कांगो में माइनिंग के दौरान बड़ा हादसा, कोल्टन खदान धंसने से 200 से ज्यादा लोगों की मौत

पूर्वी कांगो की रुबाया कोल्टन खदान में हुए भूस्खलन में 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई. बारिश के कारण कमजोर जमीन धंस गई. खदान विद्रोही समूह के नियंत्रण में है और वैश्विक टेक उद्योग के लिए अहम खनिज का बड़ा स्रोत मानी जाती है.

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कांगो की रुबाया कोल्टन खदान में भीषण हादसा हुआ है (File AP Photo) कांगो की रुबाया कोल्टन खदान में भीषण हादसा हुआ है (File AP Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:03 AM IST

पूर्वी कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में स्थित रुबाया कोल्टन खदान में हुए भीषण भूस्खलन ने पूरे इलाके को दहला दिया है. इस दर्दनाक हादसे में अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि की गई है. स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, यह दुर्घटना उस समय हुई जब सैकड़ों लोग खदान के भीतर काम कर रहे थे.

प्रांत में विद्रोही समूह द्वारा नियुक्त गवर्नर के प्रवक्ता लुबुम्बा काम्बेरे मुइसा ने बताया कि भूस्खलन के समय खदान में मजदूरों के अलावा बच्चे और स्थानीय बाजार में काम करने वाली महिलाएं भी मौजूद थीं. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को गंभीर हालत में मलबे से बाहर निकाला गया, जिनमें से करीब 20 घायलों का इलाज स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में चल रहा है.

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एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम तक मृतकों की संख्या कम से कम 227 तक पहुंच चुकी थी, हालांकि वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है. राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन लगातार बारिश और अस्थिर जमीन के कारण अभियान में भारी मुश्किलें आ रही हैं.

कोल्टन मानी जाती है अहम धातु

प्रशासन ने इस हादसे के लिए बारिश के मौसम में कमजोर हो चुकी जमीन को जिम्मेदार ठहराया है. स्थानीय लोग वर्षों से बेहद खतरनाक हालात में, हाथों से खुदाई कर रोज़ाना कुछ डॉलर कमाने के लिए इस खदान में काम करते हैं. सुरक्षा मानकों की कमी और अवैध खनन लंबे समय से इस क्षेत्र की बड़ी समस्या रही है.

यह भी पढ़ें: ओडिशा:अवैध खदान में जिंदा दफन हुआ मजदूर... मलकानगिरी हादसे में दो की मौत, जिंदगी-मौत से जूझ रहा एक शख्स

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रुबाया खदान वैश्विक स्तर पर बेहद अहम मानी जाती है. यहां से दुनिया के करीब 15 प्रतिशत कोल्टन का उत्पादन होता है. कोल्टन से टैंटलम नामक धातु निकाली जाती है, जिसका इस्तेमाल मोबाइल फोन, कंप्यूटर, एयरोस्पेस उपकरण और गैस टर्बाइन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में होता है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2024 से यह खदान AFC/M23 विद्रोही समूह के नियंत्रण में है. यूएन का आरोप है कि विद्रोही इस खदान की संपदा का इस्तेमाल अपने सशस्त्र अभियान को वित्तपोषित करने के लिए कर रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस गतिविधि को पड़ोसी देश रवांडा का समर्थन प्राप्त है, हालांकि किगाली सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है.

 (इनपुट- रॉयटर्स)

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