वहीं, पाकिस्तान की ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (ओजीआरए) पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में करीब 57 फीसदी की कटौती करने की योजना बना रही है. एक अधिकारी के मुताबिक, डीजल की कीमतें प्रति लीटर 33.94 और पेट्रोल की कीमतें प्रति लीटर 20.68 रुपये तक घटाई जा सकती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से परामर्श लेने के बाद नियामक संस्था इस मामले पर फैसला करेगी. हालांकि, पाकिस्तान की सरकार चाहती है कि पेट्रोल-डीजल की ओजीआरए के प्रस्ताव की आधी कटौती ही की जाए.
पिछले महीने अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में 52 फीसदी की गिरावट आई थी लेकिन सरकार ने देश में कीमतों में सिर्फ 12-13 फीसदी की ही कमी की थी. आर्थिक संकट से जूझ रही पाकिस्तान सरकार इस कदम के जरिए राजस्व को हो रहे नुकसान की भरपाई करना चाह रही थी. पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल की पाकिस्तान में सबसे ज्यादा खपत होती है और दोनों ही सरकारी राजस्व के मुख्य स्रोत हैं. हालांकि, कोरोना वायरस की महामारी के चलते पेट्रोलियम की खपत रिकॉर्ड स्तर पर घटने से सरकारी राजस्व का भी काफी नुकसान हो रहा है.
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 5 अरब डॉलर का पैकेज लिया है जिसके लिए संस्था ने सरकार के सामने राजस्व बढ़ोतरी की भी शर्त रखी है. इन शर्तों को पूरा नहीं करने पर पाकिस्तान को कर्ज मिलने में दिक्कतें हो सकती हैं. पाकिस्तान की सरकार ने सरकारी खजाने की हालत सुधारने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों पर लगने वाले जीएसटी (जनरल्स सेल्स टैक्स) को पहले ही 17 फीसदी कर दिया गया था. जबकि जनवरी 2019 तक पाकिस्तान की सरकार डीजल पर 0.5 फीसदी की दर से, केरोसीन पर 2 फीसदी, पेट्रोल पर 8 फीसदी और डीजल पर 13 फीसदी तक का टैक्स ही वसूल रही थी.