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भारत को लगी ठोकर, अब सऊदी अरब का गुरूर तोड़ने का बनाया प्लान!

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 9:56 PM IST
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भारत और सऊदी अरब के बीच कच्चे तेल को लेकर कश्मकश जारी है. भारत ने मिडिल ईस्ट पर कच्चे तेल की अपनी निर्भरता को कम करने के मकसद से देश में तेल उत्पादन करने वालीं इकाइयों से उत्पादन बढ़ाने को कहा है. भारत के इस कदम को तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC+ के लिए संदेश माना जा रहा है कि तेल उत्पादन को लेकर उन्हें तौर-तरीका बदलना होगा. (फाइल फोटो-Getty Images)

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तेल उत्पादक और निर्यातक देशों ने जब अप्रैल में भी उत्पादन में कटौती जारी रखी तो भारत ने सख्त तेवर अख्तियार कर लिए. विगत दिनों केंद्रीय तेल और गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सऊदी अरब के तेल मंत्री अब्दुल अजीज बिन सलमान अल सऊद के बयान पर आपत्ति जाहिर की थी. भारत ने कच्चे तेल के दाम को कम करने की अपील की थी, लेकिन अब्दुल अजीज बिन सलमान अल सऊद का कहना था कि भारत अपने उस स्ट्रैटेजिक तेल रिजर्व का इस्तेमाल करे, जो उसने पिछले साल तेल के गिरती कीमतों के दौरान खरीद कर जमा किया है. (फाइल फोटो-PTI)

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समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि भारत की तेल उत्पादक इकाइयां सऊदी अरब से ईंधन के निर्यात में एक चौथाई कटौती की योजना बना रही हैं. भारत की योजना हर महीने औसतन 10.8 मिलियन बैरल तेल आयात करने की योजना है जबकि यह पहले 14.7-14.8 मिलियन बैरल था.(फाइल फोटो-Getty Images)

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केंद्रीय तेल और गैस मंत्रालय के सचिव तरुण कपूर ने बताया कि भारत ने राज्यों में स्थित तेल उत्पादक रिफाइनरियों से तेल उत्पादकों के साथ संयुक्त रूप से बातचीत करने के लिए कहा है ताकि बेहतर डील की जा सके. हालांकि, उन्होंने सऊदी अरब से आयात में कटौती की योजना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. तरुण कपूर ने कहा, 'भारत एक बड़ा बाजार है इसलिए तेल विक्रेताओं को हमारे देश की मांग के साथ-साथ दीर्घकालिक संबंधों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सचेत रहना होगा.' वहीं सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको और सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. (फाइल फोटो-Getty Images)

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बहरहाल, भारत की उबरती अर्थव्यवस्था के लिए तेल की बढ़ी कीमतों को खतरे के रूप में देखने वाले धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि वह OPEC+ के फैसले से निराश हुए. भारत में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और पिछले साल कई तरह के टैक्स लादे जाने की वजह से तेल के दामों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई. हालांकि, ओपेक ने अब तेल उत्पादन बढ़ाने की बात कही है लेकिन भारत ने जब अनुरोध किया था तो ओपेक देशों ने इसे नहीं माना था.  (फाइल फोटो-PTI)

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इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने भारत की खपत के दोगुना होने का अनुमान जाहिर किया है और कहा है कि भारत के तेल आयात में 2019 के मुकाबले 2040 तक इसमें तकरीबन तीन गुना 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक वृद्धि हो सकती है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तेल मंत्रालय एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ओपेक की कटौती से लोगों के मन में अनिश्चितता और डर पैदा हुआ है. इसने रिफाइनरियों के लिए खरीद और मूल्य जोखिम की योजना बनाने को मुश्किल बना दिया है. (फाइल फोटो-Getty Images)

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दिलचस्प बात यह भी है कि इस अंतर को भरने के लिए सऊदी अरब के इस रुख ने अमेरिका, अफ्रीका, रूस और अन्य जगहों की कंपनियों के लिए अवसर मुहैया कराये हैं. अगर भारत अपनी योजना में कामयाब होता है तो यह दुनिया के अन्य देशों के लिए भी मिसाल बनेगा. यह जाहिर सी बात है कि खरीदार हमेशा अधिक किफायती विकल्प की तलाश में रहते हैं और अक्षय ऊर्जा तेजी से सामान्य होती जा रही है. लिहाजा, सऊदी अरब जैसे बड़े उत्पादकों का भू राजनीति प्रभाव की दिशा को बदल सकता है और उनके कारोबार के तौर-तरीके को प्रभावित कर सकता है. (फाइल फोटो-Getty Images)

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भारत ने हाल के वर्षों में मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल के निर्यात में कटौती की है. यह सही बात है कि किसी भी अन्य प्रमुख खरीदार से अधिक पिछले सात वर्षों में भारत की तेल मांग 25% बढ़ी है. भारत ने दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और उपभोक्ता के रूप में जापान को पीछे छोड़ दिया है. लेकिन यह भी सच है कि भारत ने 2016 में 64% से अधिक आयात को लेकर मध्य पूर्व पर अपनी निर्भरता को 2019 में 60% तक कम किया है.  (फाइल फोटो)

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हालांकि, यह ट्रेंड 2020 में उलट गया, जब कोरोना महामारी के दौरान ईंधन की मांग बढ़ गई और भारतीय रिफाइनरियों को शर्तों के तहत मध्य पूर्व तेल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा. लेकिन अधिकारी का कहना था कि तेल उत्पादन बढ़ाने के धर्मेंद्र प्रधान के आह्वान के बाद भारत का रुख बदल गया है.  (फाइल फोटो-Getty Images)

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अब भारत की रिफाइनरियां तेल सप्लाई के नए रास्ते के बारे में विचार कर रही हैं. इस मकसद को पूरा करने के लिए प्रसंस्करण के लिहाज से महंगी भारतीय रिफाइनरियां खुद को अपग्रेड कर रही हैं. इससे आयातकों को दीर्घकालीन विकल्प की तलाश के लिए प्रोत्साहित किया है. यही वजह है कि एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड ने इस महीने गुयाना से देश का पहला कार्गो खरीदा, और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड ने पहली बार ब्राजील के ट्युपी क्रूड का आयात किया. (फाइल फोटो-Getty Images)

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पिछले कुछ वर्षों में, रिफाइनरियों ने संयुक्त रूप से तमाम पाबंदियों की मार झेल रहे ईरान के साथ तेल सौदों पर बातचीत की है, जिसने यहां मुफ्त शिपिंग और मूल्य छूट की पेशकश की, और अब अन्य उत्पादकों के साथ भी ऐसा करने की योजना है (फाइल फोटो-Getty Images)

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सऊदी अरब के साथ तनाव शुरू होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने संयुक्त अरब अमीरात के राज्य मंत्री और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सुल्तान अहमद अल जाबेर और अमेरिका के ऊर्जा मंत्री जेनिफर ग्राहन्होम ऊर्जा भागीदारी को मजबूत करने को लेकर बैठकें की हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में कहा था कि अफ्रीकी देश भारत के तेल विविधीकरण में केंद्रीय भूमिका निभा सकते हैं. भारत गुयाना के साथ दीर्घकालिक तेल आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर करने और रूस से आयात बढ़ाने के विकल्प तलाश रहा है. (फोटो-PTI)

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