अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की चाहत बढ़ती ही जा रही है. पहले तो उन्होंने इस पर कब्जा करने की धमकी दी लेकिन जब इससे बात बनती नहीं दिखी तो वो एक नया प्लान लेकर आए हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बताया है कि ट्रंप ने ग्रीनलैंड के लोगों को सीधे कैश बांटने की संभावना पर चर्चा की है, ताकि उन्हें डेनमार्क से अलग होने के लिए मनाया जा सके.
ट्रंप ने अपने सहयोगियों और व्हाइट हाउस के सीनियर अधिकारियों से ग्रीनलैंड को लेकर यह बैठक तब की है, जब उन्होंने हाल ही में कहा था कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कंट्रोल होना चाहिए, क्योंकि डेनमार्क उसे संभाल नहीं पा रहा है.
हालांकि, ट्रंप के इस बयान ने ग्रीनलैंड और डेनमार्क के साथ-साथ यूरोपीय नेताओं को नाराज कर दिया था. ट्रंप के बयान के बाद कई यूरोपीय नेताओं ने एक साझा बयान जारी कर कहा था कि ग्रीनलैंड वहां के लोगों का है और ग्रीनलैंड और डेनमार्क के बारे में कोई भी फैसला लेने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ ग्रीनलैंड और डेनमार्क के पास है.
क्या करने जा रहे हैं ट्रंप?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने ग्रीनलैंड के लोगों को एकमुश्त पेमेंट देने पर चर्चा की है, ताकि उन्हें डेनमार्क से अलग होने और अमेरिका के साथ ज्यादा जुड़ाव रखने के लिए मनाया जा सके.
मामले से जुड़े दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि बातचीत के दौरान डेनमार्क में हर व्यक्ति को 10 हजार से लेकर एक लाख डॉलर तक का कैश देने का जिक्र किया गया था. हालांकि, अब तक कोई फाइनल प्रस्ताव तैयार नहीं हुआ है.
अभी ये सिर्फ शुरुआती बातचीत ही है और पेमेंट की शर्तें और तरीके अभी तय नहीं हुए हैं। हालांकि, माना जा रहा है कि ग्रीनलैंड के 57,000 लोगों को सीधे कैश देने का एक ठोस प्रस्ताव है, जिसे सामने रखा गया है.
ट्रंप बोले- ग्रीनलैंड पर अमेरिका का हक होना चाहिए
इससे पहले गुरुवार को द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि मौजूदा संधियों पर निर्भर रहने के बजाय अमेरिका को ग्रीनलैंड का पूरा मालिका हक हासिल करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय कानून की जरूरत नहीं है और ये कानून उनकी शक्तियों को कम नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रपति के तौर पर उनकी शक्तियों पर रोक सिर्फ उनकी नैतिकता ही लगा सकती है.
उन्होंने यह साफ कर दिया कि ग्रीनलैंड पर पूरी तरह से मालिकाना हक होना चाहिए. लीज या किसी भी तरह की संधि उनके मकसद को पूरा करने में काम नहीं आएगी.
अमेरिका के पास पहले से ही 1951 का एक सैन्य समझौता है जो उसे ग्रीनलैंड में मिलिट्री सुविधाएं स्थापित करने के व्यापक अधिकार देता है, जिसके लिए उनकी सहमति जरूरी है.
ग्रीनलैंड ने खारिज किया ट्रंप का प्लान
कैश पेमेंट के अमेरिकी आइडिया को ग्रीनलैंड ने खुले तौर पर खारिज कर दिया है. ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने कहा कि इस इलाके का भविष्य विदेश से तय नहीं किया जा सकता.
ट्रंप की ओर से ग्रीनलैंड को कब्जाने की बात दोहराने पर नीलसन ने कहा, 'बहुत हो गया, अब विलय के बारे में और कल्पना नहीं.' इससे पहले ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे वाले प्लान पर भी यूरोपीय नेताओं ने आपत्ति जताई थी. डेनमार्क और अमेरिका, दोनों ही NATO के सदस्य हैं. यूरोपीय नेताओं का कहना था कि इससे NATO का कोई मतलब नहीं रह जाएगा.
डेनमार्क-ग्रीनलैंड भी ट्रंप को मनाने में जुटे
इस बीच गुरुवार को डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रतिनिधियों ने व्हाइट हाउस के अधिकारियों से मुलाकात की, ताकि ट्रंप को मनाया जा सके. अमेरिका में डेनमार्क के राजदूत जेस्पर मोलर सोरेनसेन और ग्रीनलैंड के प्रतिनिधि जैकब इस्बोसथसेन ने व्हाइट हाउस नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अधिकारियों से मुलाकात की.
दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने इस हफ्ते अमेरिकी सांसदों के साथ कई बैठकें भी की हैं, ताकि ट्रंप को अपनी धमकी से पीछे हटने के लिए मनाने में मदद मिल सके. इसी बीच यह भी खबर है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले हफ्ते डेनमार्क के अधिकारियों से मिल सकते हैं.
वहीं, व्हाइट हाउस ने ग्रीनलैंड में सैन्य दखल की संभावनाओं को भी खारिज नहीं किया है. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि बातचीत जारी रहने के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति के पास अमेरिकी सेना का इस्तेमाल करना 'हमेशा एक विकल्प' है.
aajtak.in