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वैज्ञानिकों ने तैयार किया नया सिस्टम, मंगल ग्रह पर ऑक्सीजन और ईंधन की समस्या होगी खत्म!

aajtak.in
  • 01 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 5:07 PM IST
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मंगल ग्रह पर पानी तो है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा बर्फ के रूप में जमा हुआ है और बाकी पानी में नमक की मात्रा है. इसकी वजह से 2033 में मंगल पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स के लिए यहां का पानी उपयोग करना मुश्किल भरा होगा. लेकिन अब वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने एक सिस्टम तैयार किया है जिससे मंगल ग्रह के खारे पानी को ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के रूप में बदला जा सकता है. 

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inverse.com की रिपोर्ट के मुताबिक, नए सिस्टम से खारे पानी से तैयार किए गए हाइड्रोजन का इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जा सकता है. इस सिस्टम के तहत बिजली के जरिए खारे पानी को ऑक्सीजन और हाइड्रोजन में बदला जाएगा. प्रयोग के दौरान माइनस 36 डिग्री सेल्सियम में भी नई मशीन काम करती हुई पाई गई.

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मंगल ग्रह पर ऑक्सीजन तैयार करने के लिए नासा ने पहले से एक सिस्टम तैयार किया है. लेकिन नया सिस्टम नासा के सिस्टम से 25 गुना अधिक ऑक्सीजन तैयार करता है. वैज्ञानिक यह मानते रहे हैं कि मंगल ग्रह पर थोड़े समय के लिए रहने पड़ भी एस्ट्रोनॉट्स को अपनी जरूरत की कुछ चीजें वहीं तैयार करनी होंगी, खासकर सांस लेने के लिए ऑक्सीजन और धरती पर वापस आने के लिए इंधन. 

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वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के विजय रमानी ने कहा है कि नया Brine Electrolyzer सिस्टम मंगल ग्रह के लिए काफी उपयोगी होगा, साथ ही यह धरती पर भी काम आ सकता है. उन्होंने कहा कि फिलहाल धरती पर इससे जुड़ी जो तकनीक मौजूद है वह काफी महंगी है और वह मंगल ग्रह पर फ्रीजिंग तापमान में भी काम नहीं करती. 
 

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रमानी ने कहा कि उनकी टीम अब नए सिस्टम का पोर्टेबल वर्जन बनाने पर काम कर रही है. रिसर्चर्स का कहना है कि मंगल ग्रह पर इस तकनीक को चलाने के लिए पानी को शुद्ध करने या फिर गर्म करने की जरूरत नहीं होगी.

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