लॉकडाउन में लोगों की लोकेशन ऐसे ट्रैक कर रहा है गूगल, देखिए क्या बदला दुनिया भर में

दुनिया भर के देशों में कोरोना वायरस के खतरे और पाबंदियों के चलते लोगों की आवाजाही कितनी कम हुई है, इस पर गूगल ने डेटा का सेट जारी किया है. इसमें बताया गया है लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी पाबंदियों की वजह से पार्क, ट्रांजिट स्टेशन्स, रिटेल स्टोर्स, दवा की दुकानों, दफ्तरों में लोगों के आने पर कितना असर पड़ा है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

aajtak.in

  • सिंगापुर,
  • 06 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 3:51 PM IST

  • स्पेन, इटली में आवाजाही में रिकॉर्ड गिरावट
  • भारत में भी कम, यूएस में सबसे कम असर
दुनिया भर के देशों में कोरोना वायरस के खतरे और पाबंदियों के चलते लोगों की आवाजाही (मूवमेंट) कितनी कम हुई है, इस पर गूगल ने डेटा का सेट जारी किया है. इसमें बताया गया है लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी पाबंदियों की वजह से पार्क, ट्रांजिट स्टेशन्स, रिटेल स्टोर्स, दवा की दुकानों, दफ्तरों में लोगों के आने पर कितना असर पड़ा है.

आजतक ने 16 फरवरी से 29 मार्च 2020 तक Community Mobility Reports चार्ट का विश्लेषण किया. इसमें भौगोलिक स्थिति के मुताबिक मूवमेंट ट्रेंड दिखाए गए हैं.

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DATA AT HAND

शुरुआती मोबिलिटी रिपोर्ट्स के मुताबिक नीचे का ग्राफ तमाम देशों में आवाजाही ट्रेंड्स में प्रतिशत के हिसाब से गिरावट दिखाता है.

Figure 1: Part 1 देश देश के हिसाब से मोबिलिटी का विश्लेषण

डेटा साफ तौर पर दिखाता है कि स्पेन और इटली में तमाम जगहो में आवाजाही में सबसे ज्यादा गिरावट आई है. इसकी वजह इन दोनों देशों में संक्रमण की ज्यादा घटनाएं और सख्त लॉकडाउन हो सकती है.

डेटा ये भी दिखाता है कि यूके में और देशों की तुलना में आवाजाही को ज्यादा प्रतिबंधित नहीं किया गया है. यहां सरकार ने हाल में ही गैर आवश्यक सेवाओं के लिए लॉकडाउन का ऐलान किया.

अमेरिका इस वक्त दुनिया में कोरोनावायरस से सबसे ज्यादा संक्रमित लोगों वाला देश है. लेकिन यहां आवाजाही में सबसे कम गिरावट दर्ज की गई है. ऐसा इस वजह से है क्योंकि अमेरिका ने कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई शुरू करने में बहुत धीमी प्रतिक्रिया दी. अमेरिका में घरेलू उड़ानों पर अभी तक पाबंदी नहीं है. यहां कई राज्यों में अभी भी पूरी तरह से लॉकडाउन लागू नहीं किया गया.

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ये संभवत: इसलिए हुआ क्योंकि यहां मार्च के अंत तक सोशल डिस्टेंसिंग के उपायों को नहीं अपनाया गया था. अमेरिका में स्प्रिंग बीच पार्टियां अभी तक आयोजित हो रही हैं. अमेरिका में एक राज्य से दूसरे राज्य में लोगों के आनेजाने पर कोई पाबंदी नहीं होने की वजह से यहां कई क्षेत्रों में संक्रमण तेजी से फैला.

Figure 2: Part 2 देश देश के हिसाब से मोबिलिटी का विश्लेषण (नोट- दक्षिण कोरिया इकलौता देश है जहां कुछ कैटेगरी में आवाजाही में सकारात्मक वृद्धि हुई)

दक्षिण कोरिया, और देशों की तुलना में अलग नजर आ रहा है. यहां कभी पूर्ण लॉकडाउन नहीं किया गया. दक्षिण कोरिया ने स्थिति को काफी अलग तरीके से हैंडल किया. यहां टेस्टिंग पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया. यहां लोगों को कलेक्शन सेंटर्स पर टेस्टिंग के लिए अपने स्वैब देने को कहा गया.

दक्षिण कोरिया की इस नीति का असर यहां सार्वजनिक जगहों पर आवाजाही में बढ़ोतरी से साफ झलकता है. इस मॉडल से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है.

भारत, में लॉकडाउन जारी है. यहां सरकार की ओर से किए गए उपायों की वजह से आवाजाही (मोबिलिटी) में खासी गिरावट देखी गई. ये डेटा मार्च 29 तक का है, इसके बाद के दिनों में गिरावट का प्रतिशत और गिरा होगा.

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Figure 3: गूगल की ओर से जारी भारत में आवाजाही का डेटा

Figure 4: फोकस में देशों की रिहाइशी मोबिलिटी

रिहाइशी मोबिलिटी से पता चलता है कि घरों में कितने लोग रह रहे हैं. स्पेन, इटली और भारत में रिहाइशी मोबिलिटी में 20% से ज्यादा का उछाल आया है. स्पेन और इटली एक महीने से कर्व को मोड़ने के लिए तमाम हाथ पैर मार रहे हैं. हैरानी की बात है कि भारत में लॉकडाउन हाल में ही एलान करने के बावजूद यहां रिहाइशी मोबिलिटी का आंकड़ा ऊंचा है.

शायद इसकी वजह ये है कि भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर काफी प्रो- एक्टिव था और उसने पूर्ण लॉकडाउन से पहले ही कर्मचारियों को ‘वर्क फ्राम होम’ देना शुरू कर दिया था.

नीचे गूगल की ओर से दिए डेटा को दर्शाया गया है. सारे नंबर प्रतिशत में हैं. लाल रंग मोबिलिटी में गिरावट और हरा रंग मोबिलिटी में बढ़ोतरी दिखाता है.

Table 1: फोकस वाले देशों के मोबिलिटी आंकड़े

Table 2: कैटेगरी का विवरण

लॉकडाउन की प्रभाविता

उपरोक्त डेटा के आधार पर देशों में मोबिलिटी में गिरावट के संदर्भ में हम हम ‘लॉकडाउन प्रभाविता स्कोर’ तैयार करने की कोशिश करते हैं.

नोट- ये मॉडल संबंधित देशों में लॉकडाउन के उपायों की प्रभाविता और उनके अनुपालन का स्तर मापने के लिए तैयार किया गया.

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मेथेडोलॉजी

विभिन्न केटेगरी में मोबिलिटी को दो ग्रुप में बांटा गया है- आवश्यक और अनावश्यक मोबिलिटी

Table 3: मोबिलिटी की बकेटिंग कैटेगरी

डेटा दिखाता है लॉकडाउन तभी सफल होते है जब किसी जगह की अनावश्यक मोबिलिटी घटती है.

सारी आवश्यक सेवाओं का उपलब्ध रहना जारी रहता है. इनसे जुड़ी मोबिलिटी या आवाजाही में कोई बड़ी गिरावट नहीं आती.

इसलिए हमने आवश्यक और अनावश्यक मोबिलिटी के संदर्भ में देशों के अलग अलग स्कोर जानने के लिए व्हेटेड एवरेज मॉडल का इस्तेमाल किया.

अगर हम मान लें कि अनावश्यक मोबिलिटी में गिरावट आवश्यक मोबिलिटी में गिरावट से दुगनी महत्वपूर्ण है तो इसी पैमाने का इस्तेमाल करके समान प्रवृत्ति के फैक्टर को भी गुणांक में मापा जा सकता है.

गणना

(A) अनावश्यक मोबिलिटी स्कोर-: 2 * [रिटेल और रीक्रिएशन मोबिलिटी + पार्क्स मोबिलिटी + वर्कप्लेसेस मोबिलिटी + (ट्रांजिट मोबिलिटी/2)]

(B) आवश्यक मोबिलिटी स्कोर- [ग्रोसेरी और फार्मेसी मोबिलिटी + (ट्रांजिट मोबिलिटी/2)]

·नोट कीजिए कि “ट्रांजिट स्टेशन्स” को दोनों बकेट्स में रखा गया है क्योंकि ये फैक्टर आवश्यक और अनावश्यक यात्राओं, दोनों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. रिहाइशी मोबिलिटी को भी आगे की स्थिति में फैक्टर के तौर पर लिया जाएगा.

·अनावश्यक मोबिलिटी के लिए, दो से गुणा करना व्हेटेट एवरेज फैक्टर है.

Table 4: आवश्यक और अनावश्यक मोबिलिटी स्कोर्स

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अनावश्यक मोबिलिटी स्कोर्स पर व्हेटेड एवरेज फैक्टर को लागू करने के बाद हम ‘लॉकडाउन प्रभाविता स्कोर’ को व्हेटेड एवरेज और रिहाइशी मोबिलिटी के मूल्यों का इस्तेमाल कर निकाल सकते हैं.

(C) लॉकडाउन प्रभाविता स्कोर: [((A) अनावश्यक मोबिलिटी स्कोर + (B) आवश्यक मोबिलिटी स्कोर) / 3] * रिहाइशी मोबिलिटी मूल्य

(व्हेटेड एवरेज के चलते स्कोर्स को 3 से भाग)

Table 5: लॉकडाउन प्रभाविता स्कोर्स

उपरोक्त गणऩाओं से हमें फोकस में रखे गए देशों के लॉकडाउन प्रभाविता स्कोर्स निकाल सकते हैं. नोट कीजिए कि जितना स्कोर नेगेटिव होगा, वहां लॉकडाउन उतना ही सख्त होगा यानि मोबिलिटी बहुत कम होगी.

दक्षिण कोरिया में मूल्य पॉजिटिव दिख रहे हैं इसके मायने हैं कि वहां बहुत कम लॉकडाउन अमल में लाए गए हैं.

स्कोर दिखाते हैं कि स्पेन और इटली में दूसरे देशों की तुलना में मोबिलिटी में कहीं ज्यादा गिरावट है. इससे पता चलता है कि ये दोनों देश बीते एक महीने से कितने ज्यादा प्रभावित हुए हैं.

हम जल्दी ही इन दोनों देशों जैसे ही आंकड़े यूके, फ्रांस, अमेरिका और शायद भारत से भी आने वाले हफ्तों में देखेंगे.

लॉकडाउन प्रभाविता के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल

ऊपर का विश्लेषण हमें वास्तव में बताता है कि कैसे

Covid-19 उपायों की वजह से लोगों की मोबिलिटी में भारी गिरावट आई. हमें ये भी जेहन में रखना होगा कि डेटा स्मार्टफोन लोकेशन ट्रैकिंग और चेक-इन्स से लिए गए हैं.

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किसी भी देश में स्मार्टफोन की पहुंच 100% तक नहीं है, इसलिए ये किसी देश में रहने वाले सभी लोगों की तस्वीर पेश नहीं करता.

एनालिटिक मॉडल को और मजबूत करने के लिए हमने स्मार्टफोन पहुंच फैक्टर को भी जोड़ा

नोट: स्मार्टफोन पहुंच का ये डेटा उपलब्ध है: (source)

Table 6: स्मार्टफोन पहुंच

फोकस वाले देशों में हम देख सकते हैं कि भारत में स्मार्टफोन पहुंच सबसे कम है. इसके मायने हैं कि हमने भारत का लॉकडाउन प्रभाविता स्कोर देश की मोटे तौर पर सिर्फ एक चौथाई आबादी के हिसाब से ही निकाला.

इसलिए स्कोर्स को सामान्य करने और तुलना करने के लिए हम स्मार्टफोन पहुंच फैक्टर को उपरोक्त गणना किए गए स्कोर्स के साथ जोड़ेंगे.

(D) कुल लॉकडाउन प्रभाविता स्कोर: (C) लॉकडाउन प्रभाविता स्कोर * (स्मार्टफोन पहुंच फैक्टर/100)

Table 7: कुल लॉकडाउन प्रभाविता स्कोर्स

·*नोट: जितने नेगेटिव स्कोर्स होंगे, उतनी लॉकडाउन संबंधित मोबिलिटी कम होगी, यानि लॉकडाउन प्रभाविता उतनी ही ऊंची होगी.

अंतिम स्कोर्स साफ तौर पर दिखाते हैं कि स्पेन और इटली में मोबिलिटी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. यानि वहां लॉकडाउन लोगों की आवाजाही को नियंत्रित रखन में सबसे कारगर रहा और इससे लोगों से लोगों में संक्रमण घटा.

वहीं, दक्षिण कोरिया का मॉडल अन्य देशों की तुलना में बिना लॉकडाउन किए कर्व को सीधा रखने में सबसे बेहतर रहा.

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Figure 5: टोटल लॉकडाउन प्रभाविता चार्ट

विश्लेषण के निष्कर्ष

डेटा साफ तौर पर दिखाता है:

1. डेटा एकत्र किए जाने के समय स्पेन और इटली सबसे अधिक प्रभावित देश थे और उनके लॉकडाउन स्कोर्स साफ तौर पर दिखाते हैं कि यहां लोगों की मोबिलिटी पर बहुत बड़े पैमाने पर असर पड़ा.

2. भारत ने केसों की संख्या बढ़ने से पहले ही मोबिलिटी घटाने के लिए कदम उठाए. ये अच्छी बात है. लेकिन हमारे पास सिर्फ एक चौथाई आबादी का ही डेटा मौजूद है.

3. अमेरिका केसों की संख्या के हिसाब से दुनिया का सबसे प्रभावित देश है और हम जान सकते हैं, क्यों? अमेरिका ने अनावश्यक यात्रा में कटौती जैसे सख्त कदम नहीं उठाए इसलिए वहां तेज समुदाय संक्रमण फैला.

4. यूके जल्दी ही इटली, स्पेन और फ्रांस की तरह केसों की ऊंची संख्या का सामना करना पड़ सकता है. हम अगले हफ्ते गूगल का ताजा डेटा आने के बाद वहां भी ऊंचा लॉकडाउन स्कोर देख सकते हैं.

5. दक्षिण कोरिया एकमात्र देश है जिसने सख्त लॉकडाउन लागू किए बिना ही कर्व को सीधा रखने में सफलता पाई. वहां लोगों के स्वेच्छा से टेस्टिंग फैसिलिटीज में जाकर टेस्ट कराने से भी मोबिलिटी ज्यादा देखी गई.

हमारे पास उन लोगों का डेटा नहीं है, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है. ये डेटा हमें जानने में मदद करता कि भारत जैसे देश में उनकी मोबिलिटी पर क्या असर पड़ा. इस कैटेगरी मे अधिकतर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले और बुजुर्ग लोग शामिल हो सकते हैं.

(लेखक सिंगापुर स्थित ओपन-सोर्स इंटेलीजेंस एनालिस्ट हैं.)

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