'...तो मुल्क बच नहीं सकता', इमरान ने 1971 से की मौजूदा वक्त की तुलना, हुक्मरानों को याद दिलाया 'ढाका संकट'

पाकिस्तान की अदियाला जेल में बंद इमरान खान ने अपने ही मुल्क के हुक्मरानों को 'ढाका संकट' याद दिलाया है और कहा है कि मौजूदा परिस्थिति 1970-71 की तरह मालूम पड़ रही है. बता दें कि 1971 ही वो साल है जब पाकिस्तान को टुकड़ों में बंट गया था.

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पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान. (फाइल फोटो) पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान. (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 3:22 PM IST

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में बंद हैं, लेकिन उन्हें पाकिस्तान के मुस्तकबिल की चिंता सता रही है. इमरान खान ने कहा है कि उनके मुल्क में जो हालात बन रहे हैं इससे 'ढाका त्रासदी' के हालात बन रहे हैं. इमरान खान ने पाकिस्तान के मौजूदा हालत और 1971 की परिस्थितियों की तुलना की है और चेतावनी दी है कि इससे पाकिस्तान गंभीर संकट में फंस सकता है. 

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डॉन अखबार ने बताया कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक चेयरमैन ने रावलपिंडी की अदियाला जेल से एक संदेश में मौजूदा सरकार को याद दिलाया कि "देश और संस्थाएं" मजबूत और स्थिर अर्थव्यवस्था के बिना जिंदा नहीं रह सकते.

ईद के मौके पर इमरान की पार्टी पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ की लीगल टीम ने अदियाला जेल में उनसे मुलाकात की थी. इसके बाद इमरान खान का संदेश (पीटीआई) के सूचना सचिव रऊफ हसन ने मीडिया के सामने उनका संदेश जारी किया. 

पार्टी की ओर से बैरिस्टर राजा ने कहा कि इमरान का संदेश सुनाते हुए कहा कि 'जब आप लोगों को अधिकार नहीं देते हैं, तो आप ये नहीं कह सकते हैं कि अर्थव्यव्स्था में बढ़ोतरी होगी'

इमरान ने हुक्मरानों को याद दिलाया ढाका का संकट 

बैरिस्टर राजा ने इमरान का संदेश सुनाते हुए 1970-71 में पूर्वी पाकिस्तान की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा, '1970 में आर्मी चीफ याह्या खान त्रिशंकु संसद चाहते थे, लेकिन जब शेख मुजीबुर रहमान की पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला, तो सेना ने धोखाधड़ी से उपचुनाव कराया, जिसमें अवामी लीग की 80 सीटें छीन ली गईं क्योंकि याह्या खुद खान राष्ट्रपति बनना चाहते थे.'

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आगे इमरान ने कहा, 'मैं हमूदुर रहमान आयोग की रिपोर्ट को याद दिलाना चाहता हूं कि हम फिर से वही गलतियां दोहराने जा रहे हैं जो हमने अतीत में की थीं. 1970 में लंदन प्लान बना और आज फिर लंदन प्लान के जरिए सरकार थोप दी गई है.'

बता दें कि इमरान खान और उनकी पार्टी लगातार कह रही है कि फरवरी 8 को पाकिस्तान में हुए आम चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली की गई और नतीजों को प्रभावित किया गया. इस दौरान पाकिस्तान की सेना ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज को सत्ता हथियाने में मदद की. गौरतलब है कि पाकिस्तान में हुए चुनाव के बाद काफी जोड़-तोड़ हुई इसके बाद पूर्व पीएम नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ ने पीपीपी और दूसरी पार्टियों के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बनाई है. 

कोर्ट द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद इमरान खान की पार्टी इस चुनाव में नहीं उतरी थी. इसके बाद पीटीआई के नेता निर्दलीय चुनाव में उतरे थे. इस चुनाव में पीटीआई के सपोर्ट से निर्दलीय उम्मीदवारों ने नेशनल असेंबली में अधिक सीटें जीतीं थी लेकिन संवैधानिक प्रावधानों, इमरान की गैरमौजूदगी, सेना का पीएमएल-एन की ओर झुकाव जैसे कुछ फैक्टर रहे जिस वजह से पीटीआई सरकार नहीं बना सकी. इसलिए पीटीआई को लगता है कि मौजूदा सरकार ने उनसे जनमत छीनकर खुद सरकार बना लिया है. 

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इमरान खान कई बार यह दावा कर चुके हैं कि पीटीआई का जनादेश चुरा लिया गया है और "पार्टी पर कब्ज़ा करने के प्रयास किए जा रहे हैं". 

पाकिस्तान की सेना में शक्तिशाली फैक्टर रहे सेना से अनबन के बाद से खान की पार्टी को दमन का सामना करना पड़ रहा है. पिछले साल इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद 9 मई को हुई हिंसा के बाद पार्टी को गिरफ्तारी और नेताओं के पाला बदल का सामना करना पड़ा है. 

बता दें कि अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव में सत्ता से हटने के बाद से क्रिकेटर से नेता बने 71 साल के इमरान खान को कम से कम चार मामलों में दोषी ठहराया गया है. 

लेकिन आखिर ढाका संकट क्या है जिसकी तुलना इमरान खान पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य से कर रहे हैं? ये समझना जरूरी है. 

जिस तरह 2023 में हुए चुनाव में इमरान पाकिस्तान की सरकार पर जनमत चुराने का आरोप लगा रहे हैं. ऐसा ही एक चुनाव 1970 में हुआ था. तब पाकिस्तान का बंटवारा नहीं हुआ था और बांग्लादेश नहीं बना था. लेकिन अब के बांग्लादेश और उस समय के पूर्वी पाकिस्तान में शेख मुजीबुर रहमान लोकप्रिय नेता थे. वे पूर्वी पाकिस्तान की स्वायतत्ता के लिए शुरू से संघर्ष कर रहे थे. 

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1970 के इस चुनाव में मुजीबुर रहमान की पार्टी आवामी लीग को जोरदार जीत मिली. पूर्वी पाकिस्तान की 169 से 167 सीट आवामी लीग को मिली. 313 सीटों वाली पाकिस्तानी संसद में मुजीब के पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त बहुमत था, लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान के लीडरों और सैन्य शासन को यह गंवारा नहीं था.

आर्मी चीफ याह्या खान ने शेख मुजीब को सरकार नहीं बनाने दिया. मुजीब के साथ इस धोखे से पूर्वी पाकिस्तान में बगावत हो गई, लोग सड़कों पर उत्तर आए. इसके बाद पाकिस्तान ने इस विद्रोह को कुचलने के लिए सेना को बुला लिया. इन्हीं परिस्थितियों में भारत ने पूर्वी बांग्लादेश में अपनी सेना भेजी और बांग्लादेश को आजाद कराया. इस तरह से दुनिया के नक्शे पर एक नए देश का उदय हुआ. 

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