स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक व्यवस्था को लेकर एक बेहद सख्त और चौंकाने वाला आकलन पेश किया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाला वैश्विक नियम-आधारित सिस्टम अब प्रभावी रूप से खत्म हो चुका है और पुरानी व्यवस्था की वापसी संभव नहीं है.
अपने भाषण में कार्नी ने कहा, "मैं सीधे शब्दों में कहूंगा. हम किसी संक्रमण के दौर में नहीं, बल्कि एक गहरे टूटन के दौर में हैं. पुराना वैश्विक ऑर्डर वापस नहीं आने वाला." उनका यह बयान उस मंच से आया, जहां दुनिया के सबसे ताकतवर नेता, उद्योगपति और नीति निर्माता मौजूद थे.
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हालांकि कार्नी ने अमेरिका या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने 'अमेरिकी वर्चस्व' यानी अमेरिकन हेजेमनी को इस बदलाव की मुख्य वजह बताया. उन्होंने कहा कि जिस नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बात की जाती रही है, वह शुरू से ही आंशिक रूप से एक भ्रम थी.
अमेरिकी वर्चस्व को लेकर क्या बोले कार्नी?
कार्नी के मुताबिक, "हम जानते थे कि यह व्यवस्था पूरी तरह निष्पक्ष नहीं थी. ताकतवर देश जब चाहें खुद को नियमों से अलग कर लेते थे. व्यापार नियमों को असमान रूप से लागू किया जाता था. लेकिन यह कहानी उपयोगी थी, क्योंकि खासतौर पर अमेरिकी वर्चस्व ने कई वैश्विक सार्वजनिक सुविधाएं प्रदान कीं. अब यह सौदा काम नहीं करता."
कनाडाई पीएम ने हाल के वर्षों में आए वित्तीय संकट, महामारी, ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक टकरावों का हवाला देते हुए कहा कि अत्यधिक वैश्विक निर्भरता अब एक बड़ा खतरा बन चुकी है. कार्नी ने चेतावनी दी कि बड़ी ताकतें अब आर्थिक एकीकरण को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही हैं.
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टैरिफ को औजार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है- कार्नी
मार्क कार्नी ने कहा, "आज टैरिफ को दबाव बनाने के औजार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. वित्तीय ढांचे को जबरदस्ती के लिए और सप्लाई चेन को कमजोर कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है." उनके मुताबिक, यही बदलाव आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा. कार्नी का यह बयान उस समय आया है, जब अमेरिका, यूरोप और चीन के बीच व्यापारिक और रणनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है.
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