पाक का दावा, कुलभूषण को दूतावास मदद के लिए भारत से संपर्क में है इस्लामाबाद

जाधव को दूतावास मदद की शर्तों पर दोनों देशों के बीच मतभेदों की वजह से दो अगस्त को दोपहर तीन बजे निर्धारित बैठक नहीं हो पाई.

कुलभूषण जाधव (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 29 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 10:37 PM IST

  • पाकिस्तान ने कहा कि वो भारत के साथ जाधव को दूतावास मदद के मुद्दे पर संपर्क में हैं
  • जाधव को जासूसी और आतंकवाद के आरोप में अप्रैल 2017 में मौत की सजा मिली थी
  • भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) का रुख कर सजा पर रोक लगाने की मांग की थी

कुलभूषण जाधव को दूतावास मदद की इजाजत देने के पाकिस्तान के वादे के करीब 6 हफ्ते बाद इस्लामाबाद की ओर से गुरुवार को कहा गया कि इस मुद्दे पर वह भारत से संपर्क में है. गौरतलब है कि एक अगस्त को पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा था कि फांसी की सजा का सामना कर रहे भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव को अगले दिन दूतावास मदद मुहैया कराई जाएगी.

हालांकि, जाधव को दूतावास मदद की शर्तों पर दोनों देशों के बीच मतभेदों की वजह से दो अगस्त को दोपहर तीन बजे निर्धारित बैठक नहीं हो पाई.

पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने कहा कि पाकिस्तान और भारत जाधव को दूतावास मदद के मुद्दे पर संपर्क में हैं. जाधव (49) को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवाद के आरोप में अप्रैल 2017 में मौत की सजा सुनाई थी.

इसके बाद भारत ने हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) का रुख कर सजा पर रोक लगाने की मांग की थी. आईसीजे ने 17 जुलाई को पाकिस्तान को जाधव की दोषसिद्धि और सजा की प्रभावी समीक्षा एवं पुनर्विचार करने का आदेश दिया था.

साथ ही, बगैर और देर किये उन्हें दूतावास मदद पहुंचाने को भी कहा था. पाकिस्तान ने दूतावास मदद के लिए जो शर्तें रखी थी, उनमें से एक शर्त कथित तौर पर यह थी कि जब जाधव भारतीय अधिकारियों से मिलेंगे उस वक्त एक पाकिस्तानी अधिकारी भी मौजूद रहेगा.

भारत इस शर्त पर राजी नहीं हुआ और अपना यह रुख स्पष्ट कर दिया कि दूतावास मदद अवश्य ही निर्बाध होनी चाहिए  पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षा बलों ने जाधव को तीन मार्च 2016 को अशांत बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया था. पाक का दावा है कि उन्होंने ईरान से वहां प्रवेश करने की कोशिश की थी. हालांकि, भारत का कहना है कि जाधव को ईरान से अगवा कर लिया गया, जहां नौसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वह कारोबार करने गए थे.

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