OBOR के मंच पर चीन के सबसे अमीर शख्स ने की भारत की तरीफ

चीन की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड परियोजना के तहत पीओके से गुजरने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा के चलते भारत ने इस समिट का बहिष्कार किया था.

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वांडा ग्रुप के प्रमुख वांग जिआनलिन वांडा ग्रुप के प्रमुख वांग जिआनलिन

राम कृष्ण

  • बीजिंग,
  • 17 मई 2017,
  • अपडेटेड 11:56 AM IST

चीन के सबसे अमीर शख्स और वांडा ग्रुप के प्रमुख वांग जिआनलिन ने बीजिंग में 14 से 15 मई तक आयोजित पहली वन बेल्ट वन रोड (OBOR) समिट के मंच से भारत की जमकर तारीफ की है. साथ ही भारत के लिए अपने ग्रुप की योजनाओं को उजागर किया है. खास बात यह है कि वांडा ग्रुप के अरबपति जिआनलिन ने यह सराहना भारत की गैर मौजूदगी में की है.

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चीन की महत्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड परियोजना के तहत पीओके से गुजरने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा के चलते भारत ने इस समिट का बहिष्कार किया था. इस समिट में दुनिया के 29 राष्ट्राध्यक्षों समेत 130 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी इसमें शिरकत की थी. ऐसे में भारत की गैरहाजिरी में चीन के वांडा ग्रुप के अरबपति जिआनलिन की सराहना काफी अहम मानी जा रही है.


चीन का सबसे अमीर घराना है वांडा ग्रुप
वांग चीन के प्रभावशाली कंगलोमेरेट के प्रमुख और दिग्गज कारोबारी हैं. चीन के सबसे अमीर घराना वांडा ग्रुप का रियल एस्टेट, डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और फिल्म इंडट्री में भारी भरकम निवेश है. वन बेल्ट वन रोड समिट में अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया तक के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन भारत ने इसका बहिष्कार किया था. इस पर कुछ चीनी अधिकारियों का यह कहना था कि समिट में गैरहाजिरी से भारत अलग-थलग पड़ सकता है. हालांकि भारत का मानना है कि उसको देश के अंदर चीनी पहल को बढ़ावा देने की जरूरत नहीं है. चीनी कंपनियों के भारत में निवेश से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला.

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भारत में निवेश की योजना को भाषण में किया शामिल
OBOR के तहत पर्यटन परियोजना पर अपने भाषण में वांग ने भारत के लिए वांडा ग्रुप की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को भी शामिल किया. हालांकि में उपस्थित नहीं रहा. वांग ने वांडा ग्रुप की ओर से हरियाणा में इंडस्ट्रियल न्यू सिटी बनाने की योजना का भी जिक्र किया. वहीं, चीन को इस समिट में भारत की कमी खली थी. समिट खत्म होने के बाद चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा था कि भारत कभी भी इस परियोजना में शामिल हो सकता है. उसके लिए इसके दरवाजे खुले रहेंगे.

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