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भारत में बन रही कोरोना वैक्सीन के लिए इतना बेकरार क्यों है पाकिस्तान?

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 7:24 PM IST
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पूरी दुनिया में वैक्सीन को लेकर होड़ मची है. हर देश अपने लोगों को कोरोना से मुक्ति दिलाने के लिए वैक्सीन हासिल करने में लगा है. हालांकि, पाकिस्तान अभी तक वैक्सीन के लिए दूसरे देशों की तरफ टकटकी लगाए हुए है. ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ पाकिस्तान (Drap) ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन और चीन की सिनोफार्म वैक्सीन खरीदने के फैसले को मंजूरी दे दी है लेकिन अब तक इस पर कोई कागजी समझौता नहीं हो सका है. 

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ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की प्रभावी दर 90 फीसदी तक रही है इसलिए पाकिस्तान ने सबसे पहले इसी वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी. भारत के सीरम इंस्टिट्यूट में बन रही वैक्सीन नेपाल, मालदीव और बांग्लादेश समेत तमाम देशों को भेजी जा चुकी है जबकि पाकिस्तान को अभी तक किसी भी वैक्सीन की एक भी खेप हासिल नहीं हो सकी है. पाकिस्तान का लक्ष्य अपनी 70 फीसदी आबादी को वैक्सीन लगाने का है, ऐसे में उसे करोड़ों डोज की जरूरत पड़ने वाली है. दूसरी मुश्किल, वैक्सीन की कीमत भी है. दूसरी वैक्सीन के मुकाबले भारत में बन रही वैक्सीन की कीमत काफी कम है.

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डॉन में छपी रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के लाखों वैक्सीन के प्रति डोज के हिसाब से 6 से 7 डॉलर (962-1,123 पाकिस्तानी रुपए) का खर्चा उठाने के लिए तैयार है. हालांकि यहां के स्थानीय ऑथराइज्ड डिस्ट्रीब्यूटर को इस बात की जानकारी नहीं है कि वैक्सीन की आपूर्ति कब तक की जा सकेगी.  

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पाकिस्तान के सबसे बड़े वैक्सीन और अन्य दवाओं के आयातकों में से एक सिंध मेडिकल स्टोर के रिप्रेजेंटेटिव उस्मान गनी ने डॉन वेबसाइट को बताया, 'चूंकि सरकार ने एस्ट्राजेनेका को मंजूरी दे दी है और हमें भी वैक्सीन के खेप आयात करने की अनुमति मिल चुकी है, हमने अनुमान लगाया है कि सरकार को ये 6-7 अमेरिकी डॉलर के बीच उपलब्ध होगी.'   

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पाकिस्तान में एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिली है. उस्मान का कहना है कि ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ पाकिस्तान के द्वारा इसका रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है लेकिन अब तक उनकी कंपनी को लिखित दौर पर इसका अप्रूवल नहीं मिला है और यहां तक कि वैक्सीन की कीमत भी तय नहीं की गई है.'  

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भारत की वैक्सीन पर उस्मान ने कहा, 'एस्ट्राजेनेका वैक्सीन भारत में बनाई जा रही है इसलिए वहां के लोगों को ये सबसे पहले मिलेगी और इसके बाद ये कोवैक्स (वैक्सीन के लिए वैश्विक गठबंधन) को दी जाएगी. इसके अलावा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश वैक्सीन के लिए पहले ही भुगतान कर चुके हैं.'

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उस्मान ने कहा, 'भारत के सीरम इंस्टीट्यूट से हमारे अच्छे संबंध हैं और हम उनसे जल्द से जल्द वैक्सीन लेने की कोशिश करेंगे.' उन्होंने कहा कि अगर एस्ट्राजेनेका वैक्सीन थोक में खरीदी गई तो ये अस्थाई रूप से लोगों को 962 से 1,123 पाकिस्तानी रुपए प्रति डोज के हिसाब से दी जाएगी. वहीं, अगर वैक्सीन की 10,000 या इससे ज्यादा डोज मंगाई गई तो इसकी कीमत 2,000 से 2500 तक रखी जाएगी.  

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एक अन्य सवाल के जवाब में उस्मान ने कहा कि भारत को ये वैक्सीन सस्ते दामों मे मिल सकती है क्योंकि एक तो ये वहीं बन रही है और दूसरी बात ये कि वहां के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उस प्लांट का दौरा कर वैक्सीन को फ्री में दिए जाने की मांग की थी जिसके बाद ये सहमति बनी कि इसे बहुत किफायती दाम पर दिया जाएगा.  

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ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ पाकिस्तान ने इसी हफ्ते कोरोना वायरस की एक और वैक्सीन चीन की सायनोफार्म को भी मंजूरी दी है. सरकार का दावा है कि मार्च तक इस वैक्सीन के कम से कम 10 लाख डोज मंगा लिए जाएंगे. पाकिस्तान सरकार का लक्ष्य 70 फीसदी आबादी को वैक्सीन लगाने का है.  

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प्रधानमंत्री इमरान खान के स्पेशल असिस्टेंट फैसल सुल्तान ने एक प्रेस ब्रीफिंग में मीडिया को बताया कि पाकिस्तान ने Covid-19 वैक्सीन के लिए चीन और ब्रिटिश उच्चायोग से संपर्क किया है. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में चीन की कैनसिनो वैक्सीन के तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल किया जा रहा है जिसमें 1700 वॉलंटियर्स को वैक्सीन लगाई गई है. इसके नतीजे अगले महीने जारी कर दिए जाएंगे.  

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डॉक्टर सुल्तान ने कहा, 'हमें वैक्सीन कोवैक्स (वैक्सीन का वैश्विक गठबंधन) के जरिए मिलेगी. हमने ब्रिटिश राजदूत से भी मुलाकात की है और हमें उम्मीद है कि हम आपको जल्द अच्छी खबर सुनाएंगे.'

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