बांग्लादेश: वोटिंग केंद्रों पर मोबाइल बैन से मचा बवाल, जमात के अल्टीमेटम के बाद EC बैकफुट पर

बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव के पहले चुनाव आयोग ने मतदान केंद्रों और उनके 400 गज के दायरे में मोबाइल फोन प्रतिबंधित कर दिया है. विपक्षी दक्षिणपंथी दलों ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है और विरोध प्रदर्शन की धमकी दी है. हालांकि, पत्रकारों और पर्यवेक्षकों को रिपोर्टिंग के लिए छूट दी गई है.

Advertisement
चुनाव आयोग के आदेश से नाराज दक्षिणपंथी दल (Photo: ITG/Graphic by Tanmoy Chakraborty) चुनाव आयोग के आदेश से नाराज दक्षिणपंथी दल (Photo: ITG/Graphic by Tanmoy Chakraborty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:31 PM IST

बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले चुनाव आयोग के एक फैसले ने राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है. चुनाव आयोग ने मतदान दिवस पोलिंग सेंटर के भीतर और उसके 400 गज के दायरे में मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. 

इस आदेश के तहत कोई भी व्यक्ति - चाहे वह मतदाता हो, पोलिंग एजेंट या चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारी, मोबाइल फोन के साथ पोलिंग स्टेशन में प्रवेश नहीं कर सकेगा. केवल प्रिसाइडिंग ऑफिसर, तैनात पुलिस और दो अधिकृत अंसार सदस्य ही इस प्रतिबंध से छूट पाएंगे.

Advertisement

यह कड़ा कदम उन चुनौतियों का सामना करते हुए उठाया गया है, जो चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी हैं. खासतौर पर यह चुनाव प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद हो रहा है, जो राजनीतिक इतिहास में एक बेहद अहम मोड़ माना जा रहा है.

हालांकि दक्षिणपंथी दलों ने चुनाव आयोग के इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है. जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी दलों ने चेतावनी दी है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो वे चुनाव आयोग का घेराव करेंगे. इसी तरह, नेशनल सिटिजन पार्टी ने भी इस फैसले का विरोध जताया है और आदेश वापस न होने की स्थिति में उन्होंने भी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है.

यह भी पढ़ें: BNP बनाम जमात... 18 महीने की उथल-पुथल के बाद चुनाव को तैयार बांग्लादेश

Advertisement

इसी बीच चुनाव आयोग ने पत्रकारों और पर्यवेक्षकों को मतदान केंद्रों के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति दी है ताकि वे रियल टाइम रिपोर्टिंग और निगरानी कर सकें. चुनाव आयुक्त अबुल फजल एमडी सनाउल्लाह ने कहा कि यह छूट पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है.

इस विवाद के बीच राजधानी ढाका में चुनाव प्रचार अपने चरम पर पहुंच गया है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेताओं ने विभिन्न इलाकों में रैलियां कीं. मोबाइल फोन बैन का मुद्दा अब बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा और संवेदनशील सवाल बन चुका है, जिसके परिणाम आगामी चुनाव के प्रक्रिया और निष्पक्षता पर गहरा प्रभाव डालने की संभावना है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement