पता चलेगा सांसदों का बैंक बैलेंस

सुबोध कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:58 PM IST

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने बुधवार को एक ऐसा विधेयक पारित किया है जिससे सांसदों को अपनी और अपने परिवार की संपत्ति के विवरण को गुप्त रखने की छूट मिल जाएगी. 'इलेक्शन (संशोधन) एक्ट, 2026' के तहत लाए गए इस बदलाव के बाद अब सांसद और सीनेटर एक साल तक अपनी संपत्ति का खुलासा सार्वजनिक रूप से न करने का विकल्प चुन सकते हैं.

Advertisement

 पाकिस्तानी मीडिया 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कानून में तर्क दिया गया है कि यदि संपत्ति का सार्वजनिक खुलासा किसी सांसद या उसके परिवार की जान और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है, तो इसे गोपनीय रखा जा सकता है. 

इससे पहले, 'इलेक्शन एक्ट' की धारा 138 के तहत सभी सांसदों को हर साल 31 दिसंबर तक अपनी, अपने जीवनसाथी और बच्चों की संपत्ति का ब्यौरा चुनाव आयोग (ECP) को देना अनिवार्य था, जिसे आधिकारिक गजट में प्रकाशित किया जाता था.

एक वर्ष तक की छूट

स्पीकर और चेयरमैन के पास होगी ताकत नए संशोधन के अनुसार, अब संबंधित सदन के स्पीकर या सीनेट के चेयरमैन को यह अधिकार होगा कि वे किसी सदस्य की संपत्ति के विवरण को सार्वजनिक न करने का निर्देश दे सकें. हालांकि, सांसदों को अपनी संपत्ति का पूर्ण और सत्य विवरण गोपनीय रूप से चुनाव आयोग को जमा करना ही होगा. यह छूट एक बार में अधिकतम एक वर्ष के लिए दी जा सकेगी.

Advertisement

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान: कराची की एक दुकान से मिलीं 30 लाशें, एक हफ्ते से जारी है यहां डेड बॉडीज के निकलने का सिलसिला

न्यायिक बदलाव और अन्य संशोधन इस बिल के जरिए 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद हुए न्यायिक बदलावों को भी शामिल किया गया है. उदाहरण के तौर पर, संघीय संवैधानिक न्यायालय (FCC) की स्थापना के बाद कानून में 'सुप्रीम कोर्ट' शब्द की जगह 'संघीय संविधान' शब्द का प्रयोग किया गया है. अब इस बिल को सीनेट की मंजूरी और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून का रूप दिया जाएगा.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement