श्रीलंका में कोरोना से मरने वालों का दाह संस्कार जरूरी, मुस्लिम भड़के

श्रीलंका ने कोरोना वायरस से होने वाली मौतों के बाद शवों को दफनाने की जगह उनका दाह-संस्कार अनिवार्य करने पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. कोविड 19 से श्रीलंका में अब तक कई लोगों की मौत हुई है, जिनमें तीन मुसलमान हैं.

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श्रीलंका ने कोरोना वायरस से होने वाली मौतों का दाह-संस्कार किया अनिवार्य (File Photo) श्रीलंका ने कोरोना वायरस से होने वाली मौतों का दाह-संस्कार किया अनिवार्य (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 1:29 PM IST

  • श्रीलंका में कोरोना वायरस से मौत
  • मुस्लिम शव जलाने पर हुआ विवाद

श्रीलंका ने कोरोना वायरस से होने वाली मौतों के बाद शवों को दफनाने की जगह उनका दाह-संस्कार अनिवार्य कर दिया है. श्रीलंकाई सरकार के इस फैसला का वहां के मुस्लिम समुदाय सहित कई मानवाधिकार संगठन विरोध कर रहे हैं. मुसलमानों का कहना है कि शवों को जलाना उनकी इस्लामिक परंपरा के खिलाफ है. यहां अभी तक कोरोना वायरस से कई लोगों की मौत हुई है, जिनमें तीन मुसलमान हैं.

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श्रीलंका की स्थानीय मीडिया के अनुसार उनके परिजनों के विरोध के बावजूद इन तीनों के शवों का अधिकारियों ने दाह-संस्कार कर दिया. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में कोरोना से होने वाली मौतों या कोरोना संदिग्धों की मौत का दाह संस्कार किया जाएगा. सरकार के इस फैसले की मानवाधिकार संगठनों ने भी आलोचना की है.

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एमनेस्टी के साउथ एशिया के डायरेक्टर बिराज पटनाइक ने कहा कि इन मुश्किल हालातों में समुदायों को बांटने की जगह साथ लाने की कोशिश होनी चाहिए. गौरतलब है कि डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि कोरोना वायरस से मरने वालों को दफनाया या जलाया जा सकता है.

कोरोना वायरस के संक्रमण से दुनिया के अधिकतर देश जूझ रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने का सबसे कारगर तरीका है कि लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें. कोरोना वायरस का संक्रमण लोगों में ना फैले इसलिए शवों का दाह-संस्कार किया जा रहा है.

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