मादुरो, सद्दाम, गद्दाफी... मूछों के ताव से चिढ़ता रहा अमेरिका, इन नेताओं से रही लंबी अदावत

स्पैनिश भाषा में कड़क मूंछों को "Super Bigote" कहते हैं. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की मशहूर मूंछें एक खास राजनीतिक प्रतीक हैं. वेनेजुएला में एक सीरीज प्रसारित होता है इसका नाम ही है 'सुपर बिगोटे'. कहा जाता है कि इस एनिमेटेड सीरीज का मुख्य किरदार ही मादुरो के किरदार से प्रभावित है. मूंछों वाले इस किरदार का नाम ही अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ जंग छेड़ना है.

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मूंछों वाले नेताओं के साथ लंबे समय तक रही अमेरिका की अदावत. (Photo: ITG) मूंछों वाले नेताओं के साथ लंबे समय तक रही अमेरिका की अदावत. (Photo: ITG)

पन्ना लाल

  • नई दिल्ली,
  • 05 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:37 PM IST

कहा जाता है कि ये मूंछ की लड़ाई है. अमेरिका ने मूंछ का नाम तो नहीं लिया, लेकिन अमेरिकन डीप स्टेट कुछ राष्ट्राध्यक्षों का मूंछों का ताव बर्दाश्त नहीं कर पाया. कड़क मूंछों वाले कुछ ऐसे राष्ट्राध्यक्ष रहे जिनसे अमेरिका की कभी नहीं बनी. अमेरिका का इन राष्ट्राध्य्क्षों/तानाशाहों से कभी तेल को लेकर, कभी डेमोक्रेसी के नाम पर तो कभी हथियारों के नाम पर ठनी. 

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मनोविज्ञान कहता है मूंछें व्यक्तित्व का संकेत देती हैं. आक्रामकता और नेतृत्व का आभामंडल क्रिएट करती हैं. राजनीति में ये छवि गढ़ती हैं. मादुरो, सद्दाम हुसैन, रॉबर्ट मुगाबे, गद्दाफी जैसे नेताओं की मूंछें ठसक और बगावत का संकेत देती हैं. मूंछें न सिर्फ चेहरा, बल्कि शक्ति का दर्पण हैं. 

यूं तो अमेरिकी साम्राज्यवाद और डीप स्टेट का जाल पूरी दुनिया में फैला है और अमेरिकी एजेंसियां इसका इस्तेमाल अपने जरूरतों के अनुसार करती है. लेकिन मादुरो, सद्दाम हुसैन, रॉबर्ट मुगाबे, गद्दाफी जैसे कुछ खास नेता रहे जो अपनी कार्यशैली के अलावा अपने मूंछों के लिए भी चर्चित रहे. 

पिछले अमेरिका ने दशकों से संसाधनों और रणनीतिक हितों के नाम पर तानाशाहों को सत्ता से उखाड़ फेंका है, लेकिन असल में ये घटनाएं उसके वर्चस्व की भूख को दर्शाती हैं. 

निकोलस मादुरो

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स्पैनिश में शानदार या कड़क मूंछों को "Super Bigote" कहते हैं. यानी कि Super Mustache. वेनेजुएला में स्पेनिश बोली जाती है. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की मशहूर मूंछें एक खास राजनीतिक प्रतीक हैं और उनके कार्टून सुपरहीरो ऑल्टर ईगो, "सुपर बिगोटे की प्रेरणा भी हैं.

मादुरो के समर्थकों के लिए उनकी कड़क मूंछें मादुरो के मजदूर वर्ग की जड़ों का प्रतीक मानी जाती हैं, जो आम वेनेजुएलाई के लोगों से जुड़ने का एक तरीका है. 

2019 में जब इक्वाडोर के एक अधिकारी ने उन पर "मूंछें हिलाकर" विरोध प्रदर्शन भड़काने का आरोप लगाया, तो मादुरो ने व्यंग्य करते हुए कहा, "मैं सुपरमैन नहीं हूं. मैं सुपर-बिगोटे हूं. यानी कि मेरे पास कड़क मूंछें हैं.

इसी 'सुपर बिगोटे' शब्द से वेनेजुएला में एक एनिमेटेड सीरीज़ बनी जो सरकारी टीवी पर प्रसारित होती है. इस सीरीज का नाम है 'सुपर बिगोटे'. सुपर बिगोटे यानी कि कड़क मूंछों वाला हीरो. 'सुपर बिगोटे' एक सुपरहीरो है जो "साम्राज्यवाद" और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी विदेशी शक्तियों से लड़ता है. इस सीरीज को सरकार का समर्थन प्राप्त है.

यह भी पढ़ें: शावेज के उत्तराधिकारी मादुरो की विचारधारा क्या है... सत्ता मिली लेकिन आर्थिक मोर्चे पर फेल रहा वेनेजुएला

मादुरो ने एक बार कसम खाई थी कि अगर एक तय समय सीमा तक एक खास सार्वजनिक आवास लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो वह अपनी मूंछें मुंडवा लेंगे. 

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अमेरिका की वेनेजुएला से लंबे समय से नहीं पट रही थी. ह्यूगो चावेज से शुरू हुए राष्ट्रीयकरण ने अमेरिकी कंपनियों जैसे शेवरॉन को बाहर किया, जिसके बाद वाशिंगटन ने प्रतिबंधों की बौछार कर दी. 

अमेरिका हमेशा से वेनेजुएला के तेल को अपने उपनिवेश के संसाधन के रूप में देखते रहे. साल 2025 में सत्ता में आने के बाद ट्रंप का एक अहम एजेंडा मादुरो को सत्ता से हटाना था. ट्रंप ने इस लड़ाई को मुकम्मल करने के लिए मादुरो पर ड्रग्स की तस्करी का आरोप लगाया और आखिरकार उनका चैप्टर एंड कर दिया.

सद्दाम हुसैन 

सद्दाम हुसैन की घनी, काली और स्टालिन-स्टाइल मूंछें उनकी व्यक्तित्व की आइकॉनिक पहचान थीं, जो मर्दानगी, अधिकार और नियंत्रण का प्रतीक बन गईं. मध्य पूर्वी संस्कृति में मूंछें पौरूष, सम्मान और परिपक्वता दर्शाती हैं. इराक में तो इन्हें इतना महत्व दिया जाता है कि "मूंछों पर कसम खाना" सम्मान की बात है. 

सद्दाम हुसैन का मामला अमेरिकी साम्राज्यवाद का क्लासिक उदाहरण है. सद्दाम हुसैन कभी अमेरिका के प्रिय थे. 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान अमेरिका ने सद्दाम को हथियार और समर्थन दिया.लेकिन 1990 में कुवैत पर कब्जे के बाद समीकरण बदल गया. कुवैत का तेल अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण था. 2003 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने 'मास डिस्ट्रक्शन वेपन्स' का झूठा बहाना बनाकर इराक पर हमला किया.

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असल में इराक के विशाल तेल भंडार अमेरिकी कंपनियों जैसे एक्सॉनमोबिल और बीपी के लिए आकर्षण थे. अमेरिका चाहता था कि सद्दाम अमेरिकी नीतियों के आगे झुक जाए, लेकिन सद्दाम हुसैन ने ऐसा नहीं किया. इसके बाद अमेरिका ने इराक पर हमला किया और सद्दाम को पकड़कर इराकी कोर्ट से ही फांसी की सजा दिलवा दी. 

सद्दाम की फांसी ने इराक को अराजकता में धकेल दिया, लेकिन अमेरिका को सस्ता तेल और मध्य पूर्व में प्रभुत्व मिला. आक्रमण के बाद इराकी तेल क्षेत्रों को अमेरिकी-ब्रिटिश कंपनियों को सौंप दिया गया, जबकि 'मास डिस्ट्रक्शन वेपन्स' के दावे झूठे साबित हुए. लाखों इराकी मारे गए।. पेंटागन के दस्तावेज बताते हैं कि इराक के तेल क्षेत्र अमेरिकी कंपनियों के हाथ लगे. यह साम्राज्यवाद का क्लासिक उदाहरण है. 

मुअम्मर गद्दाफी

मुअम्मर गद्दाफी ने लीबिया पर लंबे समय तक शासन किया. वह क्रांतिकारी से तानाशाह बने. गद्दाफी 1969 में युवा कर्नल के रूप में तख्तापलट कर सत्ता आए. उनकी मूंछें हलकी थी. लेकिन ये उनके विद्रोही व्यक्तित्व की पहचान थीं. उन्होंने अपने शासन को पश्चिमी साम्राज्यवाद के खिलाफ जंग के प्रतीक के रूप में स्थापित किया. 

बेडौइन शैली के कपड़ों में घूमते गद्दाफी अपने लग्जरी लाइफ स्टाइल के लिए प्रसिद्ध थे. महिला बॉडीगार्डों से घिरे रहने वाले गद्दाफी ने तेल से लीबिया को विकसित किया. उनकी मूंछें उनकी सत्ता की ठसक और पतन का साक्षी बनीं. 

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1970 के दशक में गद्दाफी ने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर अमेरिकी कंपनियों को बाहर किया. ये कदम वाशिंगटन को नागवार गुजरा. 
2011 में अरब स्प्रिंग के बहाने अमेरिका और नाटो ने लीबिया पर बमबारी की. इसके बाद एक अराजकता की स्थिति में गद्दाफी को मार दिया गया.  

गद्दाफी की मौत ने लीबिया को 'फेल्ड स्टेट' बना दिया, लेकिन अमेरिका को तेल की आपूर्ति सुनिश्चित हुई. आज लीबिया अराजकता का शिकार है.

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