महामारी के इस दौर में क्यों बढ़ी विशेषाधिकार वीजा की मांग?

महामारी के बीच विशेषाधिकार वीजा की मांग बढ़ गई है. ये वीजा व्यक्तियों को यात्रा प्रतिबंधों के बावजूद कुछ देशों की यात्रा करने की अनुमति देते हैं. कोरोना संक्रमण के बीच बड़ी संख्या में लोग इस वीजा को हासिल करना चाहते हैं.

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तेजी से बढ़ी है दुनियाभर में गोल्डन वीजा की मांग तेजी से बढ़ी है दुनियाभर में गोल्डन वीजा की मांग

गीता मोहन

  • नई दिल्ली,
  • 12 जून 2021,
  • अपडेटेड 7:34 AM IST
  • कुछ देशों में निवेश के जरिए नागरिकता का प्रावधान
  • हाल के दिनों में बढ़ी है गोल्डन वीजा की मांग
  • आर्थिक अपराधियों के ढाल हैं गोल्डन वीजा

केरल के दो परिवार हाल ही में उस वक्त देशभर में चर्चित हो गए, जब वे कोविड-प्रभावित भारत से हवाई यात्रा के अस्थायी निलंबन के बावजूद अमीरात की फ्लाइट से दुबई पहुंचे. उन्हें जाने की अनुमति सिर्फ इसलिए मिली क्योंकि उनके पास गोल्डन वीजा था.

कोरोना संकट के कराहते दुनिया में अचानक प्रिविलेज वीजा या विशेषाधिकार वीजा की मांग तेजी से बढ़ी है. यह वीजा तमाम यात्रा संबंधी प्रतिबंधों के बाद भी यात्रा करने की अनुमति देता है. कोरोना से जूझते देशों में भी यह वीजा अन्य वीजा की तुलना में यात्रा के लिए अधिक प्रभावी है.

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विशेषाधिकार वीजा(प्रिविलेज वीजा) क्या हैं?

विशेषाधिकार वीजा एक ऐसी प्रणाली है, जिसके जरिए अप्रवासी निवेशकों को संबंधित देश में निवेश करने के बदले में निवासी बनने या नागरिकता हासिल करने की अनुमति मिलती है. इन्हें सामान्यत: गोल्डन पासपोर्ट या कैश फॉर पासपोर्ट के तौर पर जाना जाता है. इसके जरिए निवेशकों को किसी देश विशेष की नागरिकता भी मिल जाती है, या वे किसी देश के निवासी बन सकते हैं, जो बाद में त्वरित नागरिकता हासिल करने की योग्यता भी पा सकते हैं.

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ऐसे निवेश कई तरह के हो सकते हैं. निवेशक सरकारी फंड में पैसे दे सकते हैं, सरकारी फंड्स में निवेश कर सकते हैं, किसी विशेष व्यापार में शामिल हो सकते हैं, या रोजगार पैदा कर सकते हैं. दुनियाभर के अमीर और गरीब देश अपने देश में निवेश को बढ़ावा देना चाहते हैं. दुनिया के एक चौथाई देश, ऐसे ऑफर विदेशी नागरिकों को देते हैं. 

विदेश मंत्रालय में पूर्व सचिव रहे अमरेंद्र खटुआ ने आजतक के साथ इस विषय पर बातचीत की. वे  जिन्होंने वीज़ा और पासपोर्ट विभाग को भी लीड कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के साथ-साथ कई देश निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अपनी अर्थव्यवस्था और समाज की स्थिरता का इस्तेमाल करते हैं. गोल्डन वीजा तक पहुंच अमीर, ताकवर और अभिजात्य वर्ग का होता है. इसके जरिए किसी देश में नागरिकों जैसे ही अधिकार मिलते हैं, कभी भी देश के बाहर एंट्री या एग्जिट ले सकते हैं.

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कितने तरह के होते हैं वीजा?

आम तौर पर, वीजा को दो वर्गों में बांटा जा सकता है. एक जनरल(टूरिज्म) वीजा और दूसरा  फंक्शनल. इसका इस्तेमाल प्रोफेशनल, बिजनेस, वर्क, स्टूडेंट, कॉन्फ्रेंस, सांस्कृतिक कार्यकर्मों के लिए होता है.

तीसरी श्रेणी में लोग बिना वीजा के किसी देश में शरणार्थी या प्रत्यर्पित होकर रहते हैं, जब तक उनके देश से उनकी समस्याएं नहीं सुलझती हैं.
फंक्शनल कैटेगरी के तहत ही प्रिविलेज वीजा दिया जाता है, यहां लोग इन्वेस्टमेंट करके लंबे समय तक वीजा हासिल किए रहते हैं.

व्यवसायी, सफेदपोश अपराधियों को मिलता है कौन सा वीजा?

जिन देशों के दोहरे कराधान संबंध अन्य देशों से नहीं हैं, वे व्यवसायियों को बड़ी संख्या में आकर्षित करते हैं. इन देशों में सेंट्रल अमेरिका, अफ्रीका, पेसिफिक आइलैंड कंट्रीज शामिल हैं. विजय माल्या और मेहुल चोकसी जैसे सफेदपोश अपराधियों को ऐसे देश खींचते हैं  जो मूल देश में प्रत्यावर्तन और सजा से बचना चाहते हैं. इनमें पूर्व तनाशाह, भ्रष्टाचारी नेता, अधिकारी और मनी लॉन्ड्रिंग के बिजनेस से जुड़े लोग शरण लेते हैं.

ये देश ज्यादातर डायमंड/गोल्डन/डी-वीजा/स्पेशल प्रिविलेज वीजा बेचते हैं. इन देशों में बेलीज, रीयूनियन द्वीप, डोमिनिका, हैती, सेंट किट्स, सेंट लूसिया, ग्रेनेडा आदि शामिल हैं. हालांकि, स्पेन, सिंगापुर, कनाडा, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल, साइप्रस, ग्रीस और माल्टा द्वारा जारी 'गोल्डन वीजा' निवेश को आकर्षित करने, उद्योग स्थापित करने के लिए दिया जाता है. 

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अमेरिका में डी-वीजा
जहां तक 'डी-वीजा' की बात है, यह श्रेणी हर देश में अलग-अलग होती है.. कुछ देशों में, 'डी' श्रेणी लंबे समय तक रहने वाले वीजा के तौर पर जानी जाती है. हालांकि, अमेरिका जैसे अन्य देशों में, यह एयरलाइंस और समुद्री जहाजों के चालक दल के सदस्यों को मिलता है, जो हर यात्रा के लिए वीजा नहीं हासिल कर सकते हैं.


यूरोपीय संघ में डी-वीजा
यूरोपीय संघ के देशों में, टाइप डी वीजा दिया जाता है, जिसे हासिल कर एक शख्स लंबे अरसे तक वहां रह सकता है. इसे फंक्शनल वीजा के तहत रखा गया है. यात्रा के मकसद से डी वीजा के लिए वही लोग अप्लाई कर सकते हैं, जिन्हें टूरिज्म के मकसद से जाना हो, प्रोफेशनल एक्टिविटी, पढ़ाई या किसी कार्यक्रम में हिस्सा लेने जाना हो.

कौन से देश 'निवेश द्वारा नागरिकता' देते हैं?
सेंट किट्स एंड नेविस, माल्टा, डोमिनिका और तुर्की में निवेश के जरिए नागरिकता हासिल किया जा सकता है. निवेशकों को एक तय रकम तक इन देशों में निवेश करना होता है, जिसके बाद उन्हें वीजा हासिल हो जाता है.

किन देशों में मिलती है निवेश से रहने की छूट?
निवेश के जरिए किसी आवेदक को निवास मिल सकता है. इसके लिए संबंधित देश में संपत्ति खरीदनी होती है, या निवेश करना होता है, जिसके बाद निवास के लिए इजाजत मिल जाती है, जो परमानेंट भी हो सकता है.

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कई देशों में ऐसी सुविधाएं हैं. इनमें अबकाजिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, हांगकांग, लातविया, मोनाको, पुर्तगाल, सिंगापुर, स्पेन, यूक्रेन, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं.

हाइब्रिड रेजिडेंस-सिटीजनशिप प्रोग्राम्स
कुछ देशों में रेजिडेंस-सिटीजनशिप प्रोग्राम्स चलाए जाते हैं. ऐसे में पहले रेजिडेंस की अनुमति मिलती है, फिर कम से कम 2 साल पूरे करने पर नागरिकता दे दी जाती है. बुल्गारिया, मॉरीशस और समोआ सहित कई देशों में ऐसी सुविधाएं हैं.

क्यों होता है गोल्डन वीजा को लेकर विवाद?
पासपोर्ट और गोल्डन वीजा की बिक्री ने कई देशों में विवाद खड़ा कर दिया है. सुरक्षा के सवालों के साथ-साथ इससे कई देशों में आर्थिक हानि भी हुई है. सफेदपोश और आर्थिक अपराधियों के लिए कुछ भ्रष्ट देशों में रहना आसान हो जाता है. ऐसे लोग अपराधियों को कुछ निवेश के बदले में प्रश्रय देते हैं.

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